Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी1 पतरस 2:1 बाइबल पद की व्याख्या
1 पतरस 2:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इसलिए सब प्रकार का बैर-भाव, छल, कपट, डाह और बदनामी को दूर करके,
1 पतरस 2:1 पद-दर-पद बाइबल टीका
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1 पतरस 2:1 समानांतर पद और संबंधित वचन
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इफिसियों 4:31 (HINIRV) »
सब प्रकार की कड़वाहट और प्रकोप और क्रोध, और कलह, और निन्दा सब बैर-भाव समेत तुम से दूर की जाए।

याकूब 1:21 (HINIRV) »
इसलिए सारी मलिनता और बैर-भाव की बढ़ती को दूर करके, उस वचन को नम्रता से ग्रहण कर लो, जो हृदय में बोया गया और जो तुम्हारे प्राणों का उद्धार कर सकता है।

याकूब 4:11 (HINIRV) »
हे भाइयों, एक दूसरे की निन्दा न करो, जो अपने भाई की निन्दा करता है, या भाई पर दोष लगाता है*, वह व्यवस्था की निन्दा करता है, और व्यवस्था पर दोष लगाता है, तो तू व्यवस्था पर चलनेवाला नहीं, पर उस पर न्यायाधीश ठहरा।
1 पतरस 2:1 — स्थान की पृष्ठभूमि और पाठ का अर्थ
यह पद नए जन्म के बाद की जीवनशैली के लिए स्पष्ट निर्देश देता है। पतरस चिट्ठे में कहते हैं कि मसीही विश्वासियों को समूह में एक नई प्रवृत्ति, एक नई आदत विकसित करनी चाहिए: पुराने, क्षुब्ध और नकारात्मक गुणों को छोड़ना। इस वाक्य के भीतर “इसलिए” शब्द प्रतीकात्मक रूप से यह संकेत देता है कि पिछले शिक्षण के लिए एक परिणाम है: ईमानदार आचरण, प्रेम और करूणा अब मुख्य लक्ष्य हैं।
पाठ के बारे में एक नज़र
सूचना बताती है कि विश्वास के साथ जुड़ी नैतिक बदलाव एक सक्रिय निर्णय है—बैर, छल, कपट, डाह और बदनामी जैसी प्रवृत्तियाँ अब नहीं चलनी चाहिए। यह परिवर्तन केवल व्यक्तिगत पवित्रता तक सीमित नहीं है, बल्कि सामुदायिक संबंधों को भी सुधरता है, क्योंकि परमेश्वर के राज्य में विश्वसनीयता और सत्यता का स्वागत होता है।
इस पाठ में परमेश्वर या विश्वास के बारे में जो दिखता है
परमेश्वर की पवित्रता के सामने, विश्वासी भी पवित्र जीवन की ओर बुलाए जाते हैं। इन कठिन प्रवृत्तियों को छोड़ना एक आंतरिक परिवर्तन, न कि बाहरी नियम-पालन मात्र है। इससे प्रकट होता है कि विश्वास व्यक्तिगत पवित्रता के साथ समुदायिक सौहार्द और ईमानदारी को भी बढ़ावा देता है।
मुख्य शब्द और चित्रावलियाँ
- बैर-भाव: एक दुसरे के बीच कटुता, टकराव और द्वेष की भावना।
- छल और कपट: सत्य के विपरीत बनावटी चालें, बहकाने वाले व्यवहार।
- डाह: दूसरों की सफलताओं या वस्तुओं के लिए घृणा या जलन।
- बदनामी: दूसरों के विरुद्ध अपमानजनक शब्दों या कल्पनाओं की रचना।
अन्य उपयुक्त संदर्भ
1) याकूब 3:14-16 — जड़ में डिपित और दुष्प्रभावी आत्माओं के बारे में चेतावनी, ताकि बातें घृणा से ऊपर उठकर शांति और मिठास बनी रहे।
2) इफिसियों 4:25-32 — गीत-कलह, क्रोध और फूहड़ भाषण से परहेज़, और एक-दूसरे के साथ सरलताओं, प्रेम और क्षमा की वसूली।
3) रोमियों 12:9-21 — प्रेम की वास्तविक क्रिया, कठिन वक्त में भी वैर न रखने और शांति के लिए प्रयास।
वर्तमान संदर्भ और शिक्षा
यह पद स्पष्ट करता है कि सही आचरण वह है जो विश्वास को व्यक्त करे और समुदाय को सुरक्षित बनाए। परमेश्वर की इच्छा में सत्य और प्रेम प्रमुख हैं, और हम उनके यह निर्देश कैसे व्यवहार में लाएं, यह हमारे दैनिक जीवन का मापदंड है।
आज के लिए अनुप्रयोग
संक्षिप्त समेकन
संयुक्त उत्तराधिकार में, यह पाठ हमें बताता है कि ईमानदारता, प्रेम और पवित्रता का आचरण ही मसीही जीवन की पहचान है। पुराने बुरे गुणों को छोड़ना, नया जीवन शुरू करने की दिशा है जिसमें God-ward प्रेम और दूसरों के साथ सम्मान प्रमुख होते हैं।
कठिन शब्दों का विश्लेषण: Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के तात्पर्य से मिलती-जुलती धारणाओं के अनुसार, युवा विश्वासियों के लिए यह रवैया नैतिक और आध्यात्मिक परिपक्वता की मांग करता है—परन्तु कृपया ध्यान दें कि हमने स्वयं उनके वाक्यों के पूर्ण उद्धरण नीचे नहीं दिए हैं; यदि चाहें तो मैं उनके पूर्ण बिंदु-उद्धरण दे सकता हूँ।