Old Testament
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1 पतरस 2:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्योंकि परमेश्वर की इच्छा यह है, कि तुम भले काम करने से निर्बुद्धि लोगों की अज्ञानता की बातों को बन्द कर दो।
1 पतरस 2:15 पद-दर-पद बाइबल टीका
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1 पतरस 2:15 समानांतर पद और संबंधित वचन
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तीतुस 2:8 (HINIRV) »
और ऐसी खराई पाई जाए, कि कोई उसे बुरा न कह सके; जिससे विरोधी हम पर कोई दोष लगाने का अवसर न पा कर लज्जित हों।

1 पतरस 3:17 (HINIRV) »
क्योंकि यदि परमेश्वर की यही इच्छा हो कि तुम भलाई करने के कारण दुःख उठाओ, तो यह बुराई करने के कारण दुःख उठाने से उत्तम है।

1 थिस्सलुनीकियों 5:18 (HINIRV) »
हर बात में धन्यवाद करो: क्योंकि तुम्हारे लिये मसीह यीशु में परमेश्वर की यहीं इच्छा है।
अर्थ का सीधा निष्कर्ष
इस पवित्र वचन में कहा गया है कि परमेश्वर की इच्छा यह है कि आप नेक काम करके निर्बुद्धि लोगों की अज्ञानता की बातें बंद कर दें। यह मात्र बाह्य आचरण नहीं है, बल्कि चरित्र की स्थिरता और परिस्थितियों में प्रेरित क्रिया है जो लोग सच को नहीं जानते, उन्हें भी संयम और नम्रता से समझाने का अवसर दे।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
1 पतरस की पंक्तियाँ पुराने और नवीन समझ के बीच संतुलन बनाती हैं। प्रेरित पतरस समुदाय को यह निर्देश देते हैं कि शत्रुतापूर्ण सामाजिक स्थितियों में भी शुभ आचरण बनाए रखें ताकि वे अपने विश्वास की वजह से सम्मान और विश्वासयोग्यता अर्जित करें। यह वाक्य विशेषकर दासता-स्वतंत्रता, सामाजिक विभेद और राज्य-आदेशों के अनुरूप व्यवहार के विषय में है; एक विश्वसनीय व्यक्ति होने से निर्बुद्धि लोगों की आलोचनाओं का दायरा छोटा होता है।
व्याख्यात्मक निरीक्षण
तीव्र thematic नोट्स
अन्य शास्त्रीय टिप्पणियाँ (संक्षेप में)
Matthew Henry और Adam Clarke के पारंपरिक विवेचनाओं में यह संकेत मिलता है कि नेक व्यवहार के कारण लोग ईश्वर के बारे में गंभीर विचार करने लगते हैं और चर्च-प्रतिबद्धता की रक्षा होती है। Barnes भी इसे सामाजिक-आचरण की दिशा में एक तर्कसंगत मार्ग मानते हैं ताकि निर्बुद्धि आरोपों का सामना किया जा सके।
उद्धृत सार प्रयोगजनक विचार
“जो व्यवहार सत्य है, वह अज्ञानता की शिकायतों को दबा देता है।” (पंक्ति-सरलता के उदाहरण के रूप में संदर्भित पारंपरिक टिप्पणीकारों के विचारों का संक्षेप)
क्रॉस-वॉच संदर्भ
• राज-आदेशों के अनुसार सम्मानपूर्वक व्यवहार के निर्देश: अन्य संदर्भों में भी यह दिखाया गया है कि परमेश्वर के भक्तों को जगत के सामने एक उन्नत नमूना बनना चाहिए—यह न केवल कथा है बल्कि आत्मा-परक आचरण का प्रमाण है।
• प्रेम और सत्य की विवेकपूर्ण प्रस्तुति: विश्वासियों को निर्बुद्धि आलोचनाओं के बीच भी प्रेम और विनय से उत्तर देना चाहिए, ताकि संदेश प्रभावी रहे।
संक्षिप्त निष्कर्ष
कुल मिलाकर यह वचन हमें बताता है कि भले कामों के द्वारा हमारी जीवनी परमेश्वर की महिमा को स्पष्ट करती है और अज्ञानता के कारण पैदा होने वाले भ्रमों को कम करती है। लाइव मिसाल बनिए—उपर्युक्त समझ और व्यवहार के साथ—ताकि लोग हमारे जीवन के भीतर ईश्वर के काम को देख सकें और सच की ओर आकर्षित हों।