Old Testament
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1 पतरस 2:8 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और, “ठेस लगने का पत्थर* और ठोकर खाने की चट्टान हो गया है,” क्योंकि वे तो वचन को न मानकर ठोकर खाते हैं और इसी के लिये वे ठहराए भी गए थे। (1 कुरि. 1:23, यशा. 8:14-15)
1 पतरस 2:8 पद-दर-पद बाइबल टीका
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1 पतरस 2:8 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यशायाह 8:14 (HINIRV) »
और वह शरणस्थान होगा*, परन्तु इस्राएल के दोनों घरानों के लिये ठोकर का पत्थर और ठेस की चट्टान, और यरूशलेम के निवासियों के लिये फंदा और जाल होगा। (रोम. 9:32,33)

1 कुरिन्थियों 1:23 (HINIRV) »
परन्तु हम तो उस क्रूस पर चढ़ाए हुए मसीह का प्रचार करते हैं जो यहूदियों के निकट ठोकर का कारण, और अन्यजातियों के निकट मूर्खता है;

रोमियों 9:22 (HINIRV) »
कि परमेश्वर ने अपना क्रोध दिखाने और अपनी सामर्थ्य प्रगट करने की इच्छा से क्रोध के बरतनों की, जो विनाश के लिये तैयार किए गए थे बड़े धीरज से सही। (नीति. 16:4)
अर्थ का सीधे-सपष्ट सार
1 पतरस 2:8 में कहा गया है कि यीशु ठेस लगने का पत्थर और ठोकर खाने की चट्टान बन गए हैं—यह वर्णन वह है जब लोग प्रभु के वचन को अस्वीकार करते हैं और उनके कारण वे व्यवहार में ठहराए जाते हैं। इसका मूल अर्थ यह है कि ईश्वरीय योजना में यीशु विफल नहीं थे, बल्कि लोगों की स्थिति ने उनकी सामने आने को अस्वीकार किया; वे वचन के कारण ठहरते और ठोकर खाते हैं।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह पद पतरस के पहले पत्र के संदर्भ में है, जहां प्रेरित मानवजाति के प्रति सचेत करता है कि उद्धार की सुवार्ता उद्धार के लिए मार्ग है, परन्तु कुछ लोग इसे स्वीकार नहीं करते। यह वचन यह भी संकेत करता है कि पवित्र शास्त्र के कुछ भाग—जहाँ भयावह प्रतिघात और अवहेलना का अनुभव होता है—आधी नहीं है क्योंकि वे मसीह के साथ नहीं चलते। कुरिन्थियों के साथ संबद्ध आयतें बताती हैं कि मसीह चखता—क्रूस पर—जो आलोचकों के लिए लज्जा है, लेकिन विश्वासियों के लिए उद्धार की शक्ति है।
तार्थपूर्ण observations
उद्धृत विचारों का संगत उपयोग
यहाँ 19वीं शताब्दी के टिप्पणीकारों के सामान्य विचार इस प्रकार हैं:
मैथ्यू हैनरी का संकेत है कि मसीह के साथ विश्वसनीयता या अविश्वास दोनों ही एक आयाम में ईमानदार विवेक की परीक्षा हैं; अगर आप वचन से दूरी रखते हैं, तो आप ठेस का कारण बनते हैं।
अल्बर्ट बार्न्स ने कहा है कि यह वचन चट्टान का आह्वान है, जिसमें क्रूस पर आने वाले दुख और पाप पर विजय दोनों स्पष्ट होते हैं।
एडम क्लार्क बताते हैं कि यीशु के नजदीकी आयाम में यह विश्वास की महान परीक्षा है—जो लोग नहीं मानते, वे स्थिर ठहर जाते हैं; जो मानते हैं, उन्हें जीवन मिलता है।
संघटक क्रॉस-रेफरेंसेस
व्यावहारिक निष्कर्ष
हमारी जीवन-स्थिति कैसी होनी चाहिए? वचन के प्रकाश में चलना—यही ठेस से बचने का मार्ग है। मसीह पर विश्वास हमें केंद्रितता देता है, दुष्चक्रों के बीच भी स्थिर बनाता है, और दूसरों के लिए आशा बनता है। अपने विचारों और निर्णयों को प्रेरित करने वाले इस पत्थर-चट्टान पर ध्यान दें: यदि हम उस पर चलते हैं, तो जीवन का मार्ग सुरक्षित रहता है; यदि हम उसे ठुकराते हैं, तो अपराध की राह खड़ी होती है।
नोट: उपरोक्त विश्लेषण में संदर्भ और सार.original विचारधारा पर आधारित सार्वजनिक-domain टिप्पणीकारों के सामान्य बिंदु सम्मिलित हैं।