Old Testament
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नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
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नीतिवचन 21:29 का अर्थ
सीधे शब्दों में कहा जाए तो दुष्ट मनुष्य अपने व्यवहार से कठोर मुख बनाए रहता है, जबकि धर्मी व्यक्ति अपनी चाल और मार्ग को सरल, सच्चा और ईमानदार रखता है। इसका मूल संदेश यह है कि जड़ मनोभावों का बाहरी व्यवहार ही नहीं, बल्कि चाल-चलन में भी अंतर प्रकट होता है: दुष्ट कठोरता से प्रस्तुति देता है, जबकि धर्मी सीधे और सहज तरीके से जीवन जीते हैं।
पार्श्वभूमि और संदर्भ
नीतिवचन समूह कुल मिलाकर नैतिक शिक्षा देता है कि जीवन के निर्णय और व्यवहार परमेश्वर के मार्ग के अनुरूप हों। इस पद में दुष्ट-प्रकृति का बाहरी आवरण बनाम धर्मी जीवन की सहजता सामने रखी गई है। यह बताता है कि आंतरिक चरित्र बाहरी आचरण से भारी होता है और परिस्थितियों के भीतर भी सत्यमार्ग की साधना ज़रूरी है।
व्याख्या के प्रमुख बिंदु
संदर्भगत टिप्पणियाँ
इस विचार के साथ नीचे के संदर्भ भी प्रासंगिक ठहरते हैं:
क्रॉस-रेफ़रेंसेस (सरल सार)
नीतिवचन के समान विचार दूसरे स्थानों में भी मिलता है: पहले, सत्य बोलना और आचार-विचार में निर्भीकता बनाए रखना; दूसरा, अन्यायपूर्ण मार्गों से बचना; तीसरे, विपरीत परिस्थितियों में भी ईश्वरीय मार्ग के अनुरूप चलना। इन संदर्भों में संकल्प और चरित्र की स्थिरता की मांग है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह पाठ हमें सिखाता है कि व्यवहार की सतह एक संकेत है, परन्तु असली धर्म वही है जो हृदय से उभरकर चाल-चलन में दिखे। दुष्ट का मुख कठोर और धर्मी की चाल सरल—दोनों जीवन के मूलभूत चयन हैं, जिनसे अंततः हमारे धर्म-जीवन की दिशा बनती है।
कथा-धारणा से प्रेरित छोटा अनुप्रयोग
जीवन के दैनिक व्यवहार में: - आलोचना करते समय भी विनय बनाए रखें। - कठिन परिस्थितियों में सत्य की तरफ कदम बढ़ाएं। - दूसरों के साथ व्यवहार में सरलता और सत्यनिष्ठा दिखाएं।
संदेश यही कि आचरण के भीतर परिवर्तन ही आदर्श नैतिकता का प्रमाण है, भले ही परिस्थितियाँ कैसी भी हों।
प्रमुख उद्धरण (तत्समय पाठ से): नीचे के टिप्पणीकारों के संकलन में Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के साफ शब्दों के छोटे-छोटे शब्द-चिह्न उपलब्ध हैं यदि उपलब्ध हों, परन्तु इस पाठ में पूर्ण उद्धरण नहीं दिए गए हैं ताकि पाठ का मूल भाव सुरक्षित रहे।