Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
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नीतिवचन 21:13 का संक्षित संदर्भ: दुहाई से अन्वेषण
पद का प्रत्यक्ष क्रम इस प्रकार है: जो कंगाल की दुहाई पर कान न दे, वह आप पुकारेगा और उसकी सुनी न जाएगी। यह वाक्य एक सामाजिक चेतावनी है कि बार बार किन परिस्थितियों में परमेश्वर मानवीय दबी हुई आवेगी cries को अनदेखा नहीं करते। यहाँ कंगाल शब्द से अभिप्राय वह व्यक्ति है जो जीवन के कठिन समय में भी ईमानदारी, क्षमा और सहायता के लिए आमंत्रित है। कई बार समाज उसे तिरस्कृत करता है, परन्तु नीति-चेतना इस बात पर जोर देती है कि भगवान देखता है और दीन-दुखी की पुकार को पहचानता है।
ईश्वर या विश्वास के बारे में पाठ से स्पष्ट क्या निकलता है
यह पद यह दिखाता है कि ईश्वर के दायरे में न केवल बाहरी समृद्धि बल्कि दिल की गहराई और समाज के दयालुता के मानदंड भी मायने रखते हैं। यदि कोई व्यक्ति अपने ही हक के लिए नहीं सुधर पाया, तो उसकी पुकार में भी छल नहीं रह सकता। परमेश्वर दीन-दुखी की संताप सुनता है और बहिष्कृत की असहाय आवाज़ को अनदेखा नहीं करता। यह विश्वास के अनुसार एक निष्कर्ष है कि धर्मसत्ता के साथ नैतिक दायित्व भी जुड़ा है।
महत्वपूर्ण शब्दों/चित्रों की स्पष्टता
अन्य सम्बन्धित बाइबल पद
उच्चारण के संदर्भ में कुछ पूरक विचारकार्य हैं:
इन उल्लेखित संदर्भों से यह स्पष्ट है कि भगवान के नज़र में दीन-हीन की सहायता करना नैतिक दायित्व है और यह एक सतत आचरण का भाग है।
आज के लिए व्यावहारिक अनुप्रयोग
संक्षेपित सार
नीतिवचन 21:13 कंगाल की पुकार को अनदेखा न करने की सीख देता है; यह दिखाता है कि परमेश्वर दीन-दुखी की आवाज़ सुनता है और न्याय लाने में देर नहीं करता। यह पाठ सामाजिक नैतिकता और ईश्वर-आस्था के बीच संतुलन बनाकर बतलाता है कि सहायता करना एक जीवित विश्वास की मर्म है।
उद्धरण/सूत्र-आस्थापन: ये विचार हिनिर्व अनुवाद के भीतर मूल पाठ के भावों को स्पष्ट करते हैं और मैथ्यू हेनरी, अॅल्बर्ट बार्न्स, और एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डायरे हथियारों के संकल्पनात्मक आयाम से प्रेरित हैं।