Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी1 पतरस 3:18 बाइबल पद की व्याख्या
1 पतरस 3:18 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इसलिए कि मसीह ने भी, अर्थात् अधर्मियों के लिये धर्मी ने पापों के कारण एक बार दुःख उठाया, ताकि हमें परमेश्वर के पास पहुँचाए; वह शरीर के भाव से तो मारा गया, पर आत्मा के भाव से जिलाया गया।
1 पतरस 3:18 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
1 पतरस 3:18 समानांतर पद और संबंधित वचन
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इब्रानियों 9:28 (HINIRV) »
वैसे ही मसीह भी बहुतों के पापों को उठा लेने के लिये एक बार बलिदान हुआ और जो लोग उसकी प्रतीक्षा करते हैं, उनके उद्धार के लिये दूसरी बार बिना पाप के दिखाई देगा। (1 पत. 2:24, तीतु. 2:13)

इब्रानियों 9:26 (HINIRV) »
नहीं तो जगत की उत्पत्ति से लेकर उसको बार-बार दुःख उठाना पड़ता; पर अब युग के अन्त में वह एक बार प्रगट हुआ है, ताकि अपने ही बलिदान के द्वारा पाप को दूर कर दे।

1 पतरस 4:6 (HINIRV) »
क्योंकि मरे हुओं को भी सुसमाचार इसलिए सुनाया गया, कि शरीर में तो मनुष्यों के अनुसार उनका न्याय हुआ, पर आत्मा में वे परमेश्वर के अनुसार जीवित रहें।
1 पतरस 3:18 — आध्यात्मिक उद्घाटन और प्रतिफल की यात्रा
इस पवित्र verse का सन्देश तत्काल संदर्भ में क्रूस पर मसीह की suffering और उसके परिणाम से जुड़ा है। पतरस यह बताने में समर्थ होते हैं कि मसीह ने अधर्म के कारण दण्डित होने पर भी धर्मियों के लिए एक मार्ग प्रशस्त किया—इसी एक बार दुःख के द्वारा वह हमें परमेश्वर के पास पहुंचाने का रास्ता बनाते हैं।
कथन का संदर्भ और केंद्रीय संदेश
यह अवलोकन बताता है कि मसीह ने अपने जीवन की पीड़ा को एक उद्देश्य के लिए उठाया: अधर्मियों के लिए धर्मी की वैधता, पापों के कारण दुःख, ताकि हम परमेश्वर के निकट पहुँच सकें। जिस शरीर ने उसे मार डाला, वही शरीर अब जीवित हो उठा—आत्मा के भाव से जिलाया गया। यह ईसाई विश्वास के तीनीधाराओं को एक साथ जोड़ता है: बरखास्त धर्मीता, क्रूस पर बलिदान, और पवित्र आत्मा से नवजीवन।
देवता और विश्वास के बारे में स्पष्टता
- परमेश्वर का न्याय तथा कृपा एक साथ परिलक्षित होते हैं: अधर्मी व्यवस्था में सजा, पर मसीह के कारण उद्धार का रास्ता खुलता है।
- सत्य यह है कि परमेश्वर हमारे पापों के स्थान पर अपने पुत्र को देता है ताकि विश्वासियों को उनके नये जीवन का भागीदार बनाया जा सके।
महत्वपूर्ण शब्दों तथा’image की रूपरेखा
- “शरीर के भाव से” से संकेत मिलता है कि क्रूस पर मृत्यु सामान्य मृत्यु नहीं, एक उद्देश्यपूर्ण बलिदान था।
- “आत्मा के भाव से जिलाया गया” बताता है कि मसीह की जीवनशैली और पुष्टि पवित्र आत्मा के माध्यम से है; यह जीवन‑पुनर्जीवन का प्रमाण है, जो विश्वासियों के लिए भी सम्भव है।
संबद्ध ग्रंथ और सरल टिप्पणी
यहाँ प्रमुख विचार स्कूली पितृव्याख्या से समन्वयित होता है—यानी Christus की मृत्यु एक न्यायिक क्रिया है जो पाप के बंधन को तोड़ती है और विश्वासियों के लिए एक नया संबंध स्थापित करती है।
सीधी करवटें: आज के मनुष्यों के लिए सीख
अनुशेष शास्त्रीय टिप्पणी से चाबियाँ
मैथ्यू हेनरी, एलबर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के मध्य से उद्धृत संक्षिप्त विचार: उन्होंने इस verse के उद्धार के क्रम में क्रूस के उद्देश्य, न्याय और जीवन की पुष्टि पर प्रकाश डाला है; आप चाहें तो उनके संकलनों से इसी विषय पर गहन चर्चा देख सकते हैं।
क्रॉस-रेफरेंसेज और त्वरित स्पष्टीकरण
- रोमियों 5:8–9: प्रेम और उद्धार का कारण—क्रूस पर यीशु के बलिदान से पाप का दायित्व मिटता है।
- कोलossियों 1:21–22: विश्वासियों के लिए पुनःस्थापना और परमेश्वर के पास पहुँचने की स्थिति।
- एब्राहीमिक विश्वास उद्धार के मार्ग की पुष्टि: विश्वास से जोड़ा गया जीवन परमेश्वर के साथ स्थायी संबंध बनाता है।
निष्कर्ष
1 पतरस 3:18 हमें यह याद दिलाता है कि मसीह का दुःख और जीवन‑पुनर्जीवन मानवीय पापों के लिए एक बहुमूल्य दाम है—ताकि जो विश्वास रखते हैं, वे परमेश्वर के निकट पहुँच सकें और आत्मा के प्रभाव से जीवन का नया अनुभव करें। यह संदेश आज भी प्रेरक है: साँचे पथ पर चलना, विश्वास के साथ सहन करना, और जीवन को परमेश्वर की महिमा के लिए समर्पित करना।