Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी1 पतरस 2:24 बाइबल पद की व्याख्या
1 पतरस 2:24 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
वह आप ही हमारे पापों को अपनी देह पर लिए हुए* क्रूस पर चढ़ गया, जिससे हम पापों के लिये मर करके धार्मिकता के लिये जीवन बिताएँ। उसी के मार खाने से तुम चंगे हुए। (यशा. 53:4-5,12, गला. 3:13)
1 पतरस 2:24 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
1 पतरस 2:24 समानांतर पद और संबंधित वचन
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यशायाह 53:4 (HINIRV) »
निश्चय उसने हमारे रोगों को सह लिया और हमारे ही दुःखों को उठा लिया; तो भी हमने उसे परमेश्वर का मारा-कूटा और दुर्दशा में पड़ा हुआ समझा। (मत्ती 8:17, 1 पत 2:24)

मत्ती 8:17 (HINIRV) »
ताकि जो वचन यशायाह भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा गया था वह पूरा हो: “उसने आप हमारी दुर्बलताओं को ले लिया और हमारी बीमारियों को उठा लिया।” (1 पत. 2:24)

प्रकाशितवाक्य 22:2 (HINIRV) »
उस नगर की सड़क के बीचों बीच बहती थी। नदी के इस पार और उस पार जीवन का पेड़ था; उसमें बारह प्रकार के फल लगते थे, और वह हर महीने फलता था; और उस पेड़ के पत्तों से जाति-जाति के लोग चंगे होते थे। (यहे. 47:7)
1 पतरस 2:24 — उसके द्वारा हमारी चंगा और धार्मिकता का मार्ग
Immediate setting: चयनित verses एक ऐसे समय को दर्शाते हैं जब ख्रीस्त की पीड़ा और उसकी देह में त्राण के कारण विश्वासियों के लिए उद्धार की राह स्थापित होती है. पतरस के द्वारा यह क्रम सरल शब्दों में कहा गया है कि प्रभु यीशु ने अपने आप को हमारे पापों के लिए देह पर ले लिया, ताकि हम पापों के कारण मर कर धार्मिकता के लिए जीवन जिएँ।
क्या बताता है यह पाठ ईश्वर या विश्वास के बारे में
यह पंक्ति Gottes की गहरी योजना को उद्घाटित करती है: दुखती पीड़ा के बीच भी ईश्वर की दयालुता और धार्मिकता का वह अधिकारी-संस्थापन, जिसमें विश्वासी प्रतिरोध से मुक्त होकर नयी जीवन जिए। यीशु की क्रूस पर बलिदान, हमारी पापभरी स्थिति को दूरी बनाकर, धार्मिक जीवन की यात्रा का आरम्भ कर देता है। यह केवल एक तात्कालिक चोट नहीं, बल्कि परम प्रेम का स्पष्ट रूप है जो पाप के दाय से छुड़ाता है और सीधे विश्वास के मार्ग को बनाता है।
महत्वपूर्ण शब्दों/छवियों की स्पष्टता
संबद्ध पाठ (related passages)
- यशयाह 53:4-5,12: यीशु के दुख के प्रकरण में उधार लिए गए पाठ्यांश, जो पीड़ा के सहारे उद्धार की गति बनाते हैं; यह दरअसल पाप के दंड को स्वयं पर लेकर चंगा करने का संकेत है।
- गलातियों 3:13: विश्वासियों के लिये क्रूस की चढ़ाई से मिले उद्धार की यह धारणा और भी स्पष्ट होती है— त्याग और विश्वास के बीच एक अदला-बदली नहीं, बल्कि एक वायदे की पूर्ति।
आज के जीवन में अनुप्रयोग
1) उद्धार की यह दिशा याद दिलाती है कि जीवन का नया आरम्भ क्रूस के द्वारा है—अपने पुरानी आदतों से मोड़ कर ईश्वर की धार्मिक दिशा में बढ़ना।
2) किसी भी पाप-जीवन के दबाव में, प्रतिरोध न छोड़ें; विश्वास करें कि यीशु की चंगा करने शक्ति आपके साथ है और वह आपको नई जीवनशैली—धार्मिकता के अनुसार—जीने में सहायता करता है।
3) समुदाय में संवेदना और क्षमा को बढ़ावा दें; यह पाठ बताता है कि पाप के दंड से मुक्त होकर दूसरों के लिए करुणा और सेवा कैसे संभव है।
कुछ संक्षिप्त टिप्पणीकार विचार
यह पाठ Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke जैसे सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के स्वर से संयुक्त रूप में उद्धृत नहीं किया गया है, किन्तु उनके विचारों के सार को एकीकृत रूप में प्रस्तुत किया गया है: पाप से मुक्ति का यह मार्ग, ईश्वर की धार्मिकता की पूर्ति है और विश्वासियों को नया जीवन प्रदान करता है।
Cross-reference note: इस भाग से जुड़ी तात्पर्यभरी पंक्तियाँ बताती हैं कि क्रूस पर बलीदान के द्वारा हमारी शांति और जीवन का नया संदर्भ बनता है; यह विश्वास में एक दृढ़ आशा समर्थित करता है कि धार्मिकता केवल नियमों का पालन नहीं, बल्कि यीशु के आशीर्वादित जीवन के साथ संगति में जीना है।