यशायाह 53:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका

वह सताया गया, तो भी वह सहता रहा और अपना मुँह न खोला; जिस प्रकार भेड़ वध होने के समय और भेड़ी ऊन कतरने के समय चुपचाप शान्त रहती है, वैसे ही उसने भी अपना मुँह न खोला। (यूह. 1:29, मत्ती 27:12,14, मर. 15:4,5, 1 कुरि. 5:7, पत. 2:23, प्रका. 5:6,12)

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यशायाह 53:7 पद-दर-पद बाइबल टीका

यशायाह 53:7 पर विचार: चुपचाप सहन करने की शक्ति

यह पद हमारे उद्धारकर्ता के गहन धैर्य और पूर्ण समर्पण को सामने लाता है। जब उसे सताया गया और बहुधा मुँह न खोला, तब प्रभु यीशु का शब्द-संयम और कर्तव्यनिष्ठता पवित्र पाखा बन जाती है। भेड़ की तरह चुपचाप शान्त रहने की यह प्रतिमा ऐसी है जो अन्यत्र बल ढूंढ़ने की बजाय दया, क्षमा और कानून के अनुरूप चलते रहने का उदाहरण देती है।

मूल संदर्भ और संदेश

यह आयत पूर्वनियोजित मिसला के रूप में ईश्वर के चरित्र और मसीह की सेवक-जीवन का वर्णन करती है। धार्मिक नेताओं के अत्याचार के बीच, मसीह ने विवशता के बावजूद अपने आप को बचाने की कोशिश नहीं की, बल्कि दावों और अत्याचारों के सामने चुप रहा। यह नीति “हूकूमत नहीं, क्रिया-धर्म” की प्रतिध्वनि है: सफल होने के लिए बल के प्रयोग की नहीं, परिश्रम और आत्म-त्याग की दिशा में आगे बढ़ना।

प्रमुख संदेश और सिद्धांत

  • आज्ञापालन और नम्रता: वह अपनी मति के अनुसार नहीं, पर परमेश्वर के प्रस्ताव के अनुरूप चल पड़ा।
  • कष्ट में भी ईमानदारी: अत्याचार के बीच भी उसने अपने मुँह से उच्छिष्ट नहीं निकाला, बल्कि पुण्य का मार्ग अपनाया।
  • किरदार-उद्धार का प्रतीक: यह क्रूस-यात्रा के परिप्रेक्ष्य में, पाप के विरुद्ध विजय की योजना को संकेतित करती है।

अनुसंगत बाइबल विषय

इस आयत में संतोष और सामर्थ्य एक साथ चलते हैं: प्रभु का धैर्य, करुणा, और अपराध-बोधों के बीच क्षमा-याचना का संतुलन। यह मसीह की कर्म-शक्ति का मूल-पथ है—कठोर गुलामी नहीं, मुक्त करने वाला परीक्षण।

सूत्र-वाक्यों से सहारा (Cross-references)

1) मत्ती 27:12-14 — मसीह के आरोप-प्रश्नों के बीच उसका मौन स्वीकृति-प्रकाश है; यह आयत उसी प्रकृति को पुष्ट करती है कि वह से शासन-शक्ति के बजाय दया और उत्तरदायित्व के साथ गया।

2) 1 पतरस 2:23 — उसने प्रताड़ना मिलने पर भी आत्म-नियंत्रण बनाए रखा और उत्तर नहीं दिया; यह उसकी नैतिक आचरण को स्पष्ट करता है।

3) मरकुस 15:5 — जब उनसे बात की गई किन्तु उन्होंने मौन रखा, तो यह बताता है कि उद्धार की योजना समय-समय पर पूर्ण होती है, न कि मानव-कल्पना के अनुसार।

संक्षिप्त व्याख्या

यही आयत बताती है कि मसीह ने क्यों और कैसे दुःख उठाया—क्योंकि पिता के उद्देश्य के साथ उनका प्रेम और उनकी निष्ठा उच्चतम मानवीय स्वतंत्रता से ऊपर है। यह चुपचाप सहन करना उन परिस्थितियों में भी है जहाँ जवाबी आक्रमण संभव था; परन्तु यहाँ एक पवित्र मिशन पूरा हो रहा है—पाप के बन्धनों को खोलना और विश्वासियों के लिए उद्धार का मार्ग बनाना।

व्यावहारिक ध्यान

हम भी अपने-अपने Trials में इस प्रतिमा से प्रेरणा ले सकते हैं: जब आलोचना और पीड़ा आती है, तो अपने शब्दों को नियंत्रण में रखें, आँसू के बीच भी प्रेम और सत्य को पकड़ें, और परमेश्वर के लक्ष्य के लिए धीरज धारण करें।

संक्षिप्त टोली-ऊर्जा

यह आयत दो प्रवृत्तियों के बीच एक संतुलन दिखाती है: कर्तव्य का पालन और दया की शक्ति। जैसा कि यीशु ने शांति के साथ उत्तर दिया, वैसे ही हम भी संवेदना और सत्य को मिश्रित करके आगे बढ़ें।

यूनानी-शब्दावली और भाषिक संकेत पर गहराई से विचार करते हुए यह पाठ बताता है कि उद्धारकर्ता ने अपना साहस और धैर्य कैसे बनाए रखा—आज्ञा के अनुसार चलना, न कि प्रतिशोध के लिए बोलना।

कथन-सम्पर्क: यह आयत यीशु के जुनून-यात्रा के एक दृश्य को पुष्ट करती है और विश्वासियों को विश्वसनीयता, धैर्य, और नम्रता की शिक्षा देती है।

आख़िर में, स्वयं के जीवन में भी यह चुपचाप सहन, निराशा के बीच भी आशा और न्याय के पक्ष में खड़े रहने की प्रेरणा दे।

उद्धृत संकेत: Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से सीधे उद्धरण इस प्रस्तुति में आवश्यकता अनुसार संक्षेप में समाहित किए गए हैं, ताकि पाठक संदर्भ समझ सके।

*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।

यशायाह 53:7 समानांतर पद और संबंधित वचन

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परन्तु यीशु चुप रहा। तब महायाजक ने उससे कहा “मैं तुझे जीविते परमेश्‍वर की शपथ देता हूँ*, कि यदि तू परमेश्‍वर का पुत्र मसीह है, तो हम से कह दे।”

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पवित्रशास्त्र का जो अध्याय वह पढ़ रहा था, वह यह था : “वह भेड़ के समान वध होने को पहुँचाया गया, और जैसा मेम्‍ना अपने ऊन कतरनेवालों के सामने चुपचाप रहता है, वैसे ही उसने भी अपना मुँह न खोला,

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1 पतरस 2:23 (HINIRV) »
वह गाली सुनकर गाली नहीं देता था, और दुःख उठाकर किसी को भी धमकी नहीं देता था, पर अपने आपको सच्चे न्यायी के हाथ में सौंपता था। (यशा. 53:7, 1 पत. 4:19)

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