Old Testament
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1 पतरस 4:1 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इसलिए जब कि मसीह ने शरीर में होकर दुःख उठाया तो तुम भी उसी मनसा को हथियार के समान धारण करो, क्योंकि जिसने शरीर में दुःख उठाया, वह पाप से छूट गया,
1 पतरस 4:1 पद-दर-पद बाइबल टीका
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1 पतरस 4:1 समानांतर पद और संबंधित वचन
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गलातियों 5:24 (HINIRV) »
और जो मसीह यीशु के हैं, उन्होंने शरीर को उसकी लालसाओं और अभिलाषाओं समेत क्रूस पर चढ़ा दिया है।

1 पतरस 3:18 (HINIRV) »
इसलिए कि मसीह ने भी, अर्थात् अधर्मियों के लिये धर्मी ने पापों के कारण एक बार दुःख उठाया, ताकि हमें परमेश्वर के पास पहुँचाए; वह शरीर के भाव से तो मारा गया, पर आत्मा के भाव से जिलाया गया।

कुलुस्सियों 3:3 (HINIRV) »
क्योंकि तुम तो मर गए, और तुम्हारा जीवन मसीह के साथ परमेश्वर में छिपा हुआ है।
1 पतरस 4:1—एक प्रेरक सम्बोधन: शरीर में दुःख के साथ जीना
यह पद यह स्पष्ट करता है कि मसीह ने अपने शरीर में दुःख सहन करके हमारी नैतिक दिशा बदल दी। इसलिए यीशु के उदाहरण को अपनाकर, विश्वासियों को पाप के प्रति चिकनाई कम करने के बजाय “उस मनसा” को हथियार की तरह धारण करना चाहिए—यानी जोश, धैर्य और ईमानदार परिश्रम से पाप से दूरी बनानी है। इस अध्याय में यह विचार सार रूप से उभरता है कि मसीह का दर्द हमारी आचार-व्यवहार के लिए निर्णायक प्रेरणा बन जाता है, ताकि संसार के सामने हम अपने नए जीवन के अनुरूप चलें।
पद के ऊपर प्रचलित संदर्भ
पद कहता है: इसलिए जब कि मसीह ने शरीर में होकर दुःख उठाया तो तुम भी उसी मनसा को हथियार के समान धारण करो। जो शरीर में दुःख उठाने वाला है, वह पाप से छूट गया। इसका तात्पर्य यह है कि मसीह का suffering मेंentering ने एक नया मानक स्थापित किया: शरीर के साथ बिताए हुए जीवन में पाप के हर आग्रह के पीछे एक दृढ़ निर्णय-वाक्य है। भरोसेमंद कार्य, बाधाओं के बीच स्थिरता, और संसार की महत्वाकांक्षाओं से पीछे हटना—ये सब इस “मनसा” के अभ्यास के अंग हैं।
मुख्य आध्यात्मिक पाठ
यह verses बताती है कि मसीह के दर्द ने एक नई प्रेरणा दी है: दुखी होकर भी जीवन को पवित्र रखना संभव है और पाप से दूर रहना असंभव नहीं है। लेखक यह सिखाता है कि विश्वासी अपने पुराने स्वभाव के अनुरोधों पर नियंत्रण पाकर, ईश्वर की इच्छा के अनुसार कर्म करें। यह नैतिकता का एक आंतरिक परिवर्तन है, जो बाहरी दमन से नहीं, बल्कि नई परिस्थितियों में भी पवित्र रहने की इच्छा से मिलता है।
अन्य बाइबल के समान विचार
- रोम 6:6–7: पुराने स्व को कुचलना—पाप के शासन से छुटकारा पाने के लिए शरीर की क़ैद का तात्पर्य।
- फिलिप्पियों 2:5–8: मसीह के नमक-नम्र व्यवहार और सेवकत्व का उदाहरण, जो हमारे मन में भी होने चाहिए।
इन संदर्भों से स्पष्ट है कि दुःख और आत्म-नियमन का लक्ष्य पवित्र जीवन की दिशा में जाना है, न कि दर्द के कारण हताश होना।
व्यावहारिक आवेदन
हिंदी संदर्भ-चर्चा और क्रॉस-रेफरंस
1) रोम 6:6–7: प्राचीन स्व को क्रूरता से निशाचित करना, ताकि पाप की शक्ति खो जाए। छोटी-सी स्पष्टता: हमारे पुराने स्व का दमन इसे संभव बनाता है।
2) फिलिप्पियों 2:5–8: मसीह की विनम्रता और पालन-निष्ठा का模樣, जिसे अपनाने से हमारा मन उसी दिशा में उन्मुख होता है।
3) यहसै 53:11–12 जैसे पथ-चिह्न भी स्मरण कराता है कि दुःख के रास्ते पर भी उद्धार और न्याय का काम चल रहा है।
संक्षेप सार
1 पतरस 4:1 का संदेश सरल है: मसीह ने शरीर में दुःख उठाकर एक नया पथ दिखाया है—पाप से दूरी और पवित्र जीवन की दिशा साफ़-साफ़ चुनना। हमारा उद्देश्य है कि हम उसी मनसा को धारण करें, और जीवन के हर अवसर पर पाप के बजाय ईश्वर की इच्छा को महत्व दें।
उद्धरण-नोट: इस पंक्ति के भीतर Matthew Henry, Albert Barnes या Adam Clarke के विशिष्ट शब्द-उद्धरण सीधे उद्धृत नहीं हैं, पर उनके विचारों की प्रेरणा इस पाठ के भीतर एकीकृत रूप से समाहित की गई है—जहाँ आवश्यक हो, संकल्पनात्मक सार शामिल किया गया है।