Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
नीतिवचन 21:1 नीतिवचन 21:2 नीतिवचन 21:3 नीतिवचन 21:4 नीतिवचन 21:5 नीतिवचन 21:6 नीतिवचन 21:7 नीतिवचन 21:8 नीतिवचन 21:9 नीतिवचन 21:10 नीतिवचन 21:11 नीतिवचन 21:12 नीतिवचन 21:13 नीतिवचन 21:14 नीतिवचन 21:15 नीतिवचन 21:16 नीतिवचन 21:17 नीतिवचन 21:18 नीतिवचन 21:19 नीतिवचन 21:20 नीतिवचन 21:21 नीतिवचन 21:22 नीतिवचन 21:23 नीतिवचन 21:24 नीतिवचन 21:25 नीतिवचन 21:26 नीतिवचन 21:27 नीतिवचन 21:28 नीतिवचन 21:29 नीतिवचन 21:30 नीतिवचन 21:31



नीतिवचन 21:1 - राजा का मन जल की धाराओं के समान यहोवा के हाथ में रहता है
तुरंत पंक्तिबद्ध संदर्भ के साथ: यह पद राजा के मन की सत्ता और परमेश्वर की सर्वोच्च शासन को दर्शाता है। जल की धाराओं जैसे प्रवाह में मन को मोड़ना यह कहता है कि सत्ता का पथ कितनी भी दृढ़ क्यों न हो, परमेश्वर के हाथों में नियंत्रण है—वे चाहते हैं जहां वह मोड़ दें वही होता है।
ईश्वर के बारे में संकेत
यह पाठ बताता है कि प्रभु का निर्णय और राज्य संचालन मन पर प्रभाव डालते हैं। राजा का मन वस्तुतः एक ऐसा उपकरण है जिसे परमेश्वर दिशा देने में सक्षम है। इस दृष्टि में परमेश्वर के साथ भक्ति और विनम्रता जरूरी है कि वह अपने योजनाओं में मन को चलाने दे, न कि अपने इरादों को आत्म-स्व prioritise करें।
महत्त्वपूर्ण शब्द और छवि
अनुरेखित पारायणियाँ (Related Passages)
कई अन्य जगहों में परमेश्वर के निर्देश और सिंहासन के प्रशासन पर बल दिया गया है:
इन तिथियों के साथ विचार यह है कि मानव की पसंद और परमेश्वर की अनुमति के बीच एक दिव्यता-संयोजन है जहाँ ज्ञान और विवेक से निर्णय बीच आता है।
आज के संदर्भ में प्रयोग
सार निष्कर्ष
यह वचन बताता है कि परमेश्वर के नियंत्रण में राजा का मन रुककर भी गतिशील रहता है—यानी सत्ता की ताकत और दायित्व दोनों परमेश्वर की अनुमति से चलते हैं। एक विश्वासी के लिए यह प्रेरणा है कि अपने फैसलों में प्रभु की राह माँगे, मन को उनकी दिशा में मोड़ दें और विनम्रता से कर्म करें।
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