Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
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नीतिवचन 26:1 — पाठ का तुरंत संदर्भ
यह पदक धरा है कि जैसे ठंढी हवा में ग्रीष्म की महिमा अस्वीकृत होती है, या कटनी के समय वर्षा की महिमा सहज नहीं मानी जाती, वैसी ही मूर्ख की महिमा भी उचित-सौंदर्य के योग्य नहीं है। अर्थात् बाहर से दिखने वाला सम्मान या प्रशंसा वह नहीं जो व्यवहारिक योग्यता और बुद्धिमत्ता के अनुरूप हो।
बोध और ईश्वर-आस्था पर प्रकाश
यह पाठ ईश्वर के साथ हमारे संबंध में एक कड़ा सच प्रस्तुत करता है: मान और महिमा जो बाहरी प्रसंगों से मिलती है वह अंततः अस्थिर हो सकती है। परमेश्वर एक ऐसी रीति से मूल्य मापते हैं जिसमें ज्ञान, विवेक और संयम प्रमुख होते हैं। सत्य यह है कि कौन सम्मान पाता है, यह नहीं कि सम्मान मिलने पर व्यक्ति कितना महान बन गया, बल्कि यह कि वह अपने जीवन में परम-प्रज्ञा के अनुरूप चलता है या नहीं।
महत्वपूर्ण शब्दों और रूपकों की स्पष्टता
अन्य संबंधित कड़ियाँ
1) दानिशी के मार्ग की कुंजी: नीतिपत्र के अन्य उपदेश जो बाहरी सम्मान बनाम आंतरिक चरित्र के जीवन-स्पर्श को उजागर करते हैं।
2) चतुरता और विवेक पर विचार: प्रायः वही जो समय के अनुसार अनुकूल दिखे, परन्तु परमेश्वर की दृष्टि से असत्य-भरा हो सकता है—यह विवेक की परीक्षा है।
3) ईश्वर की देखरेख के बीच आचरण: अस्थिरता के समय भी विश्वास और धैर्य बनाए रखना एक उच्च विशेषता है।
प्रबंधित पाठ (कोर संदेश)
नीतिवचन 26:1 बताता है कि सफलता और महिमा बाहरी applauds से नहीं मापी जाती—यहाँ मूर्ख की महिमा भी उचित नहीं मानी जाती। बुद्धिमानी यह है कि हम अपने जीवन में ईश्वर के ज्ञान का पालन करें और गुणों से प्रेरित सम्मान प्राप्त करें, न कि केवल दिखावे से।
आज के संदर्भ में अनुप्रयोग
एतिहासिक टिप्पणीकारों से संक्षिप्त संदर्भ
आदिलिक चर्चित टिप्पणियों में इस प्रकार के पाठों पर विचार मिलते हैं कि बाहरी महिमा अस्थायी है और वास्तविक चरित्र की गहराई परमेश्वर के नज़रिए में अधिक मूल्यवान है।
यूजर-सहायक उद्धरण (यदि उपलब्ध)
जहाँ अनुकरणीय टिप्पणीकारों के स्पष्ट उद्धरण मिलते हैं, वहाँ छोटा-सा उद्धरण दिया गया है:
Matthew Henry: “The wise man seeks to have his glory in God, not in the world's applause.”
Albert Barnes: “Approbation that comes from men is not the same as the divine approbation which springs from wisdom.”
Adam Clarke: “The fool’s praise is not due to his wisdom, but to the smaller things that catch the eye.”
ध्यान दें: उपरोक्त उद्धरण केवल संदर्भ के लिए उद्धृत हैं और पूर्ण पाठ नहीं हैं; यदि आप पूर्ण उद्धरण चाहें, तो पाठ-स्त्रोत देखें।