Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
नीतिवचन 28:1 नीतिवचन 28:2 नीतिवचन 28:3 नीतिवचन 28:4 नीतिवचन 28:5 नीतिवचन 28:6 नीतिवचन 28:7 नीतिवचन 28:8 नीतिवचन 28:9 नीतिवचन 28:10 नीतिवचन 28:11 नीतिवचन 28:12 नीतिवचन 28:13 नीतिवचन 28:14 नीतिवचन 28:15 नीतिवचन 28:16 नीतिवचन 28:17 नीतिवचन 28:18 नीतिवचन 28:19 नीतिवचन 28:20 नीतिवचन 28:21 नीतिवचन 28:22 नीतिवचन 28:23 नीतिवचन 28:24 नीतिवचन 28:25 नीतिवचन 28:26 नीतिवचन 28:27 नीतिवचन 28:28



नीतिवचनों 28:24 का व्याख्यात्मक सार: माता-पिता को धोखा देना—कठोर परिणाम
इस पद में यहूद-नैतिकता और पारिवारिक सम्मान के बीच एक स्पष्ट विभाजन दिखाया गया है: जो अपने माता-पिता को लूटकर यह कहता है कि कोई अपराध नहीं, वह नाश करनेवाले का साथ देता है। सीधे शब्दों में कहा जाए, तो परमेश्वर के आदेश के अनुसार माता-पिता का आदर करना और उनका सम्मानित अधिकार स्वीकारना, हमारे चरित्र की कसौटी है। जब व्यक्ति इस मूल मान्यता को ही चुनौती देता है और उसे “किसी अपराध नहीं” कहकर ढाल बनाता है, तो वह समाज के ढांचे को तोड़ देता है और नाश के रास्ते पर कदम बढ़ाता है।
साहित्यिक परिप्रेक्ष्य
नीतिवचन में यह निवारण-पूर्ण चेतावनी एक सूक्ष्म नैतिक पाठ के रूप में प्रकट होती है: परिवार के विकार और सत्य से परहेज़ के प्रभाव सामाजिक और नैतिक जीवन पर गहरे पड़ते हैं। यह वाक्य “लूटना” और “कहना कि अपराध नहीं” के संयोजन से एक नज़र डालता है कि अंधेरे में किया गया छल कैसे परिवार की सुरक्षा और समाज की नैतिक संरचना को असुरक्षित बनाता है।
धार्मिक और नैतिक महत्त्व
पिता-माता के अधिकार और सम्मान का उल्लंघन परमेश्वर की व्यवस्था के विरुद्ध माना गया है। यह नीतिवचन एक चेतावनी है कि पाप को सामान्य बनाने की कभी-भी अनुमति नहीं है; जब कोई व्यक्ति अपने प्रियजनों के प्रति विश्वासघात करता है, तो वह सचमुच “नाश करनेवाले” की संगति में चला जाता है। यह आत्म-गौरव और स्वार्थ को नियंत्रित करने की आवश्यकता पर बल देता है ताकि नीचे गिरना न हो।
अनुकरणीय विचार (Cross-references)
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि परिवार-धर्म और सामाजिक नैतिकता एक साथ चलते हैं—यदि एक मूल मान्यताएँ टूटती हैं, तो सम्पूर्ण समाज पर प्रभाव पड़ता है।
विचार-विमर्श के प्रश्न
संक्षिप्त निष्कर्ष
नीतिवचन 28:24 स्पष्ट करता है कि माता-पिता के प्रति सम्मान और परिवार के ढांचे की रक्षा करना कितनी गहराई से नैतिक जीवन बनाता है। जो यह मानते हैं कि “कहीं अपराध नहीं” कहकर वे गलत मार्ग पर चल दें, वे न सिर्फ़ व्यक्तिगत पतन के रास्ते पर हैं, बल्कि वे समाज के नैतिक आधार से भी दूर जाते हैं। इसलिए व्यवहार में सत्य, ईमानदारी और परिवार के लिए जिम्मेदारी सर्वोपरि रखें।
सार-संयुक्त टिप्पणी— यह पद Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डायम के विवेचनात्मक विचारों के साथ समाहित है: परिवार के सम्मान को अस्वीकारना परमेश्वर की व्यवस्था के विरुद्ध है; परमार्थ और सामाजिक न्याय एक-दूसरे से गहराई से जुड़े हैं, और छल के पल में भी वह समाज के ढांचे को नुकसान पहुँचाता है।