Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी1 पतरस 2:23 बाइबल पद की व्याख्या
1 पतरस 2:23 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
वह गाली सुनकर गाली नहीं देता था, और दुःख उठाकर किसी को भी धमकी नहीं देता था, पर अपने आपको सच्चे न्यायी के हाथ में सौंपता था। (यशा. 53:7, 1 पत. 4:19)
1 पतरस 2:23 पद-दर-पद बाइबल टीका
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1 पतरस 2:23 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यशायाह 53:7 (HINIRV) »
वह सताया गया, तो भी वह सहता रहा और अपना मुँह न खोला; जिस प्रकार भेड़ वध होने के समय और भेड़ी ऊन कतरने के समय चुपचाप शान्त रहती है, वैसे ही उसने भी अपना मुँह न खोला। (यूह. 1:29, मत्ती 27:12,14, मर. 15:4,5, 1 कुरि. 5:7, पत. 2:23, प्रका. 5:6,12)

इब्रानियों 12:3 (HINIRV) »
इसलिए उस पर ध्यान करो, जिस ने अपने विरोध में पापियों का इतना वाद-विवाद सह लिया कि तुम निराश होकर साहस न छोड़ दो।

1 पतरस 4:19 (HINIRV) »
इसलिए जो परमेश्वर की इच्छा के अनुसार दुःख उठाते हैं, वे भलाई करते हुए, अपने-अपने प्राण को विश्वासयोग्य सृजनहार के हाथ में सौंप दें।
1 पतरस 2:23 पर हिंदी टिप्पणी (HINIRV)
पंक्ति का संदर्भ दिखाता है कि मसीही जीवन में अन्याय और प्रतिशोध के अवसर पर कैसे व्यवहार करना चाहिए। इस पद में यीशु के उस आचरण को उधृत किया गया है जब उन्होंने गाली सुनकर भी गाली नहीं दी, दुःख उठाने पर प्रतिशोध से दूर रहे, और अपने आपको सत्य न्यायी के हाथों में सौंप दिया। यह मार्ग्ञचर जीवन का एक ठोस नमूना है कि कठिन परिस्थितियों में भी प्रेम और विश्वास के साथ प्रभु पर निर्भर रहने की प्रेरणा मिलती है।
पद का पाठ और अधिक स्पष्ट समझ
“वह गाली सुनकर गाली नहीं देता था, और दुःख उठाकर किसी को भी धमकी नहीं देता था, पर अपने आपको सच्चे न्यायी के हाथ में सौंपता था।”
यहाँ तीन प्रमुख बिंदु उभरते हैं: (1) अन्यायपूर्ण गालियों पर भी प्रतिक्रिया नहीं; (2) दुःख के समय भी प्रतिशोध नहीं; (3) अपने क्रोध-आचरण को परमेश्वर के न्याय के हाथों में समर्पण। इन सबमें प्रेरक तथ्य यह है कि प्रभु ने अपनी प्रतिष्ठा नहीं खोली, अपमान के बावजूद भी नियंत्रण बनाए रखा, ताकि परमेश्वर की योजना पूर्ण हो सके।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
अनुसरणीय क्रॉस-रेफरेंस (संक्षेप उल्लेख)
1) यशया 53:7 — मसीह की नम्रता और बलिदान का चित्र। उद्धरण देता है कि पीड़ा सहने पर भी वह हिंसक नहीं बना। यह संदर्श हमारी अनुकरणीय धारणाओं को पुष्ट करता है।
2) 1 पतरस 4:19 — संकटों में विश्वासयोग्य को परमेश्वर के हाथों में सौंपना है। आत्मविश्वास और धैर्य की कुंजी के रूप में यह पंक्तियाँ सहायक हैं।
3) रोम 12:17-19 — किसी के बदले में बदले की राह न चुनना; अपने आप को परमेश्वर के वचन के अनुसार संचालित करना।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
- अशांत परिस्थितियों में भी बोलने की भाषा नियंत्रित रखें; गालियाँ और धमकी से बचें।
- अन्याय के बावजूद आत्म-समर्पण और परमेश्वर के न्याय पर भरोसा बनाए रखें।
- विवादों में विरोधी के साथ दया और सत्य के साथ व्यवहार करें; अपनी रक्षा परमेश्वर के हाथों में छोड़ दें।
चर्चित निष्कर्ष
यह पद सिखाता है कि मसीही जीवन में कठोर परिस्थितियाँ कभी-कभी आना स्वाभाविक है, पर ईश्वर पर पूर्ण भरोसा और धैर्य के साथ चलना हमारा कर्तव्य है। इस मार्ग से हम असहमतियों के बीच भी प्रेम, संयम और न्याय का पक्ष लेते हैं, ताकि ईश्वर की महिमा उजागर हो।
संक्षिप्त सार
दूसरों के अपमान पर भी प्रतिक्रिया से बचना, दुःख में प्रतिशोध के बजाय परमेश्वर के न्याय के हाथों स्वयं को सौंपना—यही मिसाल है ताकि हम मसीह के अनुयायी की पहचान बना सकें।
टिप्पणी और उद्धरणवाला नोट
यह टिप्पणी Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke जैसे सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के स्मरणीय भावों को एक साथ समेकित करती है; आवश्यक स्पष्ट उद्धरण नीचे नहीं दिये गये हैं, ताकि मूल विचार स्थिर रहे।