Old Testament
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यशायाह 53:4 पर एक संक्षिप्त व्याख्या
पिछले अध्यायों में यह राजपत्र स्पष्ट करता है कि मसीह इस दुखी-नुकसान की भूमिका में आएंगे—न कि एक शक्तिशाली विजयी राजा पहले से ही. 53:4 में भविष्यवाणी यह बताती है कि दुख-संयमित सेवक के रूप में वह हमारे लिए बीमारी-रोग और दुख उठाते हैं; परन्तु लोग इसे सामान्य दुःख-स्वाभाविक अनुभव मानकर उसे परमेश्वर का दंड या दुर्दशा समझते हैं। यह अनुभूति विश्वास की कसौटी बनती है: भले ही वह दोष-शमन के लिए आया हो, मानव दृष्टि में उसे दंडित प्रतीत होता है।
मुख्य अर्थ
यह पद यीशु मसीह के लिए पूर्वाभाषित उपस्थिति का वर्णन है: वह हमारी बीमारियाँ उठाता है, हमारे दुखों को सहता है। यह आपकी-मेरी रोग-व्यथा से मुक्त करने की एक गहराई है, न कि केवल शारीरिक ailment का उल्लेख। उद्धार मिलना तब होता है जब लोग स्वीकार करते हैं कि दुख के कारण वह हूँ जो हमारे स्थान पर दण्डित हुआ।
दो-तीन प्रमुख थीम
क्रॉस-रेफरेंसे/संदर्भ
व्यावहारिक विचार
क्या आप दर्द, बीमारी, या अस्वास्थ्य के बीच हैं? इस पद का अर्थ है कि प्रभु ने उन तक पहुँचने का अपना रास्ता बना लिया है— वह आपके प्रत्येक आँसू और पीड़ा को समझते हैं। विश्वास करें कि उसके परिणामस्वरूप हमारी ग़लतियाँ, और दु:ख-स्थिति, एक उद्धारपूर्ण उद्देश्य के लिए सम्मिलित हैं। पुनः ध्यान दें कि यह केवल शारीरिक चिकित्सा नहीं है, बल्कि आत्म-विश्वास, शान्ति, और भीतरी स्वास्थ्य का मार्ग है।
संक्षिप्त समापन
53:4 में मसीह के बारे में दो बातें उभरती हैं: वह हमारे रोगों को उठाता है और हमारे दुःखों को सहन करता है; फिर भी मानव दृष्टि उसे दंडित समझती है। यह संतोषकारी संदेश है कि उद्धार एक ऐसी प्रेमयात्रा है जिसमें पीड़ा भी ईश्वर की ममता को प्रकट करती है, ताकि हम परमेश्वर के साथ पूर्ण जीवन पाएँ।