Old Testament
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नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
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नीतिवचन 21:17 का सारभाष्य
इस पद का सीधा अर्थ है: अति आचरण-प्रियता और पदार्थ-प्रधान चित्त व्यक्ति को विपत्ति में डालती है; जो अधिक मद्य-आदर और तेल-आडंबर पर निर्भर होता है, वह वास्तविक धन नहीं पाएगा। अर्थ यह है कि इंद्रियों की तीव्र लालसा और भौतिक-प्रार्थनाओं के अनुराग से व्यक्ति धन को नहीं बचाता, बल्कि अन्ततः कमी और अभाव की स्थिति का सामना करना पड़ता है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
नीतिवचन का यह भाग विवेकपूर्ण जीवन-यापन के सिद्धान्तों पर बल देता है: साधन-शीलता, संयम, और ईमानदार व्यवहार। यहाँ “रागरंग से प्रेम” से तात्पर्य उन वस्तुओं और शोभायात्राओं से है जिनमें मन अधिक लगाकर असली आवश्यकताओं से विमुख हो जाता है। दूसरी ओर, नशे और दिखावे में अत्यधिक लगाव मानसिक और आर्थिक स्थिरता के लिए खतरा बनता है।
व्याख्यात्मक बिंदु
संदर्भ-चर्चन (Cross-references)
- नीतिवचन 23:20-21: नशे और मादक पदार्थों से दूर रहने की बुद्धिमानी; अधिक मद्यपान से स्वास्थ्य और दरिद्री की ओर अग्रसरता। संक्षेप अर्थ: विवेकपूर्ण जीवनशैली धन-हानि से बचाती है।
- एतिहासिक अनुभव: जन-जीवन में वे पदार्थ जिन्हें हम “थीम-आइकन” बनाते हैं, वे वास्तविक आशीष नहीं देते; चरित्र-निर्माण और संयम से ही स्थिरता मिलती है।
संक्षिप्त थीम-सूची
गैर-शाखीय संदर्भ-आलोचना
यद्यपि यह वचन व्यक्ति-स्वास्थ्य और समुदाय-निर्भरता पर मार्गदर्शन देता है, परन्तु नीतिवचन सामान्यतः मानवीय प्रवृत्ति पर प्रकाश डालते हैं: जलते आशाओं के पीछे भागना नुकसानदायक है।
व्यावहारिक निष्कर्ष
जीवन में संतोष और सीधी धार्मिकता बनाए रखें: बताये गए व्यवहारों से बचें, परिश्रम करें, और अपने धन को संयत ढंग से प्रबंधित करें। शोभा-आडंबर पर कम और नैतिक-सेवा पर अधिक ध्यान दें।
संदेह-पूर्वक उद्धरण (Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke)
अगर उपलब्ध हो: इस प्रकार के प्रवचनों में इन समर्थ पाशों से मिलते-जुलते विचार मिलते हैं—कुटुम्ब-चाल-चलन, संयम, और दोष-रोधी आचरण। नीचे संक्षिप्त उल्लेखित उद्धरण हैं (पूर्ण पाठ की जगह छोटे अंश):
“He that loves wine and allurements shall impoverish himself.”
“Wealth is not in riches, but in the discreet use of them.”
यथार्थ पाठन-नोट: ऊपर उद्धरण सार्वजनिक-डायरेक्ट पाठ से सामान्यार्थ के अनुरूप संपूर्ण स्वरूप में समाहित किये गए हैं और विश्लेषण में संगत हैं; पूर्ण वचन-उद्धरण यहाँ संक्षेप रूप में दिया गया है।