Old Testament
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रोमियों 12:10 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
भाईचारे के प्रेम* से एक दूसरे पर स्नेह रखो; परस्पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो।
रोमियों 12:10 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
रोमियों 12:10 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

यूहन्ना 13:34 (HINIRV) »
मैं तुम्हें एक नई आज्ञा देता हूँ*, कि एक दूसरे से प्रेम रखो जैसा मैंने तुम से प्रेम रखा है, वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो।

फिलिप्पियों 2:3 (HINIRV) »
स्वार्थ या मिथ्यागर्व के लिये कुछ न करो, पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो।

रोमियों 12:10 का अर्थ and संदर्भ
प्रकाशन-परिपेक्ष्य में यह वचन नए नियम की सामुदायिक जीवनशीलता पर केंद्रित है। रोमियों 12 अध्याय प्रार्थना, सेवा, और भाईचारे के व्यवहार की दिशा-निर्देश देता है। 12:10 विशेषकर प्रेरित-पुलक से भरे समुदाय में प्यार और सम्मान की स्पष्ट डोर दिखाता है: “भाईचारे के प्रेम से एक दूसरे पर स्नेह रखो; परस्पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो।” यह कर्तव्य दोहरी दिशा देता है— परिवार-जैसे बंधन में प्रेम बनाए रखना और समाज के भीतर एक दूसरे के सम्मान के लिए तत्पर रहना।
ईश्वर और विश्वास के बारे में पाठ से मिलने वाले मुख्य संकेत
यह वाक्य बताता है कि विश्वास ईश्वर की करुणा के उत्तर के रूप में व्यवहार में उतारना है। परमेश्वर का प्रेम भीतर से प्रेरित होकर बाहरी रिश्तों में स्पष्ट होना चाहिए। अरह से यह नहीं कि मिलावट भरे दिखावे के लिए प्रेम दिखाया जाए, बल्कि सत्य और तात्कालिक व्यवहार में प्रेम प्रकट हो।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की व्याख्या
इसमें एक ऐसी प्रेम-भावना है जो रब को मानने वालों के बीच आत्मीयता और एकता बनाती है। यह स्वार्थ-रहित है और जिम्मेदारी से जुड़ा है, जैसे एक परिवार के भीतर एक दूसरे के लिए सुरक्षित और गर्माहट भरा स्थान बनना।
यह क्रियात्मक प्रेम है— मुस्कान, सहायता, और दर्शाती है कि हम एक दूसरे के लिए सहानुभूति और दया दिखाते हैं।
यह अहंकार-नियंत्रण से मुक्त, विनम्र-आचरण को दर्शाता है; एक दूसरे की गरिमा और स्थान का सम्मान करना।
क्रॉस-रेफरेंस और उनके सम्बंध
1) पौलुस का अन्य स्थान: रोमियों 12:9 (सच्चे प्रेम की पहचान) — दिखाता है कि प्रेम में झूठ नहीं, बल्कि विकार-रहित व्यवहार होना चाहिए।
2) यूहन्ना 13:34-35 (नई भक्ति में प्रेम-नियम) — भाइयों के बीच प्रेम का नया आदर्श, जिससे संसार जान ले कि हम यीशु के अनुयायी हैं।
3) गलातियों 5:13 (स्वतंत्रता की सेवा) — प्रेम से एक दूसरे को सेवित करना, आत्म-स्वार्थ से मुक्त होकर एक दूसरे के साथ खड़े रहना।
अब-के लिए व्यावहारिक अनुप्रयोग
सरल निष्कर्ष
रोमियों 12:10 हमें बताता है कि ईश्वर के पीछे प्रेरणा बनकर प्रेम और सम्मान दोनों मिलकर विश्वासजीवन की वास्तविक पहचान बनाते हैं। आज के समय में भी यह आदेश वही है: एक-दूसरे को प्यार दें, एक-दूसरे का सम्मान करें, और सामुदायिक जीवन में प्रेम-आचरण को बढ़ाते रहें।
सूक्ष्म उद्धरण (public-domain टिप्पणियाँ)
यदि आप चाहें, तो नीचे दिए गए स्पष्ट उद्धरणों में से कुछ विचार-रेखा के रूप में मिलते हैं, परन्तु पूर्ण पाठ नहीं हैं:
“भाईचारे के प्रेम से एक दूसरे पर स्नेह रखना” और “परस्पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलना”—ये मंचन हैं कि प्रेम कैसे क्रिया बनकर सामने आता है।