Old Testament
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रोमियों 12:3 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्योंकि मैं उस अनुग्रह के कारण जो मुझ को मिला है, तुम में से हर एक से कहता हूँ, कि जैसा समझना चाहिए, उससे बढ़कर कोई भी अपने आप को न समझे; पर जैसा परमेश्वर ने हर एक को परिमाण के अनुसार बाँट दिया है, वैसा ही सुबुद्धि के साथ अपने को समझे।
रोमियों 12:3 पद-दर-पद बाइबल टीका
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रोमियों 12:3 समानांतर पद और संबंधित वचन
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गलातियों 6:3 (HINIRV) »
क्योंकि यदि कोई कुछ न होने पर भी अपने आप को कुछ समझता है, तो अपने आप को धोखा देता है।

फिलिप्पियों 2:3 (HINIRV) »
स्वार्थ या मिथ्यागर्व के लिये कुछ न करो, पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो।

1 पतरस 5:5 (HINIRV) »
हे नवयुवकों, तुम भी वृद्ध पुरुषों के अधीन रहो, वरन् तुम सब के सब एक दूसरे की सेवा के लिये दीनता से कमर बाँधे रहो, क्योंकि “परमेश्वर अभिमानियों का विरोध करता है, परन्तु दीनों पर अनुग्रह करता है।”
रोमियों 12:3 का सेटिंग और संदर्भ
पवित्र ग्रंथ इस पाठ में बताता है कि विश्वास में कृपा (अनुग्रह) से मिली बुलाहट के अनुरूप ही सोच-विचार और आचरण का माप होना चाहिए। वचन कहता है कि परमेश्वर ने प्रत्येक सदस्य को परिमाण के अनुसार बाँट दिया है, ताकि हम अपनी योग्यता के अनुसार आत्म-गौरव न करें और विनय से अपना विभाग समझ लें। यह पाठ रोमियों 12 के केंद्र में है, जहाँ प्रेरित पौलुस विश्वास के चार लेखे—नयाय, सेवा, प्रेम—को व्यवहारिक जीवन के साथ जोड़ते हैं।
ईश्वर और विश्वास के बारे में क्या बताता है
पहली बातें यह कि हर एक को मिले हुए अनुग्रह के कारण आत्म-आत्मविश्वास नहीं, बल्कि विनम्रता चाहिए। परमेश्वर ने हर एक को एक-एक पद दे रखा है—यह दायित्व और समरसता की बात है, न कि श्रेष्ठता की। इससे स्पष्ट होता है कि ईश्वर की कृपा केवल उद्धार तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में उसके मानक और दायित्व तय होते हैं।
आवश्यक शब्दों और चित्रों की स्पष्टता
संबद्ध बाइबिल अंश (cross-references)
1) 1 कुरिन्थ 12:11-12 – प्रत्येक के पास एक ही आत्मा से विविध प्रकार के उपहार, ताकि सम्पूर्ण शरीर मजबूत हो। यह समान प्रावधान बताता है कि हर gift का उद्देश्य एकता और सहयोग है।
2) याकूब 1:5 – यदि किसी में ज्ञान की कमी हो तो ईश्वर से माँगे, और वह उदारता से दे। यह दूसरे प्रकार के परिमाण की ज्ञान की जरूरत बताता है ताकि हम विनय से आचरण करें।
3) 1 पतरस 4:10 – हर एक को उसका एक-एक उपहार दिया गया है, ताकि कलिसया सेवा में सहयोग दे।
आज के जीवन में व्यावहारिक अनुप्रयोग
मैथ्यू हेन्री के अनुसार एक बार उन्होंने लिखा: “God hath dealt to every man the measure of faith.” यह उद्धेश्य देता है कि हम एक-दूसरे के समान नहीं, बल्कि दिए गए दायित्वों के अनुसार एक-दूसरे की सहायता करें। (हेन्री की टिप्पणी में यह विचार उद्धृत रूप में उपलब्ध है.)
अलबर्ट बार्न्स कहते हैं कि इस पद की मूल प्रेरणा विनय और आत्म-गौरव के मुकाबले आध्यात्मिक समाज की स्थापना है—जो हमें एक दूसरे के गुणों को सम्मानपूर्वक स्वीकारना सिखाती है। (बार्न्स की टिप्पणी से समन्वयित सार बिंदु स्पष्ट है।)
एडम क्लार्क ने भी यह संकेत दिया है कि परमेश्वर ने हर सदस्य को उसकी जगह दी है ताकि समुदाय के समुचित संचालन में विविधताएँ एक साथ चलें; यह व्यक्तिगत श्रेष्ठता नहीं, बल्कि संस्थापक दायित्वों का संतुलन है।
इस प्रकार रोमियों 12:3 हमें एक तौल-तौल कर चलना सिखाता है—न तो अपने आप को कम आंकना, न ही अपनी योग्यताओं के आधार पर दूसरे लोगों को छोटा समझना; बल्कि ईश्वर की दी हुई क्षमताओं के अनुसार विनम्रता और सक्रिय भूमिका।
संक्षेप: अनुग्रह की पहचान, व्यक्तिगत दायित्व की स्वीकारोक्ति और समुदाय-उन्मुख आचरण—ये तीनों एक साथ मिलकर विश्वास के वास्तविक जीवन को निर्मित करते हैं।