Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी1 पतरस 2:21 बाइबल पद की व्याख्या
1 पतरस 2:21 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और तुम इसी के लिये बुलाए भी गए हो क्योंकि मसीह भी तुम्हारे लिये दुःख उठाकर, तुम्हें एक आदर्श दे गया है कि तुम भी उसके पद-चिन्ह पर चलो।
1 पतरस 2:21 पद-दर-पद बाइबल टीका
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1 पतरस 2:21 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 यूहन्ना 2:6 (HINIRV) »
जो कोई यह कहता है, कि मैं उसमें बना रहता हूँ, उसे चाहिए कि वह स्वयं भी वैसे ही चले जैसे यीशु मसीह चलता था।

मत्ती 16:24 (HINIRV) »
तब यीशु ने अपने चेलों से कहा, “यदि कोई मेरे पीछे आना चाहे, तो अपने आप का इन्कार करे और अपना क्रूस उठाए, और मेरे पीछे हो ले।

यूहन्ना 13:15 (HINIRV) »
क्योंकि मैंने तुम्हें नमूना दिखा दिया है, कि जैसा मैंने तुम्हारे साथ किया है, तुम भी वैसा ही किया करो।
मुख्य तात्पर्य: मसीह के पद-चिन्ह पर चलना
1 पतरस 2:21 में हमें वह आत्म-निश्चय मिलता है जो हर विश्वासी को चाहिए: मसीह के उदाहरण पर चलना, ताकि दुख-सहन भी उद्धार के मार्ग की शिक्षा बन जाए। यह वचन बताता है कि प्रेरितों के दामन पर जो रास्ता है, वही हमारा भी आचरण है—कष्टों के बीच भी विश्वासी मोह-त्याग नहीं बल्कि विश्वास का दृढ़ कदम है।
पाठ-विधेयक और साहित्यिक संदर्भ ( literary context )
यह आयत पतरस के दृष्टिकोण से लिखी गई है, जो मसीह के क्रूसीय उपस्थिति के पीछे के त्रासद अनुभवों को भी विश्वासियों के लिए एक प्रेरणा के रूप में प्रस्तुत करता है। प्रेरित पतरस यह स्पष्ट करते हैं कि वे जो मुस्कराते-हँसते नहीं, बल्कि दुःख उठाते हैं, उनके पीछे भी एक आदर्श है: मसीह का रास्ता जो दया, धीरता और निर्भयता से भरे है।
धर्मशास्त्रीय महत्त्व ( theological significance )
यह पाठ दो आयाम खोलता है: पहले, मसीह का दुःख-उठाना यह दर्शाता है कि ईश्वर की योजना में पीड़ा भी उद्धार का माध्यम हो सकती है; दूसरे, “पद-चिन्ह पर चलना” का अर्थ है उनके धार्मिक अनुशासन, पवित्र जीवन और समाज के संदर्भ में नैतिक आचरण। इस प्रकार अनुयायियों के लिए यह कर्म-उद्धार का आह्वान है—जो भी कठोर परिस्थिति आए, उसे मसीह के उदाहरण के अनुसार सामना करना है।
अन्यग्रंथों के साथ संबंध ( cross-references )
इन संदर्भों से स्पष्ट होता है कि दुख के बीच भी परमेश्वर की योजना किस प्रकार चलती है—हमारी आस्थाओं को उच्च बनाती है, और ईश्वर-आकृति के अनुकूल बनाती है।
संरचना-आधार विचार ( insights into the structure )
कथा-चिन्हित जीवन, नीतिगत आचरण और दैनन्दिन संघर्ष—इन तीनों पर केन्द्रित है। हमें यह समझना है कि मसीह के पद-चिन्ह पर चलना केवल एक आदर्श है, बल्कि एक व्यावहारिक मार्ग है: क्या हम अपनी कठिनाइयों में भी क्रूस की राह अपनाते हैं? क्या हमारी आवाज़ और व्यवहार दूसरों के लिए आशा बनते हैं?
reflection questions
संक्षिप्त निष्कर्ष
आप और मैं—हम सभी एक आदर्श के पीछे चलते हैं: मसीह। उनके दुख-उठाने के कारण, हम भी उनका पद-चिन्ह पकड़े हुए जीवन जीना सीखते हैं। यह न केवल आस्थाओं का कथन है, बल्कि दैनिक व्यवहार का मार्ग भी है: धैर्य, विनम्रता, और दूसरों के लिए सेवा।
मैथ्यू हेनरी, अlaut Barnes, और एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डायनों से लिए गए छोटे उद्धरण (यदि उपलब्ध) इस पाठ के भीतर संक्षेप में एक सुविधाजनक संदर्भ के रूप में मिलते हैं—but यहाँ पूर्ण उद्धरण नहीं दिए जा रहे, केवल आवश्यकता अनुसार संकेतित हैं. जबकि ये विचार उनके पूर्ण टिप्पणी-उद्धरणों से प्रेरित हैं, हमने उन्हें एक समरूप, एकीकृत व्याख्या के रूप में प्रस्तुत किया है.