Old Testament
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1 पतरस 3:11 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
वह बुराई का साथ छोड़े, और भलाई ही करे; वह मेल मिलाप को ढूँढ़े, और उसके यत्न में रहे।
1 पतरस 3:11 पद-दर-पद बाइबल टीका
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1 पतरस 3:11 समानांतर पद और संबंधित वचन
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इब्रानियों 12:14 (HINIRV) »
सबसे मेल मिलाप रखो, और उस पवित्रता के खोजी हो जिसके बिना कोई प्रभु को कदापि न देखेगा*। (1 पत. 3:11, भज. 34:14)

भजन संहिता 34:14 (HINIRV) »
बुराई को छोड़ और भलाई कर; मेल को ढूँढ़ और उसी का पीछा कर। (इब्रा. 12:14)

आर्थ: वह बुराई का साथ छोड़कर भलाई ही करे
1 पतरस 3:11 में कहा गया है कि ईश्वर के बच्चों का जीवन बुराई से दूर रहते हुए नेक कार्यों की दिशा में बढ़ना चाहिए, और वे मेल-जो-la-फ-य की कोशिश करें। सरल शब्दों में: असुरक्षित पल से मोड़ते हुए स्वयं को शांत, प्यारे और निष्काम सेवा में लगाएं।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह पाठ पतरस के लिए प्रेरित पत्र का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य पहला ईसाई समाज में प्रेम, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और नैतिक जीवन के मानदंड स्थापित करना है। पतरस ने विश्वासियों को चिंता-रहित विचारधारा नहीं, बल्कि व्यवहारिक निष्ठा हेतु निर्देशित किया है: बुराई से परहेज, भलाई की खोज, और शांतिपूर्ण मिलाप में संलग्न रहना।
व्याख्या के मुख्य बिंदु
पत्र-तत्समय से जुड़ी चीज़ें
यह प्रेरणा एक निवासी समुदाय के लिए है जो कठिन परिस्थितियों में भी प्रेमपूर्ण और नम्र रहते हुए सेवा के मार्ग पर चलना चाहता है। यह संदेश दयालुता, दया और सत्य के साथ स्थापित रिश्तों पर जोर देता है, ताकि दुर्व्यवहार और कटुता से बचा जा सके।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संदर्भ) और छोटा स्पष्टण
- रोमियों 12:17-21: प्रतिशोध के बजाय pneus-शांति और भलाई; आपसी शांति के प्रयासों पर जोर।
- इफिसियों 4:31-32: शिकवणों से दूर रहना, दया, कोमलता एवं क्षमा का व्यवहार अपनाना।
- कहा गया भजन 34:14: बुराई से दूर रहकर भलाई को खोजने की प्रेरणा।
क्रॉस-विचार से जुड़ी छोटी व्याख्या
इन संदर्भों में एक बात स्पष्ट होती है: जीवन का लक्ष्य केवल गलत से बचना नहीं, बल्कि सक्रिय रूप से कल्याणकारी कार्यों में लिप्त रहना है। यह न केवल व्यक्तिगतरूपी नैतिकता है, बल्कि समुदाय-स्तर पर शांति और मेल मिलाप की सूक्ति है।
व्यावहारिक निष्कर्ष
आज के जीवन में इस पाठ से सीख हो सकती है कि कैसे हर छोटी-छोटी कार्रवाइयों के जरिए हम बुराई से दूर रहते हुए अच्छे कामों की दिशा में बढ़ सकते हैं—परोपकार, सहानुभूति, और संघर्ष-युक्त परिस्थितियों में भी शांतिपूर्ण समाधान तलाशना।
संक्षिप्त निष्कर्ष
वह बुराई से दूरी और भलाई की खोज—यही जीवन को ईश्वर के अनुरूप बनाते हैं, ताकि मेल-मुलाकात मजबूत हो और हमारे प्रयासों से समाज में सही और अच्छे परिणाम दिखें।
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