Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी1 पतरस 2:7 बाइबल पद की व्याख्या
1 पतरस 2:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
अतः तुम्हारे लिये जो विश्वास करते हो, वह तो बहुमूल्य है, पर जो विश्वास नहीं करते उनके लिये, “जिस पत्थर को राजमिस्त्रियों ने निकम्मा ठहराया था, वही कोने का सिरा हो गया,” (भज. 118:22, दानि. 2:34-35)
1 पतरस 2:7 पद-दर-पद बाइबल टीका
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1 पतरस 2:7 समानांतर पद और संबंधित वचन
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भजन संहिता 118:22 (HINIRV) »
राजमिस्त्रियों ने जिस पत्थर को निकम्मा ठहराया था वही कोने का सिरा हो गया है। (1 पत. 2:4, लूका 20:17)

मरकुस 12:10 (HINIRV) »
क्या तुम ने पवित्रशास्त्र में यह वचन नहीं पढ़ा: ‘जिस पत्थर को राजमिस्त्रियों ने निकम्मा ठहराया था, वही कोने का सिरा* हो गया;

प्रेरितों के काम 4:11 (HINIRV) »
यह वही पत्थर है जिसे तुम राजमिस्त्रियों ने तुच्छ जाना* और वह कोने के सिरे का पत्थर हो गया। (भज. 118:22-23, दानि. 2:34, 35)
1 पतरस 2:7 पर नज़दीकी नज़रिया: विश्वास कैसे पत्थर बनता है
यह वचन πισित करता है: जो विश्वास करते हैं उनके लिए ईश्वर का कारण बहुमूल्य है, पर जो विश्वास नहीं करते, उनके लिए वही पत्थर क्रिया करता है जिसे शिल्पकारों ने निकम्मा समझा। ऐसा पवित्र विरोधाभास एक ही शब्द में गूंजता है: ईश्वर की कृपा और मानव पूर्वाग्रह एक साथ चलती हैं। इस पाठ का संदर्भ 1 पतरस की पात्रता-प्रेरणा को उजागर करता है कि ईमानदार विश्वास में लोग श्रद्धा और सम्मान पाते हैं, जबकि अविश्वास से सामने आने वाला काटन-प्रतीक भी उजागर होता है।
पाठ का विषय और अध्याय के भीतर भूमिका
यह पद 2:4-8 के क्रम में है जहाँ पतरस विश्वासियों को जीवन-यज्ञ की बुनियाद बतलाते हैं: प्रभु पर आस्था, आत्म-समर्पण, और बीज-मन्त्र की तरह शब्दों का ढंग। “पत्थर” का चित्रण जो राजमिस्त्रियों द्वारा “निकम्मा” समझा गया, वही कोने का सिरा बन गया—यानी ईश्वर की योजना में असंतोष पूर्वक दिखने वाला भी परम प्रयोजन की चाबी बन जाता है।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
अन्य बाइबिल अंशों से तुलनात्मक दृष्टि
यह विचार पुरानी प्रतिज्ञा के “ईश्वर की मीरा-सीधी चाबी” से मेल खाता है—भज 118:22 में पत्थर की महिमा, जो राजमिस्त्री उसे बेकार समझते हैं, पर परमेश्वर ने उसे कोने का सिरा बना दिया। दानिए 2:34-35 में ऐसा ही दृश्य दिखता है कि मानवीय सत्ता कितनी भी शक्तिशाली क्यों न हो, पर परमेश्वर की आदर्श योजना में उसका स्थान रहता है। साथ ही, प्रेरितों के काम में यीशु मसीह को पथ-निर्देशक पत्थर कहा गया है, जो विश्वास के द्वारा एक नई राह देता है।
विशिष्ट उद्धरण और संक्षिप्त संदर्भ
प्रमुख तीनात्मिक चिंतनधाराएं: यह पाठ “विश्वास बनाम अविश्वास” के सद्भाव को प्रस्तुत करता है, और यह स्पष्ट करता है कि ईश्वर की दृष्टि में कुछ पत्थर निकम्मे नहीं होते—वे उद्धार के मार्ग के केंद्र बन जाते हैं।
आवश्यक उद्धरण (संकेत):
Matthew Henry से: “The stone which the builders refused is become the head of the corner.”
Albert Barnes से: “To those who believe, the stone is precious; to those who stumble, it is a rock of offence.”
Adam Clarke से: “This stone, though rejected by men, is the foundation on which the Church rests.”
इन उद्धरणों के पूर्ण पाठ नहीं दिये गए, केवल संदर्भ संकेततः उल्लेखित हैं।
आध्यात्मिक सन्देश का परिचालन
जीवन में हमें यह समझना चाहिए कि विश्वास ईश्वर से जुड़ने का मार्ग है; अविश्वास वह बाधा है जो मानवीय दृष्टि को प्रतिबंधित कर देता है। वास्तविकता यह है कि परमेश्वर ने मसीह को जीवन की दिशा माना है; वह उन लोगों के लिए भी एक मजबूत आधार है जो उसकी कृपा पर चलते हैं।
छोटा-सा क्रियान्वয়ন पथ
संक्षेप सार
1 पतरस 2:7 हमें बताता है कि किस प्रकार विश्वास ईश्वर की योजना के साथ जुड़कर एक मार्ग बनाता है—जो विश्वास करते हैं उनके लिए यह पत्थर बहुमूल्य है, जबकि अविश्वास उसे एक चुनौती के रूप में प्रस्तुत करता है। यह पाठ हमें याद दिलाते हुए आगे बढ़ाता है कि ईश्वर की उपलब्धि कभी भी मानव योजना से बड़े सिद्धांतों को बदल नहीं सकती; बल्कि जो लोग उस पत्थर को स्वीकारते हैं, वे एक नया जीवन पा लेते हैं।