नीतिवचन 21:18 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

दुष्ट जन धर्मी की छुड़ौती ठहरता है, और विश्वासघाती सीधे लोगों के बदले दण्ड भोगते हैं।

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नीतिवचन 21:18 पद-दर-पद बाइबल टीका

नीतिवचन 21:18 (हिंदी IRV — HINIRV)

पद का तात्पर्य यह है कि दुष्ट व्यक्ति निष्कर्षतः धर्मी की रक्षा नहीं कर पाते; उल्टा, दुष्ट के आकार-आकर्षण के कारण धर्मी को क्षति उठानी पड़ती है और विश्वासघाती—जो सीधे-सादे लोगों पर भरोसा करते हैं—वे दण्ड के कगार पर खड़े हो जाते हैं। इस वचन में परमेश्वर की न्यायशीलता स्पष्ट झलकती है: वह अन्याय को चुकाने के लिए एक ठोस व्यवस्था बनाते हैं और अच्छाई के पथ पर चलने वालों को अंततः सुरक्षा प्रदान करते हैं।

ठेठ सेटिंग और पाठ का संकेत

नीतिवचन के इस अंश में नीति और न्याय का संतुलन दिखता है: दुष्ट लोग कभी भी धर्मी की मदद से जीत नहीं पाते; उनकी योजना अक्सर अंततः विफल रहती है। साथ ही, धोखेबाज़ एवं विश्वासघाती सीधे लोगों के भरोसे को तोड़कर उन्हें नुकसान पहुँचाते हैं, जबकि ईमानदार और धर्मी व्यक्ति परमेश्वर की देखरेख में सुरक्षित रहते हैं।

ईश्वर या विश्वास के बारे में यह वचन क्या बताता है

– परमेश्वर न्यायप्रिय है और वह दुष्ट के हथकंडों को पकड़ते हैं; वह सत्य और विश्वसनीयता की कीमत चुकाते हैं।

– विश्वास और इमानदारी पर टिके रहने वाले लोग अंततः स्थिर और सुरक्षित रहते हैं, भले ही क्षणिक नुकासान क्यों न उठाना पड़े।

महत्वपूर्ण शब्दों और छवियों की स्पष्टता

  • दुष्टजन— जो नैतिकता और सत्य से दूर रहते हैं, अवसर की खातिर अन्य लोगों को चोट पहुँचाते हैं।
  • धर्मी— परमेश्वर के मार्ग पर चलने वाले, जिनके आचरण में सत्य और न्याय है।
  • विश्वासघाती— वह जो भरोसे को तोड़कर गलत खेल खेलते हैं; सीधे लोगों को धोखा देते हैं।
  • दण्ड— परमेश्वर की न्यायपूर्ण व्यवस्था के अनुसार मिलने वाला परिणाम, चाहे वह अभी दिखे या बाद में।

अन्य प्रस्थान (Cross-references) और संक्षिप्त व्याख्या

  • नीत विधि 16:29 — अधर्म की योजनाएं अंततः उलटी पड़ती हैं; छल के रास्ते नुकसान ही देते हैं।
  • भजन 1:1-3 — धर्मी का जीवन पवित्रता और दृढ़ विश्वास पर आधारित रहता है; वह जल-भूमि की तरह फलते-फूलते हैं।
  • नीतिवचन 28:6 — सच्चे मार्ग पर चलना कठिन हो सकता है, पर वह अंततः गरिमा और सुरक्षा देता है।

इन संदर्भों से संकेत मिलता है कि परमेश्वर सत्यनिष्ठा को सर्वोपरि मानते हैं और धोखाधड़ी, दुष्टता के प्रसार को रोकते हैं।

आज के समय में आवेदन

– अपने व्यवहार में ईमानदारी बनाए रखें: दिखावे के लिए नहीं, बल्कि दिल से।

– यदि आप किसी धोखे या विश्वासघात के शिकार होते हैं, तो भय या बदले की प्रतिक्रिया के बजाय परमेश्वर के न्याय पर भरोसा करें; वह समय पर पर्याप्त दंड और इनाम निर्धारित करते हैं।

– भरोसे के रिश्तों में स्पष्ट, सत्यापित सीमाएं रखें ताकि अंजाम में किसी को चोट न पहुँचे।

एक unified reflection

यह वचन इस बात की पुष्टि करता है कि परमेश्वर सत्ता के ऊपर न्याय करता है; दुष्टता के बीच भी ईश्वर धर्मी को सुरक्षा देता है। सच्चे विश्वास, दृढ़ निष्ठा और दूरी—धर्म जो मार्ग दिखाते हैं—आखिरकार सत्य के प्रकाश में विजयी होते हैं।

महत्त्वपूर्ण उद्धरण ( Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke से अगर उपलब्ध) — संभवतः “दुष्टजन धर्मी की छुड़ौती ठहरता है” जैसी प्रतीकात्मक भाषा उनके प्रवचनों में संलग्न है, परन्तु नीचे एकदम उल्लेखनीय संक्षेप प्रस्तुत किया गया है:

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

नीतिवचन 21:18 समानांतर पद और संबंधित वचन

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