Old Testament
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नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
नीतिवचन 28:1 नीतिवचन 28:2 नीतिवचन 28:3 नीतिवचन 28:4 नीतिवचन 28:5 नीतिवचन 28:6 नीतिवचन 28:7 नीतिवचन 28:8 नीतिवचन 28:9 नीतिवचन 28:10 नीतिवचन 28:11 नीतिवचन 28:12 नीतिवचन 28:13 नीतिवचन 28:14 नीतिवचन 28:15 नीतिवचन 28:16 नीतिवचन 28:17 नीतिवचन 28:18 नीतिवचन 28:19 नीतिवचन 28:20 नीतिवचन 28:21 नीतिवचन 28:22 नीतिवचन 28:23 नीतिवचन 28:24 नीतिवचन 28:25 नीतिवचन 28:26 नीतिवचन 28:27 नीतिवचन 28:28



नीति‑सूत्र 28:16 का सारगर्भित अर्थ
कथन का केंद्रीय संदेश यह है: बिना समझ के नेता बड़े आचरणों से अंधेरा फैलाते हैं; वहीं, लालच जो शत्रु है, वह दीर्घायु तक पहुँचाए जा सकता है। यह verse प्रकट करता है कि सत्ता और धन के प्रति अंध विश्वास साधारण शासक को भी विनाशकारी बना सकता है, जबकि कुछ हद तक लालच का नियंत्रण रखने वाला व्यक्ति स्थायित्व और लंबी आयु के साथ समाज को सुरक्षित रख सकता है।
साहित्यिक संदर्भित ढांचा
नीति‑सूत्रों में यह पंक्ति एक नीतिगत दर्पण है: यह शासक की कसौटी है—बुद्धिमानी और विवेक को प्राथमिकता दें; क्योंकि बिना विवेक के सत्ता न केवल नुकसान दे सकती है, बल्कि समाज में अनिश्चितता और अन्याय बढ़ाती है। साथ ही, लालच से प्रेरित प्रतिक्रियाएं भी दीर्घकालीन समस्या बन जाती हैं, भले वे कुछ समय के लिए लाभ दिखाएँ। यह विचारशक्ति न केवल शासक‑जगत पर लागू है, बल्कि प्रत्येक नेतृत्व‑स्थिति पर लागू होता है, जिसमें धकेलने वाले गुणों के विरुद्ध आत्म‑नियमन की आवश्यकता है।
धर्मार्थ महत्व
यह वाक्य नीति के साथ नैतिकता की गूढ़ता भी प्रस्तुत करता है। समझ की कमी से उत्पन्न अन्याय, गलत निर्णय और असंख्य लोगों की पीड़ा की जड़ बनती है।另一方面, लालच एक बुरी इच्छा नहीं केवल व्यक्तिगत लाभ लाता है, बल्कि समुदाय की समृद्धि और न्याय की व्यवस्था को अस्थिर करता है। इस तरह, व्यवहारिक विवेक और परोपकार दोनों पात्रों के लिए आवश्यक बन जाते हैं।
बाइबलीय संबद्ध संदर्भ
यह विचारधारा पुराणिक और गद्य दोनों प्रकार के बाइबल पाठों में झलकती है: प्रशासनिक फैसलों में विवेक की महत्ता के साथ साथ धन‑लिप्सा से उत्पन्न भ्रष्टाचार के निषेध में। तीन प्रमुख cross‑references से लिंक बनते हैं:
इन संदर्भों से एक संगत पाठ निकलता है: विवेक और नैतिकता ही नेतृत्व की सच्ची पूंजी हैं, और लालच के पथ पर चलना समाज के लिए नुकसानदेह है।
चिंतन‑प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
नीति‑सूत्र 28:16 एक चेतावनी है: समझ से ही समाज सुरक्षित रहता है; अज्ञान और धनी‑लालच का मिलन विनाशकारी हो सकता है। बुद्धिमत्ता और नैतिक नियंत्रण—ये दोनो मिलकर नेतृत्व की जिम्मेदारी बनाते हैं कि वे केवल सत्ता के राज नहीं, बल्कि न्याय और करुणा के मार्ग प्रस्तुत करें।
पूर्व‑पासी उल्लेखित विचारधारा (सार) — संदर्भ उद्धरण
अगर किसी पाठक ने Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के शब्द‑कथनों की आवश्यकता बताई हो, तो उनके मौलिक टिप्पणियों के संकुचित अंश इस तरह से इस्तेमाल होते हैं: Henry के विवेक और सत्ता के संयम पर केन्द्रित विचार, Barnes के नैतिक दायित्व एवं Clarke के प्रशासनिक विवेक पर बल। नीचे उद्धृत पूर्ण वाक्यांशों के लिए उनके प्रकाशित लेखन से संक्षिप्त उद्धरण दिए जाते हैं (यदि उपलब्ध हों):
उद्धरण: “...” (यदि उपलब्ध हो) — Matthew Henry; “...” — Albert Barnes; “...” — Adam Clarke.