Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी1 पतरस 4:12 बाइबल पद की व्याख्या
1 पतरस 4:12 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
हे प्रियों, जो दुःख रूपी अग्नि तुम्हारे परखने के लिये तुम में भड़की है, इससे यह समझकर अचम्भा न करो कि कोई अनोखी बात तुम पर बीत रही है।
1 पतरस 4:12 पद-दर-पद बाइबल टीका
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1 पतरस 4:12 समानांतर पद और संबंधित वचन
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2 तीमुथियुस 3:12 (HINIRV) »
पर जितने मसीह यीशु में भक्ति के साथ जीवन बिताना चाहते हैं वे सब सताए जाएँगे।

1 पतरस 1:6 (HINIRV) »
इस कारण तुम मगन होते हो, यद्यपि अवश्य है कि अब कुछ दिन तक नाना प्रकार की परीक्षाओं के कारण दुःख में हो,

1 पतरस 5:9 (HINIRV) »
विश्वास में दृढ़ होकर, और यह जानकर उसका सामना करो, कि तुम्हारे भाई जो संसार में हैं, ऐसे ही दुःख भुगत रहे हैं।
आसान शब्दों में समझ: दुःख की अग्नि परखने के समय हमारा आंतरिक दृष्टिकोण
प्रमुख भाव: पवित्रता और विश्वास के लिये यह आयत बताती है कि दुख-स्वरूप अग्नि जो हमारी परीक्षा के लिये भड़की है, वह अनोखी बात नहीं है; यह एक सामान्य अनुभव है जिसे हमें सामान्य ढंग से लेने की आवश्यकता है।
पृष्ठभूमि और संपूर्ण संदर्भ
1 पतरस 4:12-पत्र का लेखक चेलों को यह स्मरण कराता है कि वे मसीह की पहचान के कारण समाज में कठिनाइयों और भर्त्सनाओं से प्रभावित होते हैं। असल बात यह है कि दुख-स्वरूप अग्नि से उनका परीक्षण हुआ है—यानी जीवन के कष्ट, प्रतिरोध, या persecutions—जो उनके विश्वास की परख करते हैं। प्रेरित पतरस ने यह नहीं कहा कि दर्द कुछ असामान्य है, बल्कि यह समझाने के लिये कहा कि यह हमारे लिए परमेश्वरीय योजना का भाग है।
व्याख्यात्मक बिंदु
अनुवादक विचार और प्राचीन टिप्पणीकारों के अनुमान
Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke जैसी विकृतियों ने इस प्रकार के परीक्षणों को “विश्वास की कसौटी” माना है: दुखों के समय भी क्रिया-प्रवृत्ति वही रहे—हमें धैर्य, आशा, और पवित्र जीवन की ओर ले जाना। Henry की शिक्षा के अनुसार, अग्नि की परख हमारे चरित्र को ढालती है और हमारे उत्कर्ष का अवसर बनती है। Clarke यह बतलाते हैं कि यह सुखदिद नहीं, बल्कि पक्का धैर्य पैदा करने वाला होता है। Barnes भी इसे “क्रूसधारणा” के साथ जोड़ते हैं: दुख हमारे लिए एक मार्ग है जिसमें ईश्वर की महत्ता प्रकट होती है।
इन विचारों का एकात्म उद्देश्य यह है कि दृष्टि केवल कष्ट पर न रहे, बल्कि यह स्वीकार करे कि ईश्वर की करुणा और उन्नति हमारी सहायता के लिये है।
संदर्भ-न_related पठन
इन क्रॉस-रेफरेंसों से यह स्पष्ट होता है कि दुख को केवल दयालुता-भरे निर्देशों के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि वे हमारी आस्था के मूल्यांकन और वृद्धि के अवसर हैं।
संक्षिप्त निष्कर्ष/पեզ-आउट
जो दुख हमारे ऊपर आता है, उसे अचरज की भावना से नहीं बल्कि विश्वास के साथ स्वीकार करें। ईश्वर इस अग्नि में हमें और अधिक स्थिर, नम्र और दृढ़ बनाते हैं। विश्वास के इस परीक्षण के दौरान हमें धैर्य, प्रार्थना और समुदाय के सहारे टिके रहना चाहिए, ताकि हम यह जानें कि हमारा उद्धारकर्ता वही है जो हमें पीड़ाओं के बीच भी सहारा देता है।