Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी1 पतरस 3:17 बाइबल पद की व्याख्या
1 पतरस 3:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्योंकि यदि परमेश्वर की यही इच्छा हो कि तुम भलाई करने के कारण दुःख उठाओ, तो यह बुराई करने के कारण दुःख उठाने से उत्तम है।
1 पतरस 3:17 पद-दर-पद बाइबल टीका
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1 पतरस 3:17 समानांतर पद और संबंधित वचन
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मत्ती 26:39 (HINIRV) »
फिर वह थोड़ा और आगे बढ़कर मुँह के बल गिरकर, और यह प्रार्थना करने लगा, “हे मेरे पिता, यदि हो सके, तो यह कटोरा* मुझसे टल जाए, फिर भी जैसा मैं चाहता हूँ वैसा नहीं, परन्तु जैसा तू चाहता है वैसा ही हो।”

1 पतरस 3:14 (HINIRV) »
यदि तुम धार्मिकता के कारण दुःख भी उठाओ, तो धन्य हो; पर उनके डराने से मत डरो, और न घबराओ,

1 पतरस 3:17 — क्यों यह verse महत्त्वपूर्ण है
यह वक्तव्य बताता है कि भलाई करने के कारण मिलने वाला दुःख, किसी अन्य तरह के दुःख से भिन्न होता है। जब हमारा अनुभव पीड़ा से भरा हो, तो परमेश्वर की इच्छा के अनुसार सही आचरण बनाए रखना, हमारे आत्म-समर्पण और विश्वास की परीक्षा होती है। यह संदेश आश्वस्त करता है कि पीड़ा—यदि वह ईमानदारी, प्रेम और धार्मिकता के कारण हो—स्वर्गीय मान्यता की ओर ले जाती है, जबकि बेईमानी से जुड़ा दुःख क्षणिक हो सकता है।
परिप्रेक्ष्य और मूल संदर्भ
पतरस के लेखन में यह वाक्य उन परिस्थितियों से जुड़ा है जिनमें ईसाई समुदाय को भीषण प्रतिशोध, बहिष्कार या दमन का सामना करना पड़ता है। पतरस उन्हें याद दिलाते हैं कि परमेश्वर की इच्छा के अनुसार भलाई करना और सतर्कता से अस्तित्व में प्रेम दर्शाना, वास्तविक जीवन-उद्धार के मार्ग हैं—भले ही समाज उन्हीं बातों पर संघर्ष करे। यह केवल व्यक्तिगत धैर्य नहीं, बल्कि समाज के भीतर अन्याय के विरुद्ध मजबूत नैतिक संकल्प है।
मुख्य संदेश
आध्यात्मिक थीम्स और समर्थन विचार
यह पद तीन प्रमुख बिंदुओं से जुड़ता है: पवित्र आचरण बनाये रखना, दमन के समय भी प्रेम और नम्रता बनाए रखना, और परमेश्वर की योजना के अनुसार विवादित स्थिति में भी भलाई को प्राथमिकता देना। परमेश्वर के सामने हमारा उद्देश्य यही है कि हम अपनी प्रतिक्रियाओं से उसकी महिमा दिखाएं, न कि अपने अधिकारों के रक्षा में लड़ें।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में और पूरे वाक्य न दें)
• मिसाल के तौर पर, बाइबल अन्य स्थानों पर भी भलाई के कारण मिलते अनुभवों की वास्तविकता को स्वीकार करती है, जैसे कि प्रतिफल का प्रमाण—यह भी दिखाता है कि दृढ़ विश्वास और धार्मिकता से भरा जीवन कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य देता है।
• संसार के दमन के बीच नैतिक आचरण बनाए रखना—यह वचन बताता है कि अनुग्रह और सत्य का संयोजन कैसे खतरों को परास्त कर सकता है।
• दया और समर्पण: भलाई से उठने वाला दुःख, ईश्वर के अनुभवजन्य उद्देश्य के साथ जुड़कर हमारी आस्था को प्रबल बनाता है।
पवित्र ग्रंथ के साथ सम्बद्ध पंक्तियाँ
यह शिक्षा अन्य पवित्र ग्रंथों में भी दिखती है कि यदि हमारा कदम धार्मिकता के अनुसार है, तो आंतरिक शांति और परमेश्वर की कृपा हमारी कठिनाइयों के बीच हमें संबल देती है — भले ही बाहरी परिस्थितियाँ प्रतिकूल हों।
चर्चा के लिए संक्षिप्त प्रश्न
व्यावहारिक अनुभवी सुझाव
1) दुःख के क्षण में शांतिपूर्ण प्रार्थना और परमेश्वर के वचनों को स्मरण रखना।
2) अगर संभव हो तो सहायता के लिए विश्वस्त साथियों या समुदाय के साथ व्यवहार-आचार साझा करें—न कि अकेले में संघर्ष करें।
3) अपने दैनंदिन आचरण में सत्य, प्रेम और ईमानदारी को प्राथमिकता दें ताकि भलाई के कारण होने वाला दुःख भी उद्देश्यपूर्ण बने।
अंतिम चिंतन
हम जिस भलाई के लिए चुनते हैं, वह केवल हमारे लिए नहीं है, बल्कि परमेश्वर की महिमा और नई सृष्टि की restoration की दिशा में योगदान है। यह verse कहता है—यदि दुःख परमेश्वर की इच्छा के अनुसार है, तो यह केवल भलाई के कारण उठाए गए दुःख से अधिक ऊँचा और स्थिर है। हमारी स्थिरता वही है जो प्रेम और विश्वास से ढलती है, ताकि दुनिया देखे कि सच्चा जीवन यीशु में है।
सूक्ष्म उद्धरणों के लिए नोट
इस पाठ के भीतर Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के ठीक उद्धरण उपलब्ध नहीं होते; यदि कोई संकलन उनके शब्दों का उल्लेख करे, तो उन्हें सकारात्मक उद्धरण के रूप में उद्धृत किया जाएगा।