Old Testament
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रोमियों 12:20 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
परन्तु “यदि तेरा बैरी भूखा हो तो उसे खाना खिला, यदि प्यासा हो, तो उसे पानी पिला; क्योंकि ऐसा करने से तू उसके सिर पर आग के अंगारों का ढेर लगाएगा।” (नीति. 25:21-22)
रोमियों 12:20 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
रोमियों 12:20 समानांतर पद और संबंधित वचन
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नीतिवचन 25:21 (HINIRV) »
यदि तेरा बैरी भूखा हो तो उसको रोटी खिलाना; और यदि वह प्यासा हो तो उसे पानी पिलाना;

मत्ती 5:44 (HINIRV) »
परन्तु मैं तुम से यह कहता हूँ, कि अपने बैरियों से प्रेम रखो और अपने सतानेवालों के लिये प्रार्थना करो। (रोम. 12:14)

निर्गमन 23:4 (HINIRV) »
“यदि तेरे शत्रु का बैल या गदहा भटकता हुआ तुझे मिले, तो उसे उसके पास अवश्य फेर ले आना।
रोमियों 12:20 पर टिप्पणि का सार অর্থ
अर्थ: यदि शत्रु हमें नुकसान पहुँचाने की चेष्टा करे, तब भी प्रेमपूर्ण प्रतिशोधन में उसकी आवश्यकता-पूर्ति करके हम उसका दिल बदलने का प्रयत्न करते हैं; क्योंकि शांति के रास्ते से हमें वह बंधन टूटने का अवसर मिलता है और प्रेम ही सबसे प्रभावी प्रदर्शन है। यह कृत्य परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप है कि हम बुराई पर भी अच्छाई से उत्तर दें।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह पाठ रोमियों की प्रेरित पौलुस की नैतिक-आचार स्तम्भिका का हिस्सा है, जहाँ वे विश्वासियों से एक नवीन जीवन शैली के मानक सुझाते हैं। पुराने नियम की बुद्धि के अनुसार ईसा से पहले के कर्म-फल और शांति के लिए प्रतिशोध की परम्परा थी; परंतु न्यू टेस्टामेंट में प्रेम, दया और क्षमा की कट्टरता अधिक ऊँचाई पर है। नीती-उद्धरण (नीति. 25:21-22) का संदर्भ स्पष्ट करता है कि दूसरों के प्रति हमारे क्रिया-व्यवहार को लेकर हमारा लक्ष्य सिर्फ बदला नहीं, बल्कि उन्हें उनकी स्थिति से उबारना और ईश्वर के प्रेम को दिखाना है।
व्याख्यात्मक विश्लेषण
- आगहट की कठिन स्थिति: "यदि तेरा बैरी भूखा हो"—यहाँ बैरी से आशय उस व्यक्ति से है जो दुश्मन की तरह व्यवहार करता है, और भूखा/प्यासा होने पर उसकी जरूरतें पूरी करने का निर्णय मनुष्य के स्वाभाविक प्रतिशोध को रोक देता है।
- वचन की क्रिया: "खा लिला" और "पानी पिला"—जरूरतमंद को खाना-पानी देकर हम शत्रुता के दायरे से बाहर आ जाते हैं, और इस क्रिया के द्वारा प्रतिष्ठित क्रोध को शांतिकारक बनाते हैं।
- प्रभाव का सिद्धांत: ऐसा करने से "तू उसके सिर पर आग के अंगारों का ढेर लगाएगा"—यानी प्रतिशोध से मिलने वाला गुस्सा पीछे हट सकता है और बन्धुत्व, नम्रता और क्षमा की संभावनाएँ बनती हैं। यह प्रेरित करती है कि कैसे प्रेम वास्तविक परिवर्तन लाने की शक्तिशाली चाबियाँ है।
महत्वपूर्ण क्रॉस-रेफरेंस और उनका संक्षेप説明
संक्षिप्त थीमेटिक सूची
अनुवादित टिप्पणी और समसामयिक निष्कर्ष
यह संदेश स्पष्ट करता है कि ईश्वर के बच्चों का व्यवहार संसार के नियमों के अनुरूप नहीं चलता। चोट पहुँचाने पर भी असली शक्ति प्रेम में है—जब हम adversary की स्थिति को समझते हुए उसकी जरूरतों को पूरा करते हैं, तब हम मानवीय धारणाओं से ऊपर उठते हैं और परमेश्वर की आशीष के पात्र बनते हैं।
पब्लिक-डोमेन टिप्पणीकारों के छोटे उद्धरण (संक्षेप)
1) मैथ्यू हेनरी के अनुसार: शत्रु के प्रति दया से स्मरण होता है कि नैतिक सुधर प्रेम से ही संभव है, प्रतिशोध नहीं।
2) अल्बर्ट बार्न्स के अनुसार: प्रतिशोध का भाव क्रोध को बढ़ाता है; प्रेम के कार्य से ही समाज में स्थायी शांति संभव है।
3) एडम क्लार्क के अनुसार: कुरेदते हुए शत्रु की आवश्यकता पूरी करना ईश्वर की करुणा का वास्तविक परीक्षण है कि क्या हम अभी भी विश्वास के अनुसार चलते हैं।
कॉपरेशनल उद्धरण जिक्र
अगर आप चाहें तो इन पंक्तियों में Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संক্ষिप्त विचारों के संपूर्ण उद्धरण भी देख सकते हैं; यहाँ केवल उनकी सार्थक विचारधारा का संक्षेप प्रस्तुत किया गया है।
प्रायोगिक निष्कर्ष
रोमियों 12:20 हमारे लिए एक व्यावहारिक चैलेंज है: जब हमारा प्रतिद्वंद्वी दयायुक्त हो, तो हम उसे बेहतर रास्ते दिखाने के लिए उत्तम आचरण अपनाते रहें। छोटी-छोटी दयाएं बड़े परिवर्तन का भाग होती हैं।