Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी1 पतरस 3:8 बाइबल पद की व्याख्या
1 पतरस 3:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
अतः सब के सब एक मन और दयालु और भाईचारे के प्रेम रखनेवाले, और करुणामय, और नम्र बनो।
1 पतरस 3:8 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
1 पतरस 3:8 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

रोमियों 12:10 (HINIRV) »
भाईचारे के प्रेम* से एक दूसरे पर स्नेह रखो; परस्पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो।

1 पतरस 1:22 (HINIRV) »
अतः जब कि तुम ने भाईचारे के निष्कपट प्रेम के निमित्त सत्य के मानने से अपने मनों को पवित्र किया है, तो तन-मन लगाकर एक दूसरे से अधिक प्रेम रखो।

इफिसियों 4:31 (HINIRV) »
सब प्रकार की कड़वाहट और प्रकोप और क्रोध, और कलह, और निन्दा सब बैर-भाव समेत तुम से दूर की जाए।
अर्थ का प्रत्यक्ष निर्धारण
1 पतरस 3:8 में प्रेरित पतरस हमें एक समान मन, दयालुता, भाईचारे के प्रेम, करुणा और नम्रता में बंधने की शुद्ध बुलाहट देता है। इसका केंद्र यह है कि ईश्वर-आस्था वाले लोग एक दूसरे के प्रति संगत, विनम्र और सहानुभूति से भरे हों, ताकि समुदाय के भीतर सच्चा प्रेम स्थापित हो सके।
पृष्ठभूमि और प्रसंग
पिता-पुत्र के पदों के भीतर पहले चैप्टर में पतरस मसीही जीवन के व्यवहारिक उल्लंघन और पीड़ाओं के बीच विश्वास की दृढ़ता की बात करते हैं। गढ़ा गया सामाजिक संदर्भ प्रायः रोम, नौकर-स्वामी सम्बन्ध, और पीलिया-जैसी सामाजिक विषमताओं को दर्शाता है; इसलिए यह दायित्व कहता है कि ईमानदार जीवन और सम्मति से भरे रिश्ते बनें। 3:8 के तीन मुख्य गुण—एकचित्तता (एक मन), दयालुता, और भाईचारे के प्रेम—एक साथ चलकर ईश्वर के भय में चलते हुए भाइयों-बहनों के बीच पूर्ण सामंजस्य बनाते हैं।
व्याख्या के संकेत
चयनित क्रॉस-रेफरंसेस के साथ संक्षिप्त विवेचन
यहोशे के समानता के साथ: अन्य मौन-गुंजनों में एक समानता के साथ व्यवहार दिखाता है कि हम एक-से-मन बनकर एक-दूसरे के साथ रहें।
गलातियों 5:22-23 की फलों की तरह: आत्मा के फलों में यह गुण दिखते हैं—प्रेम, उदारता, और विनम्रता।
आयामिक प्रतीक और अनुप्रयोग
इसूल भक्ति में, हर सदस्य भाइयों की भलाई के लिए स्वयं को निम्न स्तर पर देता है—अपनी प्रतिष्ठा को ऊपर रखने के बजाय एक दूसरे की गरिमा को ऊँचा उठाने। यह सिर्फ व्यक्तिगत नैतिकता नहीं, बल्कि समुदाय की संरचना के लिए एक संरचनात्मक नियम है: ईश्वर के राज्य में प्रणयन एक दूसरे के साथ व्यवहार पर निर्भर है।
संक्षिप्त व्यवहारिक निष्कर्ष
पक्का takeaway
परम पिता के पास आने वाले हर विश्वासी के लिए यह शुद्ध लक्ष्य है कि हम एक मन, दयालु और भाईचारे के प्रेम के साथ एक दूसरे के प्रति विनम्र रहें, ताकि संसार देख सके कि ईश्वर का चिरस्थायी राज्य ऐसे प्रेम-संयोजन से पनपता है।
सूत्र-संदर्भ (संयोगित):
गलातियों 5:22-23 के फलों से समान गुण; मत्ती 23:12 के निम्नत्व के सिद्धांत; यूहन्ना 13:34-35 के प्रेम के नए command.