Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी1 पतरस 4:6 बाइबल पद की व्याख्या
1 पतरस 4:6 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्योंकि मरे हुओं को भी सुसमाचार इसलिए सुनाया गया, कि शरीर में तो मनुष्यों के अनुसार उनका न्याय हुआ, पर आत्मा में वे परमेश्वर के अनुसार जीवित रहें।
1 पतरस 4:6 पद-दर-पद बाइबल टीका
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1 पतरस 4:6 समानांतर पद और संबंधित वचन
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रोमियों 8:2 (HINIRV) »
क्योंकि जीवन की आत्मा की व्यवस्था ने मसीह यीशु में मुझे पाप की, और मृत्यु की व्यवस्था से स्वतंत्र कर दिया।

रोमियों 8:9 (HINIRV) »
परन्तु जब कि परमेश्वर का आत्मा तुम में बसता है, तो तुम शारीरिक दशा में नहीं, परन्तु आत्मिक दशा में हो। यदि किसी में मसीह का आत्मा नहीं तो वह उसका जन नहीं।

1 पतरस 4:6 का तात्पर्य—जीवित रहने की आशा की सीमा
पद का संदर्भ: “क्योंकि मरे हुओं को भी सुसमाचार इसलिए सुनाया गया, कि शरीर में तो मनुष्यों के अनुसार उनका न्याय हुआ, पर आत्मा में वे परमेश्वर के अनुसार जीवित रहें।” यह वाक्य 1 पतरस के पाठ में आश्वासन देता है कि दुख-संयम और मर्मभेदी परीक्षणों के बीच भी परमेश्वर की दृष्टि में जीवन-जीवित रहने की वास्तविकता संभव है। लेखक पेत्रुस पहले-पहले पहले खेद-पीड़ा को अस्थायी मानते हैं, परन्तु जो अस्थायी शरीरिक न्याय हुआ, उसका परिणाम स्थिर आत्मिक उद्धार है।
मुख्य अर्थ
यह verse सत्यावस्था में बताता है कि पापयुक्त संसार के भीतर भी परमेश्वर के लिये आँच में खरे रहने वाले लोग हैं। “मरे हुओं को सुनाया गया सुसमाचार” दर्शाता है कि मृत्यु के बाद भी प्रेरितों-समाज ने संदेश फैलाया और यह दर्शाता है कि मृत्यु के बाद भी प्रभु के न्याय और जीवन की सत्ता का प्रभाव बना रहता है। शारीरिक न्याय—जो मनुष्यों के द्वारा किया गया—उसका सीमित प्रभाव है, पर आत्मिक न्याय के साथ परमेश्वर के सामर्थ्य में जीवित रहने की वास्तविकता उपस्थित है।
दो-तीन प्रमुख विषय
Related passages (संक्षिप्त संदर्भ)
व्यावहारिक चिंतन
कठिन समय में भी इस संदेश को पकड़ना सीखें कि हमारी सांसारिक परिस्थितियाँ जीवन को परिभाषित नहीं करतीं—हम परमेश्वर के भीतर जीवित रहने की सुरक्षा में हैं। कठिनाइयों के बीच भी हमें जीवित प्रभु का नाम बढ़ाते हुए, आत्मिक आशीष और पवित्र अध्यवसाय बनाए रखना चाहिए। एक व्यावहारिक कदम: कठिन समय में प्रार्थना, पवित्रशास्त्र की स्मरण-योजना और विश्वासी समुदाय के साथ भागीदारी।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह पद हमें बताता है कि मरे हुओं के लिए सुसमाचार का संदेश केवल मृत्यु के बाद नहीं, बल्कि जीवन-यात्रा के प्रत्येक क्षण में प्रभावशाली रहता है। शरीर के न्याय के लोक-चक्र से ऊपर उठकर आत्मा में जीवित रहने की संभावना और सुरक्षा परमेश्वर के आधार-विश्वास के भीतर है, जिसे दया से हम धारण करते हैं।
पुस्तक के लोग के विचार (संक्षेप)
मार्थे की प्रसिद्ध टिप्पणियाँ और ऐल्बर्ट बार्न्स/आदम क्लार्क के पारिभाषिक दृश्य एक नयी रोशनी डालते हैं: वे कहते हैं कि मृत्यु के बाद जीवन की आशा न केवल मृत्यु पर भारी पड़ती है, बल्कि विश्वास को जीवित बनाती है—यही संदेश पतरस के शब्दों में स्पष्ट है। प्रमुख उद्धरण: “क्योंकि मरे हुओं को भी सुसमाचार इसलिए सुनाया गया”—यह वाक्य स्वयं यह दर्शाता है कि शारीरिक स्तर पर परीक्षण किस प्रकार आत्मिक जीवन के लिए मार्ग बनाते हैं।
Cross references: रोम 8:11; यूह 3:14; लूका 20:37-38