नीतिवचन 21:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

जो कंगाल की दुहाई पर कान न दे, वह आप पुकारेगा और उसकी सुनी न जाएगी।

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नीतिवचन 21:13 पद-दर-पद बाइबल टीका

नीतिवचन 21:13 का संक्षित संदर्भ: दुहाई से अन्वेषण

पद का प्रत्यक्ष क्रम इस प्रकार है: जो कंगाल की दुहाई पर कान न दे, वह आप पुकारेगा और उसकी सुनी न जाएगी। यह वाक्य एक सामाजिक चेतावनी है कि बार बार किन परिस्थितियों में परमेश्वर मानवीय दबी हुई आवेगी cries को अनदेखा नहीं करते। यहाँ कंगाल शब्द से अभिप्राय वह व्यक्ति है जो जीवन के कठिन समय में भी ईमानदारी, क्षमा और सहायता के लिए आमंत्रित है। कई बार समाज उसे तिरस्कृत करता है, परन्तु नीति-चेतना इस बात पर जोर देती है कि भगवान देखता है और दीन-दुखी की पुकार को पहचानता है।

ईश्वर या विश्वास के बारे में पाठ से स्पष्ट क्या निकलता है

यह पद यह दिखाता है कि ईश्वर के दायरे में न केवल बाहरी समृद्धि बल्कि दिल की गहराई और समाज के दयालुता के मानदंड भी मायने रखते हैं। यदि कोई व्यक्ति अपने ही हक के लिए नहीं सुधर पाया, तो उसकी पुकार में भी छल नहीं रह सकता। परमेश्वर दीन-दुखी की संताप सुनता है और बहिष्कृत की असहाय आवाज़ को अनदेखा नहीं करता। यह विश्वास के अनुसार एक निष्कर्ष है कि धर्मसत्ता के साथ नैतिक दायित्व भी जुड़ा है।

महत्वपूर्ण शब्दों/चित्रों की स्पष्टता

  • कंगाल की दुहाई— वह आवाज़ जो गरीबी और आवश्यकता से उत्पन्न होती है; यह चुनौतीपूर्ण समय में ईश्वर से सहायता की पुकार है।
  • कान न देना— सामाजिक दबाव, दबाव, और उदासीनता के विरुद्ध साहसपूर्वक चिल्लाहट को नजरअंदाज करना; यह न सिर्फ एक कान की चपलता बल्कि एक नैतिक चुप्पी है।
  • सुना जाना— ईश्वर की जागरूकता और न्याय का संकेत; दीन-हीन की आवाज़ आखिरकार पहुँचेगी और परिणाम दिखेंगे।

अन्य सम्बन्धित बाइबल पद

उच्चारण के संदर्भ में कुछ पूरक विचारकार्य हैं:

  • नीतिवचन 19:17 — जो दीन की मदद करता है, वह वचन के अनुसार खुद को धन मान देता है; यह दयालुता और ब्रह्माण्डीय न्याय का प्रतिफल है।
  • याकूब 2:15-16 — यदि किसी के पास भोजन हो और उसे सहारा नहीं मिले, तो उसका प्रेम व्यवहार टिकता नहीं; व्यवहारिक सहायता का महत्व।
  • उत्पत्ति 16:13 — दीन की पुकार को भगवान ध्यान से देखता है और उसकी दया उसे ढाल बनाती है।

इन उल्लेखित संदर्भों से यह स्पष्ट है कि भगवान के नज़र में दीन-हीन की सहायता करना नैतिक दायित्व है और यह एक सतत आचरण का भाग है।

आज के लिए व्यावहारिक अनुप्रयोग

  • जो लोग जीवन के कठिन दौर से गुजर रहे हैं, उनके शब्दों और पीड़ा को उपेक्षित न करें। एक छोटी-सी सहायता भी उन्हें नई आशा दे सकती है।
  • व्यक्ति-आधारित न्याय के लिए अपने समाज के संस्थानों और व्यक्तिगत व्यवहार दोनों में चौकसी बरतें—क्योंकि ईश्वर निरीहता नहीं देखता।
  • दीन की सहायता का अभ्यास करें—समर्थन, संसाधन, या व्यक्तिगत समय देकर; यह वास्तविक धर्म का साक्ष्य है।

संक्षेपित सार

नीतिवचन 21:13 कंगाल की पुकार को अनदेखा न करने की सीख देता है; यह दिखाता है कि परमेश्वर दीन-दुखी की आवाज़ सुनता है और न्याय लाने में देर नहीं करता। यह पाठ सामाजिक नैतिकता और ईश्वर-आस्था के बीच संतुलन बनाकर बतलाता है कि सहायता करना एक जीवित विश्वास की मर्म है।

उद्धरण/सूत्र-आस्थापन: ये विचार हिनिर्व अनुवाद के भीतर मूल पाठ के भावों को स्पष्ट करते हैं और मैथ्यू हेनरी, अॅल्बर्ट बार्न्स, और एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डायरे हथियारों के संकल्पनात्मक आयाम से प्रेरित हैं।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

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