नीतिवचन 25:21 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

यदि तेरा बैरी भूखा हो तो उसको रोटी खिलाना; और यदि वह प्यासा हो तो उसे पानी पिलाना;

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नीतिवचन 25:21 पद-दर-पद बाइबल टीका

नीतिवचन 25:21–22 का दर्शन: शत्रु के प्रति प्रेम और आशीर्वाद

यह छोटा-सा संदेश न केवल व्यवहारिक नैतिकता देता है, बल्कि यह दिल की रचना—दिल से दिल तक की दीप्ति—का सार भी बताता है। जब किसी भूखे या प्यासे शत्रु की मदद करनी पड़ती है, तो वह केवल भौतिक सहायता नहीं, बल्कि संबंधों के निर्माण और ईश्वर के करुण्य को प्रकट करने का अवसर बन जाता है। हमें यह याद दिलाता है कि जीवन में सबसे बड़ी विजय प्यार और धैर्य से प्राप्त होती है, यहाँ तक कि हमारे विरोधी भी ऐसे कर्म देखकर डरते नहीं, बल्कि परिपक्व बनते हैं।

पद्य का पाठ और स्थान

नीतिवचन में यह निर्देश एक घटनात्मक, नियमित व्यवहार का सुझाव देता है: यदि तुम्हारा बैरी भूखा हो तो उसे रोटी खिलाना और प्यासा हो तो उसे पानी पिलाना। यह एक क्रिया-प्रतिक्रिया है जिसमें प्रतिकूलता भी अवसर बन जाती है। सार यह है कि दुष्मन के साथ भी कृपा ही आदर्श है; इससे शत्रुता को क्षमा की दिशा में मोड़ा जा सकता है, और यह व्यक्तिगत और सामाजिक शांति की बुनियाद रखती है।

मुख्य आध्यात्मिक पाठ

इस शास्त्रीय उपदेश का केंद्रीय पाठ यह है: अपने प्रतिद्वंदी के लिए प्रेम और सहायता प्रदर्शित करना प्रभु के समानता की पराकाष्ठा है। यह सिर्फ एक नैतिक आचार नहीं है, बल्कि परमेश्वर की करुणा के अनुभव को साझा करने का मार्ग है। जब हम ऐसी सहायता देते हैं, तो हम अपने हृदय की कठोरता को ढीला करते हैं और एक उच्चतर न्याय की दिशा में बढ़ते हैं—जो वर्षों से स्थापित सामाजिक अच्छाइयों की भूमिका भी निभाती है।

अन्य प्रेरक संदर्भों के साथ तुलना

– रोमी 12:17–21 में आगाह किया गया है कि न किसी से बदला लो, बल्कि दुश्मन के साथ भी भलाई करो ताकि यह स्थान बन सके।
– मलाकी 1:2–3 में परमेश्वर की करुणा और न्याय के साथ, दुष्टों के प्रति दयालु व्यवहार उसी प्रकार उभर कर आता है।
– मत्ती 5:44 में यीशु कहते हैं कि प्रेम अपने शत्रुओं के लिए हो, ताकि आप परम पिता के बच्चों की तरह बनें।

इन संदर्भों में एक बात स्पष्ट है: कठिन परिस्थितियों में कृतज्ञता और प्रेम दिखाने से मनुष्यता का मान बढ़ता है, और ईश्वर की योजनाओं में जीवन का तटस्थ नहीं, बल्कि सक्रिय भागीदारी बनती है।

व्यावहारिक अनुप्रयोग

  • घरेलू और समुदायिक रिश्तों में काटती-छाँट से ऊपर उठकर, जरूरतमंद विरोधी के लिए भी मदद की योजना बनाएं।
  • कठिन परिस्थितियों में धैर्य दिखाएं: प्रतिद्वंद्वी के साथ भी सद्भावना बनाए रखें, ताकि संघर्ष समाधान के मार्ग खुले रहें।
  • करुणा को व्यवहार में लाकर सामाजिक शांति और रिश्तों की स्थिरता बढ़ाने की कोशिश करें।

सार और निष्कर्ष

नीतिवचन 25:21–22 का मूल संदेश है: शत्रु के प्रति दया और सहायता परमेश्वर के प्रेम की प्रतिध्वनि है। यह हमारी आचरण-योजनाओं के लिए एक मापक है—क्या हम कठिनाइयों में भी प्रेम दिखाते हैं? क्या हम दयालु बनकर शत्रु के साथ भी एक नया संबंध शुरू कर सकते हैं? यदि हम ऐसा करते हैं, तो न केवल हमारे शत्रु में परिवर्तन संभव होता है, बल्कि 우리 अपने हृदय भी ईश्वर की करुणा से परिपूरित होते हैं। यह जीवन की सबसे ऊँची रीति है: प्रेम की क्रिया से शत्रुता को सामंजस्य में बदलना।

उद्धरण नोट: इस भाग के लिए Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सामान्य-तिथि टिप्पणियों से सुसंगत विचार समाहित किए गए हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

नीतिवचन 25:21 समानांतर पद और संबंधित वचन

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परन्तु “यदि तेरा बैरी भूखा हो तो उसे खाना खिला, यदि प्यासा हो, तो उसे पानी पिला; क्योंकि ऐसा करने से तू उसके सिर पर आग के अंगारों का ढेर लगाएगा।” (नीति. 25:21-22)

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“यदि तेरे शत्रु का बैल या गदहा भटकता हुआ तुझे मिले, तो उसे उसके पास अवश्य फेर ले आना।

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परन्तु मैं तुम से यह कहता हूँ, कि अपने बैरियों से प्रेम रखो और अपने सतानेवालों के लिये प्रार्थना करो। (रोम. 12:14)

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