Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी1 पतरस 2:11 बाइबल पद की व्याख्या
1 पतरस 2:11 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
हे प्रियों मैं तुम से विनती करता हूँ कि तुम अपने आपको परदेशी और यात्री जानकर उन सांसारिक अभिलाषाओं से जो आत्मा से युद्ध करती हैं, बचे रहो। (गला. 5:24, 1 पत. 4:2)
1 पतरस 2:11 पद-दर-पद बाइबल टीका
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1 पतरस 2:11 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 यूहन्ना 2:15 (HINIRV) »
तुम न तो संसार से और न संसार की वस्तुओं से प्रेम रखो यदि कोई संसार से प्रेम रखता है, तो उसमें पिता का प्रेम नहीं है।

गलातियों 5:24 (HINIRV) »
और जो मसीह यीशु के हैं, उन्होंने शरीर को उसकी लालसाओं और अभिलाषाओं समेत क्रूस पर चढ़ा दिया है।

1 पतरस 4:2 (HINIRV) »
ताकि भविष्य में अपना शेष शारीरिक जीवन मनुष्यों की अभिलाषाओं के अनुसार नहीं वरन् परमेश्वर की इच्छा के अनुसार व्यतीत करो।
1 पतरस 2:11 पर टिप्पणी — परमेश्वर की इच्छा के अनुसार पथिक जीवन
इस पद का प्रत्यक्ष अर्थ है: विश्व में रहते हुए भी ईश्वर के प्रति वफादार रहने के लिए अपने आप को परदेशी और यात्री समझना, और उन सांसारिक अभिलाषाओं से दूर रहना जो आत्मा से युद्ध करती हैं। यह विनती एक नैतिक सुरक्षा-आदेश है: आंतरिक स्वभावों की लालसा और बाह्य प्रभावों के बीच संतुलन बना कर रहना ताकि मसीह के अनुयायी का जीवन तेजस्वी और पवित्र बना रहे।
प्रसंगिक पृष्ठभूमि
यह पतरस-लेखन पहली सदी की चर्च का प्रेरित मनोभाव है जब ख्रिस्त-विरुद्ध अजीब-अजीब असुरक्षाएँ और पापी प्रवृत्तियाँ बढ़ रही थीं। लेखन का उद्देश्य विश्व से अलग, गुरु-चिन्तन में बैठे ईमानदार विश्वासियों को ठहराव और धैर्य देना है। परदेशी होने का अर्थ केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि सांसारिक मूल्य-चिह्नों से निर्लेप रहना है: प्रभु की आज्ञाओं के अनुरूप जीवन जीना।
व्याख्यात्मक अवलोकन
शीघ्र विषय-वाचन (Theme at a glance)
सम्बद्ध आयतें (Cross-references) और संक्षिप्त स्पष्टीकरण
चर्चित विद्वानों के संक्षेप योगदान
हार्नि Commentary से समाहित विचार: संसार से दूरी बनाए रखना, ताकि आत्मा की आवाज़ स्पष्ट रहे; मसीह-जीवन का आचरण तब संभव होता है जब हम हर दिन प्रभु की योजना में अपना भागीदारी मानते हैं।
बुक-टिप्पणीकारों से समाहित समझ: स्वयं को “यात्री” मानना एक आत्मिक सुरक्षा है—जिन्हें सांसारिक लाभ-लालसाएँ नहीं भातीं, वे प्रभु के साथ रहते हैं।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
यही संदेश बताता है कि प्रभु के लिए जीना उसी समय संभव होता है जब हम संसार की दासी-चालों से विराम लेकर आत्मा के अनुसार चलें।