Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी1 पतरस 2:2 बाइबल पद की व्याख्या
1 पतरस 2:2 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
नये जन्मे हुए बच्चों के समान निर्मल आत्मिक दूध की लालसा करो*, ताकि उसके द्वारा उद्धार पाने के लिये बढ़ते जाओ,
1 पतरस 2:2 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
1 पतरस 2:2 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

इब्रानियों 5:12 (HINIRV) »
समय के विचार से तो तुम्हें गुरु हो जाना चाहिए था, तो भी यह आवश्यक है, कि कोई तुम्हें परमेश्वर के वचनों की आदि शिक्षा फिर से सिखाए? तुम तो ऐसे हो गए हो, कि तुम्हें अन्न के बदले अब तक दूध ही चाहिए।

इफिसियों 4:15 (HINIRV) »
वरन् प्रेम में सच बोलें और सब बातों में उसमें जो सिर है, अर्थात् मसीह में बढ़ते जाएँ,

मरकुस 10:15 (HINIRV) »
मैं तुम से सच कहता हूँ, कि जो कोई परमेश्वर के राज्य को बालक की तरह ग्रहण न करे, वह उसमें कभी प्रवेश करने न पाएगा।”
1 पतरस 2:2 पर आधारित पठन-परिचय
यह पद हमारे भीतर नए जन्म के बाद प्रकाशित होने वाले आस्थागत जीवन की शुरुआत को दर्शाता है। प्रेरित पतरस ने विश्वासी जीवों को यह बताया कि उद्धार की आशा कैसे हमारे भीतर एक पवित्र, नई प्रवृत्ति बनकर उभरती है — वह भी मजबूत, दूध की तरह निर्मल और तत्कालिक चहलकदमी के साथ। यहाँ “नये जन्मे बच्चे” एक रूपक है, जो धार्मिक अनुभव की शुरुआती अवस्था, निष्ठा की भूख और शुद्ध सीखने की चाह को संकेत करता है।
पद का पाठ-परिचय
“नये जन्मे हुए बच्चों के समान निर्मल आत्मिक दूध की लालसा करो, ताकि उसके द्वारा उद्धार पाने के लिये बढ़ते जाओ।” इस वाक्य में दो प्रमुख तत्व स्पष्ट हैं: पहली, आत्मिक दूध की जरूरत और दूसरी, इसमें वृद्धि—प्रगति। दूध एक सहज, पवित्र भोजन का संकेत है जो संतानों को जीवंत बनाए रखता है। यह भोजन बासते में नहीं, बल्कि प्रवृत्ति-विकास में सहायक होता है; यह केवल प्यास बुझाने के बजाय जीवनधार बन जाता है।
मुख्य अध्यायगत तत्त्व और सीख
- उद्धार के लिए बढ़ना: यहाँ उद्धार का लक्ष्य जीवन में नयी दिशा, नयी जन्मजात प्रवृत्ति है, न कि केवल एक तात्कालिक अनुभव।
- निर्मल आत्मिक दूध: यह स्पष्ट संकेत है कि सीखना और साहचर्य में शुद्धता आवश्यक है—यानी पाप से दूर रहते हुए परमेश्वर की शिक्षाओं को ग्रहण करना।
- जन्मे हुए बच्चों की भूख: बच्चों जैसी तीव्र चाह, जो सतह पर नहीं, बल्कि आंतरिक परिवर्तन के प्रमाण में दिखाई दे, वह देखभाल के साथ विकसित होती है।
अनुशीलन-उद्धृत विचार (अन्वेषणात्मक तुलनाएं)
इस विचार को प्रेरित करने के लिए हमें अन्य शास्त्रीय टिप्पणियों के बिंदुओं पर एक नज़र डालनी चाहिए:
क्रॉस-रेफरेंसेस और उनका छोटा स्पष्टीकरण
- यहेव का दूध प्रकार: पुराने उद्धरणों में बताती हैं कि जैसे बच्चे दूध माँगते हैं, वैसे ही विश्वासी भी ईश्वर की शिक्षाओं को चाहें और ग्रहण करें।
- रोम 12:2 प्रकार के बदलाव: नया जीवन वह है जो परिवर्तन को प्राथमिकता देता है; आत्मिक दूध वही परिवर्तन-संस्थान में सहायता करता है।
- समानुभूतिक 2:3: परमेश्वर के आनन्द में वृद्धि; दूध के ग्रहण से आत्मिक अनुभव बढ़ते हैं।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
- नियमित पाठ और ध्यान: हर दिन परमेश्वर के शब्द को पढ़ना और उसकी गहराई में उतरना।
- अभ्यास और अनुशासन: प्रतिदिन धार्मिक गतिविधियों में लगना, सीखने के लिए विश्वासी समुदाय के साथ सहभागिता।
- पवित्र जीवनशैली: गिरह-बंधनों और प्रेरित-ാഥारणा से बचना, सत्य से प्रेम और मानवीय करुणा को बढ़ावा देना।
संक्षेप एवं निष्कर्ष
1 पतरस 2:2 एक प्रेरक आह्वान है: नया जन्म के बाद जीवन को निरंतर बनाए रखना, आत्मिक दूध की भूख को बनाए रखना और इसके द्वारा उद्धार के मार्ग पर बढ़ना। यह न सिर्फ शिक्षा की शुरुआत है, बल्कि एक जीवनधारा है जिसमें विश्वासी स्वाद लेते हैं, विकसित होते हैं और परमेश्वर के उद्देश्य के अनुरूप खुद को ढालते हैं।
संक्षिप्त संदर्भ
- cross-reference: रोम 12:2; 1 कोर 3:2; 2 पतरस 3:18 — ये दिखाते हैं कि जीवन में परिवर्तन, वृद्धि और ज्ञान के लिए निरंतर शिक्षा आवश्यक है।