Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकीChapter
नीतिवचन 1 नीतिवचन 2 नीतिवचन 3 नीतिवचन 4 नीतिवचन 5 नीतिवचन 6 नीतिवचन 7 नीतिवचन 8 नीतिवचन 9 नीतिवचन 10 नीतिवचन 11 नीतिवचन 12 नीतिवचन 13 नीतिवचन 14 नीतिवचन 15 नीतिवचन 16 नीतिवचन 17 नीतिवचन 18 नीतिवचन 19 नीतिवचन 20 नीतिवचन 21 नीतिवचन 22 नीतिवचन 23 नीतिवचन 24 नीतिवचन 25 नीतिवचन 26 नीतिवचन 27 नीतिवचन 28 नीतिवचन 29 नीतिवचन 30 नीतिवचन 31Verse
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नीतिवचन 21:23 — एक मुख से प्रेरित सुरक्षा
नीतिवचन 21:23 कहता है: “जो अपने मुँह को वश में रखता है वह अपने प्राण को विपत्तियों से बचाता है।” यह पाठ किसी व्यक्ति के बोल पर नियंत्रण के महत्व को केंद्र में रखता है। विद्वानों की बौद्धिक परंपरा में इसका अर्थ है शब्दों के चयन, समय-चित्त, और परिस्थितियों के अनुसार भाषण को रोकना या बनाए रखना। जो आदमी अपनी चुप्पी और नियंत्रित बोलचाल से सचेत रहता है, विपत्तियों से अपने आत्म-संरक्षण को सक्षम बनाता है।
ईश्वर और आस्था के बारे में पाठ का संकेत
यह पंक्ति यह दर्शाती है कि ईश्वर के सामने विनम्र, विचारशील आचरण और आत्म-नियंत्रण व्यक्ति की सुरक्षा का मार्ग बनते हैं। सतर्क बोलना एक आस्थावान जीवन का हिस्सा है; ईश्वर के आशीर्वाद को पाने के लिए हमारे शब्दों का चयन न सिर्फ दूसरों के साथ हमारे संबंधों को सुधारता है, बल्कि हमारे अपने प्राण-रक्षण में भी सहायक होता है।
महत्वपूर्ण शब्दार्थ और चित्र
सम्बन्धित बाइबल पद
इस विचार को यह कीड़ा बनाती है कि शब्दों का नियंत्रण आंतरिक स्थितियों से जुड़ा है। नीचे के चार संदर्भ संगी हे तरीक़े से जुड़ते हैं:
• याकूब 1:19 का अनुस्मारक कि हर किसी को जल्दी सुनना और देर से बोलना और क्रोध में न आना चाहिए; यह बताता है कि सोच-समझकर बोलना आंतरिक विश्वास को दर्शाता है।
• सभोपदेशक 5:3—षड्यंत्र या अनावश्यक बोलना के जोखिम की चेतावनी देता है; अनुचित वक्तव्य से नुकसान हो सकता है।
• रोम 12:17-19—दूसरों के ख़िलाफ़ प्रतिशोध न लेकर शांति की राहChoose करने की प्रेरणा देता है; यह दृश्य दिखाता है कि विवेकपूर्ण शब्द हमें प्रायः शांति के मार्ग पर रखते हैं।
आज की उपयोगिता — आज के जीवन में कैसे लागू करें
आप कैसे बोलते हैं, यह आपके आंतरिक विश्वास का प्रतिरूप है। इस मार्ग को अपनाने के लिए सरल अभ्यास:
Summary और synthesis
नीतिवचन 21:23 एक सरल, पर गहन शिक्षा देता है: आत्म-नियंत्रण से न सिर्फ व्यक्तिगत शांति बनी रहती है, बल्कि विपत्तियों से भी रक्षा मिलती है। यह विश्वास का एक अभ्यास है— ईश्वर के पास अपने शब्दों की जवाबदेही स्वीकारना और प्रेमपूर्ण, पर स्पष्ट संवाद बनाए रखना।
उद्धृतियों के लिए: नीचे दी गई विशेष पंक्तियाँ पारंपरिक टिप्पणीकारों की संकलित विवेचनाओं से प्रेरित हैं; जिन्हें संक्षेप में उद्धृत किया गया है।
Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के संदर्भ-उद्धरणों की संपूर्ण वाक्यांशक सत्यापित उद्धरण यहाँ संक्षेपित हैं, यदि उपलब्ध हों।