Old Testament
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1 पतरस 4:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
पर जैसे-जैसे मसीह के दुःखों में सहभागी होते हो, आनन्द करो*, जिससे उसकी महिमा के प्रगट होते समय भी तुम आनन्दित और मगन हो।
1 पतरस 4:13 पद-दर-पद बाइबल टीका
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1 पतरस 4:13 समानांतर पद और संबंधित वचन
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रोमियों 8:17 (HINIRV) »
और यदि सन्तान हैं, तो वारिस भी, वरन् परमेश्वर के वारिस* और मसीह के संगी वारिस हैं, जब हम उसके साथ दुःख उठाए तो उसके साथ महिमा भी पाएँ।

याकूब 1:2 (HINIRV) »
हे मेरे भाइयों, जब तुम नाना प्रकार की परीक्षाओं में पड़ो तो इसको पूरे आनन्द की बात समझो*,

रोमियों 5:3 (HINIRV) »
केवल यही नहीं, वरन् हम क्लेशों में भी घमण्ड करें, यही जानकर कि क्लेश से धीरज,
1 पतरस 4:13 का संदर्भ और अर्थ
पतरस का यह उद्धारसूचक वाक्य ईसाई जीवन के कठिन अनुभवों में भी आस्था के साथ बने रहने की प्रेरणा देता है। पहले अध्यायों में लेखक सचेत करता है कि विश्व हमें दुःख देगा, परन्तु मसीह के दुःखों में सहभागी होना हमारे विश्वास को दृढ़ बनाता है क्योंकि यह भागीदारी हमारी आशा के अन्तःस्थल को मजबूत करती है। इस verse में कहा गया है कि मसीह के दुःखों में भागीदारी करते समय आनंद और मगन होना चाहिए, ताकि परमेश्वर की महिमा एवं यथार्थ के समय में हमें खुशी मिले।
मुख्य मतलब संक्षेप में
यह पाठ विद्यार्थियों को यह याद दिलाता है कि सजीव विश्वास तब प्रकट होता है जब शारीरिक या सामाजिक पीड़ा के बीच भी हम परमेश्वर के काम में विश्वास बनाए रखते हैं। मसीह ने जो दुःख सहा, उसका सहभागी बनना हमें नयी पहचान देता है—हम क्रूस के आधिकारिक साथी बनते हैं। यह आनंद न कि शारीरिक सुख का, बल्कि परमेश्वर की महिमा के साथ एक दैवीय सन्तुष्टि है जो परीक्षणों में भी टिके रहने देती है।
तीन प्रमुख विषय
संबद्ध आयतें (cross-references)
- रोम 8:17-18: पीड़ा के साथ वार्ता करते हुए भी आजीवन महिमा की आशा; यह बनावट हमें दयालुता और धैर्य देती है।
- याह 26:3-4: परमेश्वर पर पूरे विश्वास से टिके रहने पर शांति मिलती है, जो अराजक परिस्थितियों में भी स्थिर रहती है।
- यस 12:2: उद्धारकर्ता की महिमा के लिए मगन होना—आत्म-रक्षा नहीं, ईश्वर-उत्सव है।
अनुष्ठानात्मक तथा व्यवहारिक प्रतिबिंब
जीवन में कठिनाईयों के समय इनमें से कुछ व्यवहार अपनाने से मदद मिलती है: - दुख के समय प्रभु की प्रार्थना और पठन-पाठन बनाए रखना; - समुदाय के साथ सहानुभूति और सहायता साझा करना; - अपने दिल में परमेश्वर की महिमा को सबसे ऊपर रखना, ताकि दुःख भी एक अवसर बन जाये।
कथा-आधारित समझ (गठित सार)
जैसे एक धैर्यशील किसान बारिश और अंधेरे मौसम के बीच भी खेत की तैयारी करता है, वैसे ही हम भी मसीह के दुःखों में सहभागी बनकर परमेश्वर की महिमा के प्रकाश को अपने जीवन में उभारते हैं। यह भागीदारी हमारे अंदर खुशी की एक अस्थायी नहीं, बल्कि स्थिर आस्था पैदा करती है।
संक्षिप्त निष्कर्ष
यही संदेश है कि कठिनाइयों के बीच भी ईमानदार विश्वास रखें और मसीह के दुःखों में सहभागी बनें; इससे न सिर्फ हमारी आस्था मजबूत होगी, बल्कि समय आने पर परमेश्वर की महिमा भी उभरकर सामने आएगी और हम आनंदित होंगे।
उद्धृत टिप्पणीकारों के विचार (संक्षेप)
जैसे मथ्यू हेनरी, बार्न्स और एडम क्लार्क ने प्रायः यह कहा है कि पीड़ा के समय भी ईमानदार निवेदन और विश्वास परमेश्वर की योजना के अनुरूप है; यह verse उन्हीं विचारधाराओं के साथ एकजुट होकर हमारी भागीदारी को महिमा-युक्त बनाती है।
नोट: यदि आप चाहें तो मैं इस पाठ के लिए विशिष्ट हिंदी-उद्धरणों के साथ और भी विवरण जोड़ सकता हूँ।