Old Testament
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1 पतरस 3:20 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
जिन्होंने उस बीते समय में आज्ञा न मानी जब परमेश्वर नूह के दिनों में धीरज धरकर ठहरा रहा, और वह जहाज बन रहा था, जिसमें बैठकर कुछ लोग अर्थात् आठ प्राणी पानी के द्वारा बच गए।
1 पतरस 3:20 पद-दर-पद बाइबल टीका
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1 पतरस 3:20 समानांतर पद और संबंधित वचन
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इब्रानियों 11:7 (HINIRV) »
विश्वास ही से नूह ने उन बातों के विषय में जो उस समय दिखाई न पड़ती थीं, चेतावनी पा कर भक्ति के साथ अपने घराने के बचाव के लिये जहाज बनाया, और उसके द्वारा उसने संसार को दोषी ठहराया; और उस धार्मिकता का वारिस हुआ, जो विश्वास से होता है। (उत्प. 6:13-22, उत्प. 7:1)

उत्पत्ति 6:3 (HINIRV) »
तब यहोवा ने कहा, “मेरा आत्मा मनुष्य में सदा के लिए निवास न करेगा, क्योंकि मनुष्य भी शरीर ही है; उसकी आयु एक सौ बीस वर्ष की होगी।”

2 पतरस 2:5 (HINIRV) »
और प्राचीन युग के संसार को भी न छोड़ा, वरन् भक्तिहीन संसार पर महा जल-प्रलय भेजकर धार्मिकता का प्रचारक नूह समेत आठ व्यक्तियों को बचा लिया; (उत्प. 6:5-8, उत्प. 7:23)
1 पेत्र 3:20 — हलचल से बचकर किनारे उद्धार
सीधा अर्थ: जिन्होंने उस बीते समय में आज्ञा न मानी जब परमेश्वर धीरज धरकर नूह के दिनों में जहाज़ बना रहा, और वह जहाज़ में बैठकर आठ लोग पानी से बच गए—यानी बचना केवल विश्वसनीय पवित्र दया के द्वारा, और उस समय के परीक्षण के बीच भी परमेश्वर की नीयत उन पर स्पष्ट थी।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह पाठ 1 पतरस के पत्र के केंद्र में है, जहाँ प्रेरित प्रेरितों को ऐसे कर्मों और विश्वास की गवाही देने के लिए प्रेरित करते हैं जो तर्क-सार और व्यवहार के साथ मेल खाती हो। नूह की कथा से लिया गया यह उदाहरण दिखाता है कि परमेश्वर ने जिन्हें विश्वास है और जिन्होंने उसकी आज्ञाओं का पालन किया, वे पानी के समय से कैसे बचाए गये। पुराने समय के यह घटनापरक संकेत हैं जो नए नियम में विश्वास की समानता और धैर्य का गुण सिखाते हैं।
व्याख्या और विचार
1) धीरज को परखना: परमेश्वर ने नूह को उन दिनों में भी धैर्य रखने की शिक्षा दी, जब समाज ने परे-परवेग में थी। आज भी धर्मी जीवन वही धैर्य मांगता है—जब स्थितियाँ विरोधाभासी हों या देरी दिखे।
2) आज्ञाओं का पालन बनाम दयालु उद्धार: नूह ने परमेश्वर की आज्ञा पर गौर किया और जहाज़ बनाकर उसकी राह में विश्वास दिखाया। यह साक्ष्य है कि उद्धार केवल दया से नहीं, बल्कि विश्वास-भरे अनुपालन से मिलता है।
3) बचाव का उद्देश्य: वे आठ व्यक्ति—परिवार सहित—पानी से सुरक्षित बच निकले, यह चित्र है कि ईश्वर का उद्धार विश्वसनीयता और विश्वास के साथ जुड़ा है।
छोटा थीमेटिक सूची
अन्य पार्थिव पाठ जो सम्वन्ध स्थापित करते हैं
यशायाह/यूहन्ना के संकेत— परमेश्वर के उद्धारकर्ता के साथ जुड़ाव एक स्थिर आस्था पर टिकता है, चाहे समय कितना भी कठिन क्यों न हो।
अन्य उद्धारी पथ: यूहन्ना 3:36; एफिसियों 2:8‑9— दया और विश्वास के संयुक्त कार्य से उद्धार की दिशा स्पष्ट होती है।
नीचे की व्यावहारिक सीख
शब्द-संयोजन और पंक्ति-आधार
प्रेरित पतरस इस घटना के माध्यम से बताता है कि ईश्वर की तरंगे और समय की परीक्षा में आस्था कैसे उद्धार का मार्ग बनाती है।
कौन से क्रॉस-रेफरेंसेस मदद कर सकते हैं
– रोम 5:1‑2: विश्वास के कारण होने वाली शांति और उद्धार के स्रोत के बारे में सामान्य-संवाद।
– 2 पतर 2:5: नूह जैसे धर्मी के लिए ईश्वर के उद्धार का चित्रण और न्याय की प्रकृति।
– यूहन्ना 3:36: विश्वास के साथ उद्धार का महत्त्व और उसका स्पष्ट परिणाम।
यह पाठ इस बात की याद दिलाता है कि कठिन समय में भी विश्वास और आज्ञा पालन मिलकर परमेश्वर की करुणा को प्रकट करते हैं, और समुदाय को सुरक्षित राह दिखाते हैं।