Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी1 पतरस 2:19 बाइबल पद की व्याख्या
1 पतरस 2:19 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्योंकि यदि कोई परमेश्वर का विचार करके अन्याय से दुःख उठाता हुआ क्लेश सहता है, तो यह सुहावना है।
1 पतरस 2:19 पद-दर-पद बाइबल टीका
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1 पतरस 2:19 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 पतरस 2:20 (HINIRV) »
क्योंकि यदि तुमने अपराध करके घूँसे खाए और धीरज धरा, तो उसमें क्या बड़ाई की बात है? पर यदि भला काम करके दुःख उठाते हो और धीरज धरते हो, तो यह परमेश्वर को भाता है।

मत्ती 5:10 (HINIRV) »
“धन्य हैं वे, जो धार्मिकता के कारण सताए जाते हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्हीं का है।

लूका 6:32 (HINIRV) »
“यदि तुम अपने प्रेम रखनेवालों के साथ प्रेम रखो, तो तुम्हारी क्या बड़ाई? क्योंकि पापी भी अपने प्रेम रखनेवालों के साथ प्रेम रखते हैं।
1 पतरस 2:19 — पाठ के तात्पर्य का प्रारम्भिक संदर्भ
पतरस पहले शताब्दी के पयाम्बर-चेतना से लिखा गया एक पत्र है, जहां प्रेरित पतरस दुख-सहिष्णुता और प्रभु के साथ विश्वस्त रहने की महिमा पर बल देते हैं। 1 पतरस 2:19 बताता है कि यदि कोई परमेश्वर की दृष्टि में अन्याय से दुःख उठाकर क्लेश सहता है, तो वह इसके भीतर एक विशेष सुहागन (स्वीकार्यता) पाता है। यहाँ दुःख का कारण मानव-न्याय के विरुद्ध हो सकता है, प्रतिहिंसा नहीं, बल्कि नैतिकता, धर्म-धरना और विश्वास की कारण है।
यह वाक्य परमेश्वर के विश्वास के बारे में क्या बताता है
इस वचन में परमेश्वर के लिए संकल्प और विश्वास की दृढ़ता को मान्यता दी गई है। परमधर्मी जीवन में सही के लिए खड़ा होना और अन्याय के विरुद्ध चुपचाप सहना, ईश्वर के साथ जुड़ाव के प्रतीक हैं। यदि वे लोग जो सच के मार्ग पर चलते हैं, उनके विरुद्ध अन्याय होता है और वे दुःख उठाते हैं, तो यह परमेश्वर के पास स्वीकार्य है—यह सुख-प्रिय और सम्मानपूर्ण है। यह उद्धार के मार्ग पर शुद्ध आचरण के कारण है, न कि स्वार्थ-प्रयोजन के कारण।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्टता
- अन्याय से दुःख उठाना: एक ऐसी स्थिति जिसमें सच के कारण अत्याचार या अन्याय का सामना करना पड़ता है।
- क्लेश: आँसू, पीड़ा या प्रताड़ना, परन्तु यह प्रभु की प्रशंसा और विश्वास की दृढ़ता को बनाए रखने का अवसर हो सकता है।
अन्य से संबंधित पवित्र पाठ
– मत्ती 5:10-12: सत्य के मार्ग पर चलने से होने वाला क्लेश और आशीर्वाद।
– इफीसियों 6:12: आत्मिक संघर्ष जो प्रत्यक्ष शारीरिक दबाव से नहीं, बल्कि रक्षात्मक विश्वास से जुड़ा है।
– रोम 5:3-5: पीड़ा के साथ धैर्य और आशा की वृद्धि।
आज के समय में मार्गदर्शक अनुप्रयोग
एक संक्षिप्त समेकन
इस पद में प्रेरित पतरस यह स्मरण कराते हैं कि जो लोग सच के कारण अन्याय सहते हैं, वे परमेश्वर की दृष्टि में सुहावने होते हैं। यह न केवल धैर्य का प्रमाण है, बल्कि विश्वास की वास्तविक गहराई का प्रतीक भी है। ईश्वर की निष्ठा के साथ जीना, दुख-सहना और सही रास्ते पर अडिग रहना—ये सभी परमेश्वर के लिए एक सुंदर धारणा बनाते हैं।
याद रखें: जब प्रभु के साथ चलना कठिन हो, तब भी आत्म-निरीक्षण करें—क्या आप प्रेम, ईमानदारी और नम्रता के साथ लड़ रहे हैं? यदि हाँ, यह संदेश आपके लिए है कि यह सुहावना है और परमेश्वर के स्वागत के योग्य है।
उद्धरण संदर्भ (पूर्व-प्रस्तुत टिप्पणी): Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke के सार्वजनिक-डायरेक्ट टिप्पणी के संयोग से मूल विचार निकाले गए हैं।