Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीरोमियों 12:5 बाइबल पद की व्याख्या
रोमियों 12:5 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
वैसा ही हम जो बहुत हैं, मसीह में एक देह होकर आपस में एक दूसरे के अंग हैं।
रोमियों 12:5 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
रोमियों 12:5 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

1 कुरिन्थियों 10:17 (HINIRV) »
इसलिए, कि एक ही रोटी है तो हम भी जो बहुत हैं, एक देह हैं क्योंकि हम सब उसी एक रोटी में भागी होते हैं।

इफिसियों 4:25 (HINIRV) »
इस कारण झूठ बोलना छोड़कर, हर एक अपने पड़ोसी से सच बोले, क्योंकि हम आपस में एक दूसरे के अंग हैं। (कुलु. 3:9, रोम. 12:5, जक. 8:16)

मुख्य विचार: मसीह में एक देह के रूप में भीतरी योगदान और पारस्परिक अंगत्व
रोमियों 12:5 कहता है: “वैसा ही हम जो बहुत हैं, मसीह में एक देह होकर आपस में एक दूसरे के अंग हैं।” यहाँ प्रमुख विचार यह है कि ईश्वर का चुना हुआ समाज एक समग्र शरीर की तरह है, जहाँ हर सदस्य का योगदान आवश्यक है और हर अंग की भूमिका एक दूसरे के बिना अधूरी है। यह एकता केवल समान विचार या उद्देश्य नहीं, बल्कि जीवन के हर क्षेत्र में आपसी निर्भरता के साथ प्रवर्तित होती है।
साहित्यिक प्रसंग: पंगति और संरचना
रोमियों के पाठक के लिए यह पंक्ति रोमियों 12 के बहुवचन भाग की ऊर्जावान घोषणा है। आश्चर्य नहीं कि प्रेरित पौलुस ने पहले चरणों में अदर्शनात्मक तरीके से ईमानदार जीवन, सेवाभाव और आत्म-आत्मसमर्पण का आग्रह किया; अब वह विश्वासियों को एक दूसरे के साथ टिके रहने के लिए बुलाते हैं। ‘हम’ और ‘पंथ’ शब्द एक सामाजिक-आर्थिक-विवेकपूर्ण परिप्रेक्ष्य बनाते हैं, जहाँ करुणा, सहयोग और विशिष्ट शरीर-रचना के उदाहरण मिलते हैं।
धर्मशास्त्रीय महत्त्व
हमें स्पष्ट होता है कि ईश्वर के बारे में एकत्व और कई अंगों का संयोजन दोनों का संतुलन आवश्यक है। मसीह में एक देह बनना यह दर्शाता है कि ईश्वर अपने क्रम में विविधताओं के बावजूद एकता चाहते हैं। हर अंग की योग्यता, लाभ और जिम्मेदारी एक-दूसरे पर निर्भर है। इस भाव से समाज-परिवार, चर्च और कार्यस्थल सभी में एक सहयोगी संस्कृति बनती है, जिसमें व्यक्तिगत गुणों का समन्वय दिव्य योजना को साकार करता है।
पवित्रशास्त्र से सम्बन्ध
यह विचार 1 कुरिन्थियों 12 की मानव-शरीर-उदाहरण से निकटता से जुड़ता है, जहाँ अंग-पर-आंग के विविधता में भी एकता दिखाई देती है। इफिसियों 4 और 5 में भी आत्मिक गुट-निर्माण के बजाय एकसाथ रहने की प्रेरणा मिलती है। यीशु के शरीर की भाषा इस प्रकार मानती है कि विश्वासियों का समूह एक अतिरिक्त उल्लेखनीय जीवंत प्रणाली है, जिसमें हर सदस्य की भूमिका परमेश्वर के प्रेम को प्रदर्शित करती है।
विवेक-विकास के प्रश्न
तत्काल संदर्भ-निर्देश
यही विचार रोमियों 12:3–8 में और स्पष्ट होता है, जहाँ विश्वासियों की दीक्षित सेवा, दूत-प्रेरणा और प्रेम के मार्गदर्शन पर बल दिया गया है। इब्रानियों 10:24–25 भी समुदाय के प्रति सतर्कता और प्रेरणा की महत्ता को दर्शाते हैं, ताकि एक-दूसरे की भलाई में स्थिरता बनाये रखी जा सके। जैसे-जैसे हम 서로 के अंग बनते हैं, प्रेम और नम्रता से भरे निर्णय लिये जाते हैं।
संक्षिप्त निष्कर्ष
रोमियों 12:5 का संदेश है कि मसीह में हमारे जीवन का वास्तविक मूल्य एक दूसरे के साथ जुड़ाव में है। व्यक्तिगत प्रतिभा और सामुदायिक दायित्व मिलकर एक शक्तिशाली, सहायक और सेवामय समाज का गठन करते हैं। हर सदस्य के लिए अवसर है कि वह प्रेम के द्वारा शरीर की स्वास्थ्य में योगदान दे, ताकि ईश्वर का महान काम एक साथ आगे बढ़ सके।
पवित्र-वचन उद्धरण (केवल पूर्व-प्रकाशित भाष्यानुसार)
यदि आप उद्धरण चाहें तोMatthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संकलन से मिलने वाले उपयुक्त वाक्यों की चयनित संरचना के अनुसार उपयोग किया जा सकता है; यहाँ संक्षेप में एक सामान्य-सार दिया गया है: “एक देह” का प्रतीक-संकेत बताता है कि सत्य प्रेम-संवर्धन और परस्पर-स्वीकृति से मनुष्यों का समूह परमेश्वर के हाथों में एक सामूहिक सेवाकार्य बन जाता है।
क्रॉस-रेफरंस
1 कुरिन्थियों 12:12–27 — शरीर की विविधता और एकता; इफिसियों 4:11–16 — सेवकों द्वारा शरीर के निर्माण का उद्देश्य; जेम्स 2:1–4 — भेदभाव से बचना और एक समान प्रेम दिखना। इन संदर्भों से पाठ का समेकित अर्थ और व्यवहारिक अनुप्रयोग स्पष्ट होता है।