Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी1 पतरस 2:25 बाइबल पद की व्याख्या
1 पतरस 2:25 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्योंकि तुम पहले भटकी हुई भेड़ों के समान थे, पर अब अपने प्राणों के रखवाले और चरवाहे के पास फिर लौट आ गए हो। (यशा. 53:6, यहे. 34:5-6)
1 पतरस 2:25 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
1 पतरस 2:25 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

यशायाह 53:6 (HINIRV) »
हम तो सबके सब भेड़ों के समान भटक गए थे; हम में से हर एक ने अपना-अपना मार्ग लिया; और यहोवा ने हम सभी के अधर्म का बोझ उसी पर लाद दिया। (प्रेरि. 10:43, 1 पत. 2:25)

यहेजकेल 34:6 (HINIRV) »
मेरी भेड़-बकरियाँ तितर-बितर हुई है; वे सारे पहाड़ों और ऊँचे-ऊँचे टीलों पर भटकती थीं; मेरी भेड़-बकरियाँ सारी पृथ्वी के ऊपर तितर-बितर हुई; और न तो कोई उनकी सुधि लेता था, न कोई उनको ढूँढ़ता था। (यहे. 34:8)

लूका 15:4 (HINIRV) »
“तुम में से कौन है जिसकी सौ भेड़ें हों, और उनमें से एक खो जाए तो निन्यानवे को मैदान में छोड़कर, उस खोई हुई को जब तक मिल न जाए खोजता न रहे? (यहे. 34:11-12,16)
मुख्य अर्थ: फिर लौटना और चरवाहे की देखरेख
1 पतरस 2:25 का यह कथन बताता है कि ईमानदार विश्वासियों के जीवन में परिवर्तन कैसे होता है—भटकी हुई भेड़ों से वे निर्भीकता और स्थिरता की ओर लौटते हैं, क्योंकि वे अपने प्राणों के रखवाले और चरवाहे के पास पहुँच जाते हैं। यह उद्धार के समय से पहले और बाद की स्थितियों के बीच एक स्पष्ट धारा बनाता है: उद्धारक की देखभाल और दिशा।
पठन-परिप्रेक्ष्य (पाठ-संदर्भ)
पद का संदर्भ पतरस के पहले पाठ को दर्शाता है, जहाँ समुदाय को आस्थावान जीवन की धुरी के रूप में उद्धारकर्ता यीशु मसीह के साथ संबंध की याद दिलाई जा रही है। "पहले भटकी हुई भेड़ों" शब्द-चित्र पुरानी स्थिति को दर्शाते हैं—क्रूरता, अज्ञान और आत्म-स्वार्थ के रास्तों पर चलने की अवस्था—जो अब "चरवाहे के पास" लौट आए हैं, क्योंकि उन्होंने पवित्रता-युग के मार्ग को अपनाया है।
औचित्य और theology (धार्मिक विज्ञान)
यह पद ईश्वर के प्रेम और निरंतर देखरेख की पुष्टि करता है। “अपने प्राणों के रखवाले” शब्द यशायाह 53:6 और यहेज़कील 34:5-6 की अनुभूतियों से संगति बनाते हैं, जहाँ उद्धारकर्ता समाज की भलाइयों और मार्ग-दर्शन का स्रोत है। यह भेड़ों के गिरने और भटकने की स्थिति से बचाव-उद्धार की दिशा को स्पष्ट करता है: मसीह स्वयं वह है जो जीवित और प्रभावी तरीके से जीवन के हर कदम में साथ रहता है।
महत्त्वपूर्ण साहित्यिक संदर्भ (अनुशीलन की झलक)
इस संदेश को समझने में महत्त्वपूर्ण पुराने प्रमाणों के साथ नयी क्रिस्टो-उत्पत्ति की रागात्मकता जुड़ती है। ईश्वर के उद्धार-परिचय में चरवाहा-चित्र निरंतर एक आध्यात्मिक सुरक्षा और मार्गदर्शन को दर्शाता है।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संयोगित संदर्भ) और संक्षिप्त स्पष्टीकरण
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि उद्धारकर्ता का कर्तव्य हमारे लिए सुरक्षा, प्रत्यक्ष देखभाल और स्थिरता प्रदान करना है—हम उसकी आवाज़ सुनकर, उसकी राह पर चलना सीखते हैं।
विचार के लिए प्रश्न (स्व-चिंतन के अंक)
संक्षिप्त निष्कर्ष
1 पतरस 2:25 कहता है कि उद्धारकर्ता के पास लौटना ही जीवन-पथ का वास्तविक सुरक्षा-काम है। भटकी हुई अवस्था से लौटकर भरे हुए जीवन की ओर जाना, प्रभु यीशु के प्रेम और पवित्र व्यवस्था के प्रति हमारी प्रतिक्रिया है। यह संदेश हमें याद दिलाता है कि हमारी सुरक्षा और मार्गदर्शन एक सच्चे चरवाहे के हाथों में है, जो जान-पहचान और विश्वास के समुदाय को संचालित करता है।
नोट: इस पंक्ति के परिशोधन के लिएMatthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के प्रमुख विचार आपस में एक संगठित सार बनाते हैं—परन्तु उद्धरणों को संक्षिप्त संदर्भ में रखा गया है ताकि मूल पाठ के साथ एक सुव्यवस्थित, हिंदी पाठक-केन्द्रित टिप्पणी बने रहे।