Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी1 पतरस 3:22 बाइबल पद की व्याख्या
1 पतरस 3:22 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
वह स्वर्ग पर जाकर परमेश्वर के दाहिनी ओर है; और स्वर्गदूतों, अधिकारियों और सामर्थियों को उसके अधीन किए गए हैं। (इफि. 1:20-21, भज. 110:1)
1 पतरस 3:22 पद-दर-पद बाइबल टीका
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1 पतरस 3:22 समानांतर पद और संबंधित वचन
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इब्रानियों 9:24 (HINIRV) »
क्योंकि मसीह ने उस हाथ के बनाए हुए पवित्रस्थान में जो सच्चे पवित्रस्थान का नमूना है, प्रवेश नहीं किया, पर स्वर्ग ही में प्रवेश किया, ताकि हमारे लिये अब परमेश्वर के सामने दिखाई दे*।

इब्रानियों 10:12 (HINIRV) »
पर यह व्यक्ति तो पापों के बदले एक ही बलिदान सर्वदा के लिये चढ़ाकर परमेश्वर के दाहिने जा बैठा।

इब्रानियों 12:2 (HINIRV) »
और विश्वास के कर्ता और सिद्ध करनेवाले* यीशु की ओर ताकते रहें; जिस ने उस आनन्द के लिये जो उसके आगे धरा था, लज्जा की कुछ चिन्ता न करके, क्रूस का दुःख सहा; और सिंहासन पर परमेश्वर के दाहिने जा बैठा। (1 पत. 2:23-24, तीतु. 2:13-14)
1 पतरस 3:22 का हिंदी अर्थ समझना
इस पद में कहा गया है कि मसीह स्वर्ग में परमेश्वर के दाहिनी ओर बैठा है और सभी स्वर्गीय सत्ता-शक्तियाँ उसके अधीन कर दी गई हैं। इसका उद्देश्य यह है कि क्षमा पाए हुए विश्वासियों के लिए उद्धार का केंद्र—क्रूस पर की गई वसूली—अब हर प्रकार के दमन से अधिक महान सत्ता के सामने स्थापित है।
संदर्भ–पृष्ठभूमि का संक्षेप
यह पवित्र लेख 1 पतरस के पाठक समुदाय से जुड़ा है जो धर्माभिमान और समाजिक दबाव के बीच स्थिर रहने की शिक्षा मांगता है। मसीह की महानता और उसका उद्धार-कार्य पूर्व में भक्ति के ठोस आधार के रूप में प्रस्तुत है; अध्याय 3 में खास तौर पर शांति और पुण्य-जीवन के लिए पति-पत्नी के रिश्तों का आराधना-योग उद्देश्य बताया गया है, किन्तु अंत में मसीह की महिमा भी विशद रूप से उद्धृत है—स्वर्गदूतों, शक्तियों, और सामर्थ्यों के अधीन होना, उसकी सर्वोच्च प्रभुता का संकेत है।
व्याख्यात्मक अवलोकन
मुख्य थीमैटिक बिंदु
अन्य संदर्भ के साथ संक्षिप्त जोड़
ईफि. 1:20–21 और भज 110:1 के संदर्भ इस तथ्य को पुष्ट करते हैं कि उद्धारकर्ता का सिंहासन और उसकी सत्ता ब्रह्माण्ड के हर विभाग में प्रभावशाली है। सम्बद्ध संदर्भ बताते हैं कि परमेश्वर ने मसीह को जीवित किया और आकाश में नियुक्त किया, ताकि सबकुछ उसी के अधीन हो जाए।
संश्लेषित टिप्पणी—प्रयोजन और जीवन पर प्रभाव
इस पवित्र मन्त्रमंडल में हमें यह सीख मिलती है कि विश्वास में स्थिरता—परिवार और समाज दोनों के व्यवहार में—उस पर निर्भर है जो सब कुछ सम्हालता है। मसीह की अद्भुत महिमा और सत्ता के कारण, विपत्तियों और भयों के बीच भी Christians के लिए धैर्य और साहस मिलती है।
छोटे cross-references (संक्षेप में) और उनके अर्थ
सीधी व्यावहारिक takeaway
जब जीवन में अस्थिरताएँ आएं, तो याद रखें कि मसीह की सत्ता सर्वोच्च है। उनके चरणों के नीचे हर परिस्थिति क्रमबद्ध है, और आपका विश्वास उसी महिमा-सत्ता पर टिके रहने से मजबूत होता है।