Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी1 पतरस 3:21 बाइबल पद की व्याख्या
1 पतरस 3:21 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
और उसी पानी का दृष्टान्त भी, अर्थात् बपतिस्मा, यीशु मसीह के जी उठने के द्वारा, अब तुम्हें बचाता है; उससे शरीर के मैल को दूर करने का अर्थ नहीं है, परन्तु शुद्ध विवेक से परमेश्वर के वश में हो जाने का अर्थ है।
1 पतरस 3:21 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
1 पतरस 3:21 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

मरकुस 16:16 (HINIRV) »
जो विश्वास करे और बपतिस्मा ले उसी का उद्धार होगा, परन्तु जो विश्वास न करेगा वह दोषी ठहराया जाएगा।

यहेजकेल 36:25 (HINIRV) »
मैं तुम पर शुद्ध जल छिड़कूँगा, और तुम शुद्ध हो जाओगे; और मैं तुमको तुम्हारी सारी अशुद्धता और मूरतों से शुद्ध करूँगा। (इब्रा. 10:22)

1 पतरस 1:3 (HINIRV) »
हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर और पिता का धन्यवाद हो, जिसने यीशु मसीह को मरे हुओं में से जी उठने के द्वारा, अपनी बड़ी दया से हमें जीवित आशा के लिये नया जन्म दिया,
1 पतरस 3:21 पर संक्षिप्त परिचय
यह पद जिस दृश्य को दर्शाता है, वह बपतिस्मा के प्रतीक और वास्तविक आत्म-परिवर्तन के बीच एक नयी रेखा खींचता है। नीचे के अनुभाग में हम इसी संदेश को सरल भाषा में समझते हैं: बपतिस्मा केवल बाहरी बंधन नहीं है, बल्कि पवित्र विवेक के साथ परमेश्वर के सामने मयूरित जीवन जीने की शुरुआत है।
पद के संदर्भ में स्पष्टता
1 पतरस का लेखक बतलाते हैं कि यीशु मसीह के जी उठने के द्वारा कर्म से नहीं, बल्कि पुनर्जीवन के शक्तिशाली कार्य से उद्धार संभव होता है। बपतिस्मा वह दृश्य है जो अब हमारे विश्वास के साथ गूंजता है—परन्तु यह शरीर के मैल को दूर करने का औजार नहीं, बल्कि विवेकपूर्ण आचरण के साथ परमेश्वर के सामने आत्म-समर्पण का संकेत है।
मुख्य आध्यात्मिक सीख
इस Verse का मुख्य पाठ यही है: बपतिस्मा के प्रतीक से प्रेरित विवेक और परमेश्वर के वश में आना—यानी दासता नहीं, पराकाष्ठा नहीं, बल्कि ईमानदारी, नम्रता और न्यायपूर्ण जीवन का पालन। यह ख्याम करता है कि उद्धार केवल बाहरी कर्म नहीं, बल्कि दिल की परिवर्तनशीलता है।
अन्य पवित्र ग्रंथों से सम्बद्ध विचार
• रोम 6:4—बपतिस्मा से हमारे पुराने जीवन का डूबना और नई ज़िंदगी में उठना। यह दृश्य हमारे मन:स्थिति के परिवर्तन को दर्शाता है, जो केवल औपचारिक कर्म से नहीं, बल्कि आत्मा-परिवर्तन से पूर्ण होता है।
• coli 2:12—बपतिस्मा के साथ उद्धार का सम्बन्ध है, पर यह कर्म से अधिक आस्था और प्रभु के साथ जुड़ाव को दर्शाता है।
• तुलना: प्राचीन निवृत्ति और नया जीवन—यही विषय पतरस हमें स्मरण कराता है कि विवेकपूर्वक जीना परमेश्वर के राजा-प्रभुत्व के अनुरूप है, चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों।
किए जाने वाले व्यावहारिक अनुप्रयोग
धार्मिक मूल्यों के साथ संरेखण
यह अंश यह बताता है कि बपतिस्मा के साथ जुड़ी प्रेरणा कब्र से जीवित रहने का संकेत देती है—यह विवेक की आवाज है जो परमेश्वर के नियंत्रण में रहने को मान्यता देती है।
क्रॉस-रेफरेंस (संक्षेप में)
रोम 6:4—नए जीवन की संरचना, जो बपतिस्मा से प्रेरित हो।
1_COR 10:13—परिस्थितियाँ बीच में भी ईमानदार विवेक से कर्मशील जीवन का अभ्यास।
मत्ती 3:16–17—यीशु के बपतिस्मा के समय आकाश का उद्घोष और प्रेरणा—विश्वास के भीतर परिवर्तन के प्रमाण।
संक्षेपित निष्कर्ष
1 पतरस 3:21 का संदेश यही है: बपतिस्मा केवल बाहरी क्रिया नहीं, बल्कि विवेकयुक्त आचरण के साथ परमेश्वर के वश में रहने की प्रेरणा है—यही नया जीवन जीने की राह है, जो यीशु मसीह के जी उठने के कारण सम्भव है।
छोटे उद्धरण (हेन्री, Barnes, Clarke से)
यदि उद्धरण उपलब्ध हों, तो संरक्षित रूप में यह निचोड़ना सम्मानजनक होगा कि कुछ प्रसिद्ध टिप्पणीकार इस verse को कैसे देखते हैं. (ध्यान दें: नीचे कोई पूर्ण पाठ उद्धरण नहीं दिया गया है।)