Old Testament
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1 पतरस 2:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
प्रभु के लिये मनुष्यों के ठहराए हुए हर एक प्रबन्ध के अधीन रहो, राजा के इसलिए कि वह सब पर प्रधान है,
1 पतरस 2:13 पद-दर-पद बाइबल टीका
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1 पतरस 2:13 समानांतर पद और संबंधित वचन
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रोमियों 13:1 (HINIRV) »
हर एक व्यक्ति प्रधान अधिकारियों के अधीन रहे; क्योंकि कोई अधिकार ऐसा नहीं, जो परमेश्वर की ओर से न हो; और जो अधिकार हैं, वे परमेश्वर के ठहराए हुए हैं। (तीतु. 3:1)

तीतुस 3:1 (HINIRV) »
लोगों को सुधि दिला, कि हाकिमों और अधिकारियों के अधीन रहें, और उनकी आज्ञा मानें, और हर एक अच्छे काम के लिये तैयार रहे,

1 तीमुथियुस 2:1 (HINIRV) »
अब मैं सबसे पहले यह आग्रह करता हूँ, कि विनती, प्रार्थना, निवेदन, धन्यवाद, सब मनुष्यों के लिये किए जाएँ।
हिंदी टिप्पणी: 1 पतरस 2:13 (HINIRV)
यह उद्धरण एक प्रेरक प्रेरणा देता है कि कैसे ईश्वर के लोगों को समाज के व्यवस्थित क्रम में व्यवहार करना चाहिए। प्रबन्धक और शासन-व्यवस्था के प्रति सम्मान एक ऐसी दैनंदिन आस्था है जो विश्वास को आचरण में दिखाती है। यह पद न केवल कानून के पालन की बात करता है, बल्कि एक शुभ्रचरित्र और नम्रता के साथ नागरिक कर्तव्य निभाने की ओर संकेत करता है।
पद का पाठ और उसके अध्यायीय संदर्भ
“प्रभु के लिये मनुष्यों के ठहराए हुए हर एक प्रबन्ध के अधीन रहो, राजा के लिये कि वह सब पर प्रधान है,”
यह वाक्य 1 पतरस के शुरुआती अध्यायों से निकलकर शिष्यों में धैर्य और विनम्रता के गुणों को दर्शाता है। पतरस उन परिस्थितियों में लिखते हैं जब विश्वासियों पर राजशासन के दबाव रहते हैं; फिर भी उनका आह्वान है कि प्रभु की प्रभुधर्मी व्यवस्था में वे अपना स्थान स्वीकार करें और क्रमबद्ध शासन के अधीन रहें।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
अन्वय और तुलनात्मक पठन
यह विचार 1 पतरस 2:13 के साथ अन्य शास्त्रों में भी बाँधा गया है। उदाहरण के तौर पर समुदायिक आचार-व्यवस्था के संदर्भ में रोमियों 13:1-5 और तीतुस 3:1 जैसी जगहें-where शासन के आदेशों का सम्मान करने और बुरे समय में भी कानून के भीतर विश्वास की रक्षा की बात आती है। ये संदर्भ बताते हैं कि विश्व व्यवस्था के भीतर स्थिरता कैसे विश्वासियों की भूमिका में आती है।
व्यावहारिक अनुप्रयोग
1) व्यवहार में विनम्रता रखें: अराजकता या धमकी के बावजूद, आदर्श चरित्र बना रहे।
2) नियमों का सार समझें: मूर्त नियमों के भीतर नैतिकता और न्याय का पालन करें, ताकि सामाजिक शांति बनी रहे।
3) ईश्वर की सार्वभौम व्यवस्था को स्मरण रखें: प्रभु ने जो क्रम बनाया है, उसमें भागीदारी से हम अपने विश्वास को ठोस बनाते हैं।
संक्षेप
कुल मिलाकर यह पद एक नागरिक-आस्तिक संतुलन की शिक्षा देता है: प्रभु की अनुमति से स्थापित सरकारों के प्रति सम्मान, और साथ में हमारे आंतरिक विश्वास के अनुरूप आचरण। यह वह धागा है जो ईश्वर के राज्य और मनुष्य के समाज के बीच संतुलित जीवन को संभव बनाता है।
क्रॉस-रेफरेंसेस (संक्षेप में, बिना पूर्ण श्लोक पाठ)
रोमियों 13:1-5— इस बात को पुष्ट करता है कि प्रत्येक व्यवस्था के नीचे रहने में परमेश्वर की इच्छा क्या है। तीतुस 3:1— व्यवहारिक पथनिर्देशन, कैसे सभी को प्रस्तुत और विनम्र रहना है। पतरस 3:9— दया और दयालुता से उत्तर देने की आवश्यकता।
उद्धरण-निर्देश (मैथ्यू हेन्री, अלטर बार्न्स, एडम क्लार्क)
यदि इनमें से किसी एक से छोटे कथन उपलब्ध हों, तो उसी रूप में उद्धृत किया जा सकता है, जैसे: “हम किस प्रकार शासनों के अधीन रहें, ताकि परमेश्वर की महिमा बढ़े।” नोट: नीचे चले गए पाठ में पूर्ण उद्धरण नहीं दिए गए हैं; आवश्यक हो तो पवित्र-उद्धरण स्रोतों से संदर्भित किया जा सकता है।