Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी1 पतरस 3:7 बाइबल पद की व्याख्या
1 पतरस 3:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
वैसे ही हे पतियों, तुम भी बुद्धिमानी से पत्नियों के साथ जीवन निर्वाह करो और स्त्री को निर्बल पात्र* जानकर उसका आदर करो, यह समझकर कि हम दोनों जीवन के वरदान के वारिस हैं, जिससे तुम्हारी प्रार्थनाएँ रुक न जाएँ।
1 पतरस 3:7 पद-दर-पद बाइबल टीका
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1 पतरस 3:7 समानांतर पद और संबंधित वचन
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उत्पत्ति 2:23 (HINIRV) »
तब आदम ने कहा, “अब यह मेरी हड्डियों में की हड्डी और मेरे माँस में का माँस है; इसलिए इसका नाम नारी होगा, क्योंकि यह नर में से निकाली गई है।”

मत्ती 19:3 (HINIRV) »
तब फरीसी उसकी परीक्षा करने के लिये पास आकर कहने लगे, “क्या हर एक कारण से अपनी पत्नी को त्यागना उचित है?”

1 पतरस 3:7 पर विचार: महिलाओं के साथ समान गरिमा और पतियों की जिम्मेदारी
यह वचन केवल Haush-व्यवहार की एक नैतिक सलाह नहीं है, बल्कि ईश्वर के बनाए हुए रिश्तों की गहराई को दर्शाने वाला प्रेरक संदेश है। इस पद में पति–पत्नी के संबंध में समान गरिमा और सम्मान की बाध्यता को रेखांकित किया गया है, ताकि घर के भीतर प्रार्थना की शक्ति विवेकपूर्ण सह-अस्तित्व से बनी रहे। यदि एक विवेकशील दम्पति यह समझ ले कि वे जीवन के वरदान के वारिस हैं, तो उनकी जोड़ी परमेश्वर की दृष्टि में पूरी तरह सक्षम बनती है और उनकी प्रार्थनाएँ निर्बाध हो सकती हैं।
1) मूल संदर्भ और मुख्य संदेश
पहला पाठ यह समझाता है कि हर पत्नि-पति संबंध में पारिवारिक जीवन के लिए “बुद्धिमानी” और “सम्मान” आवश्यक है। पुरुषों को यह सही ढंग से स्वीकारना चाहिए कि पत्नियाँ वे ही सदस्य हैं जिन्हें कठिन परिस्थितियों में नहीं, बल्कि सामान्य जीवन में भी कमजोर नहीं समझना चाहिए। साथ ही यह भी है कि दोनों पक्ष एक दूसरे के साथ बराबरी के वारिस हैं—यानी ईश्वर के आशीर्वाद में एकजुट और दायित्वपूर्ण। यह बंधन प्रार्थना के मार्ग को रोके नहीं, बल्कि उसे और अधिक प्रभावी बनाता है, जब घर में प्रेम और सम्मान कायम रहता है।
2) कोर विचार और प्रसंगगत संकेत
यह आत्म-स्वीकृति का संदेश देता है कि पारिवारिक नेतृत्व प्रेम और सम्मान की रीढ़ पर आधारित होना चाहिए, न कि अधिकार और श्रेष्ठता के दबाव पर। पति का व्यवहार यदि पत्नी की सहायता, सम्मान और सहयोग से भरा हो, तब उसका प्रभाव घर के भीतर शांति और ईमानदारी के साथ प्रकट होता है। “वारिस” कहकर दोनों को एक साथ जीवन के वरदानों की जिम्मेदारी सौंपी गई है; इससे स्पष्ट होता है कि लोग व्यक्तिगत लाभ के बजाय परमेश्वर की इच्छा के अनुसार एक-दूसरे के लिए आशीर्वाद बनते हैं।
3) क्रॉस-रेफरेंसे और उनसे जुड़ी धारणा
इन संदर्भों में परमेश्वर के परिवार के भीतर समानता, सम्मान और प्रेम पर बल दिया गया है; यह संदेश यहाँ husbands–wives के बीच संतुलित और भाईचारे-भरे सह-अस्तित्व की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
4) एडवाइस और शिक्षण (नीचे दिए गए टिप्पणीकारों के संक्षेप निष्कर्ष से प्रेरित)
Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के विचारों के मिलेजुले सार से यह निष्कर्ष निकलता है कि:
5) संक्षिप्त उपयोगी cross-references और संक्षिप्त स्पष्टीकरण
प्राथमिक संदेश के साथ 2–3 क्रॉस-रेफरेंसेस नीचे उनके मुख्य विचारों के साथ दिए गए हैं:
6) एक संक्षिप्त आध्यात्मिक चिंतन
ईश्वर के घर में सम्मान और प्रेम के साथ जुड़ा हर रिश्ता प्रार्थना के लिए द्वार बनता है। जब पति–पत्नी एक-दूसरे के प्रति सचमुच समानाधिकार और सम्मान के साथ चलते हैं, तब परमेश्वर की उपस्थिति उनके घर को आशीष से भर देती है। यह वचन बताता है कि प्रभु के वरदान के असल मार्ग में सुख-शांति और ईमानदार रिश्ते ही सबसे बड़े संसारहित के संकेतक हैं।