Old Testament
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नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
नीतिवचन 28:1 नीतिवचन 28:2 नीतिवचन 28:3 नीतिवचन 28:4 नीतिवचन 28:5 नीतिवचन 28:6 नीतिवचन 28:7 नीतिवचन 28:8 नीतिवचन 28:9 नीतिवचन 28:10 नीतिवचन 28:11 नीतिवचन 28:12 नीतिवचन 28:13 नीतिवचन 28:14 नीतिवचन 28:15 नीतिवचन 28:16 नीतिवचन 28:17 नीतिवचन 28:18 नीतिवचन 28:19 नीतिवचन 28:20 नीतिवचन 28:21 नीतिवचन 28:22 नीतिवचन 28:23 नीतिवचन 28:24 नीतिवचन 28:25 नीतिवचन 28:26 नीतिवचन 28:27 नीतिवचन 28:28



निष्कर्ष व प्रत्यक्ष अर्थ
नीतिवचन 28:1 का अर्थ है: दुष्ट लोग जब तक उनका शिकार नहीं होता, वे डरते नहीं; परन्तु धर्मी लोग चिन्ता-भरे पल भी संतोष के साथ निडर रहते हैं। धर्मी का आचरण आत्मविश्वास पैदा करता है, क्योंकि उनका भरोसा परमेश्वर के refinery में है और वे अपनी आस्थाओं के आधार पर समर उठाते हैं।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
नीतिवचन सुलैमान के कथन हैं, जो प्रायः प्रबोधन और नैतिक मार्गदर्शन देते हैं। यह शास्त्र दुष्टों के भय और धर्मियों की दृढ़ता के contrast को स्पष्ट करता है। इस पाठ में “भागना” का वर्णन उस अस्थिरता को दर्शाता है जो दुष्टों के आचरण में दिखती है—वे डर से तेज भागते हैं जब परिस्थितियाँ पलटती नहीं हैं—जबकि धर्मी, संकट के सामने भी धैर्य और विश्वास बनाए रखते हैं, जैसे जवान सिंह निर्भय रहते हैं।
व्याख्यात्मक अवलोकन
छोटे विषयगत बिंदु
कथा-संग्रहाय cross-reference
नीतिवचन 14:26-27: ईश्वर का भय सुरक्षा और साहस देता है; उदाहरण के तौर पर धर्मी की शान्ति और निडरता गहरी होती है.
भजन 27:1: “यहोवा मेरा प्रकाश और मेरे उद्धारकर्ता है, मैं किसका डर करूँ?”—यह उद्धारक आत्मविश्वास का आधार है, जो दुष्ट-आक्रमणों के समय भी स्थिर रहता है।
यशायाह 41:10: प्रभु का समर्थ-आश्वासन भय को मिटाता है और साहस देता है, जो इस पंक्ति के संदेश से मेल खाता है कि धर्मी संकट में भी निडर रहते हैं।
महत्वपूर्ण विचार
संक्षिप्त निष्कर्ष
इस वचन से सीख मिलती है कि जीवन के भय-घूमते चक्र में धर्मी व्यक्ति अपनी आस्था से स्थिर रहें, क्योंकि सत्य-आधार पर टिके रहने वाला व्यक्तित्व भय के सामने भी निडरतापूर्ण रहता है—यह परमेश्वर की कृपा पर निर्भरता का प्रमाण है।
प्रायोगिक takeaway
यह भाग पुराने टिप्पणीकारों के भावार्थ से प्रेरित है, जिसमें Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-domain विचारों का संयुक्त सार संप्रेषित किया गया है। यदि उद्धरण उपलब्ध हों, तो नीचे के संकेत के अनुसार उल्लेखित हैं:
Johannine clarity: "दुष्ट लोग" बनाम "धर्मी" की यह धारणात्मक तुलना स्पष्ट करती है कि आध्यात्मिक स्थिति कैसे व्यवहारिक परिणामों में बदलती है।
अनुभव-संरचना: यह पाठ अक्सर उनके विचार में एक सामान्य नियम के रूप में प्रस्तुत किया गया है कि परमेश्वर-आधारित सुरक्षा भय से मुक्त करती है और आत्म-विश्वास पैदा करती है।
उद्धरणs: यदि आवश्यक हों, हम Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के छोटे-छोटे शब्दों के सीधे अंश उल्लेख कर सकते हैं, परन्तु संपूर्ण पाठ सीमित शब्दों के भीतर रखा गया है.