Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
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नीतिवचन 13:1 का पाठ— immediate setting
पुत्रों के लिए धर्मशिक्षा के महत्त्व को बार-बार रेखांकित किया गया है। यह पद एक पिता के आह्वान को दर्शाता है: बुद्धिमान पुत्र जो पिता की शिक्षा को सुनता है, वह ज्ञान की दिशा में बढ़ता है; वहीं ठट्ठा करनेवाला जबर्दस्ती घुड़की को भी नहीं सुनता। गुरु-शिष्य के रिश्ते में यह पाठक को जीवनपरक मूल्य देता है कि सीखना और आदेशों को गले लगाना कितनी बड़ी बुद्धिमत्ता है।
ईश्वर और विश्वास के संदर्भ में पाठ का संकेत
यहशब्द बताता है कि परमात्मा के नियमों को मानना और नीतिगत शिक्षा को स्वीकारना विश्वास की सहज अभिव्यक्ति है। पिता-व्यक्ति के रूप में स्थानीय समुदाय में स्थापित नैतिक शिक्षा की महत्ता सीधे परमेश्वर के मार्गदर्शन से जुड़ी है: जो ज्ञान को receive करता है, वह जीवन के मार्ग पर चलता है; जो तंज और घुड़की से दूर नहीं होता, वह कठिनाइयों के बीच भी पथ को नहीं पहचान पाता।
महत्त्वपूर्ण शब्द-चित्र
संदर्भित पवित्र ग्रंथ
नीतिवचन-परिवार के अन्य स्थान भी इस विचार को पुष्ट करते हैं कि शिक्षा ग्रहण करना और दुष्कर सलाह को स्वीकारना विवेक की निशानी है (उदा. “चेतावनी सुनना” और “धीमे-धीमे ज्ञान पाना” के विषय में संदर्भ)। साथ ही यह भी दिखता है कि ढिढ़ला बनना और विवादात्मक आचरण से सीखने की क्षमता घटती है।
Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से संक्षिप्त अंतर्दृष्टि
प्रमाण-स्रोतों के प्रकाश में यह पाठ बच्चों के लिए पवित्र-आदर्श है: बुद्धिमान पुत्र अपने पिता की शिक्षा को मानकर जीवन की दिशा बनाता है। ठट्ठा करनेवाला शिक्षा को अनसुना करता है और परिणामतः बहुधा स्वयं को नुकसान पहुँचाता है।
Henry के अनुसार यह उपदेश यह बताता है कि मनुष्य के भीतर से ही शिक्षा के प्रति रवैया निर्धारित होता है—जो सुनेगा, वह अनुदेश से लाभ उठाएगा; जो हंसी-ठिठोली से रुका रहता है, वह सच्चे ज्ञान से दूर रहेगा।
अलबर्ट बार्न्स का मानना है कि शिक्षा स्वीकारना न केवल जानकारी प्राप्त करना है, बल्कि यह जीवन-आचरण में परिवर्तन का कारण बनता है; पुत्र का सम्मानित सुनना माँगता है कि मन स्पष्ट और विनयशील हो।
Adam Clarke भी इस बात पर जोर देते हैं कि शिक्षा ग्रहण करना वास्तविक विवेक है, जो दिल की स्वीकृति से जुड़ा है; तंज-खेद से भरे हुए मन घुड़की को भी नहीं समझ पाते।
आज के पाठ के साथ व्यवहारिक अनुप्रयोग
क्रॉस-रेफरेंस (संक्षेप)
यहे विचार अन्य सत्यों से मिलते हैं, जैसे कि कठिनाई में शिक्षा की महत्ता बताने वाले संकेत; प्रभु की शिक्षा को समर्पण; तथा बुद्धिमत्ता के मार्ग पर चलने के लिए विनम्रता के महत्व को रेखांकित करने वाले संदर्भ।