Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी1 पतरस 4:4 बाइबल पद की व्याख्या
1 पतरस 4:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इससे वे अचम्भा करते हैं, कि तुम ऐसे भारी लुचपन में उनका साथ नहीं देते, और इसलिए वे बुरा-भला कहते हैं।
1 पतरस 4:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
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1 पतरस 4:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 पतरस 3:16 (HINIRV) »
और विवेक भी शुद्ध रखो, इसलिए कि जिन बातों के विषय में तुम्हारी बदनामी होती है उनके विषय में वे, जो मसीह में तुम्हारे अच्छे चाल-चलन का अपमान करते हैं, लज्जित हों।

1 पतरस 2:12 (HINIRV) »
अन्यजातियों में तुम्हारा चाल-चलन भला हो; इसलिए कि जिन-जिन बातों में वे तुम्हें कुकर्मी जानकर बदनाम करते हैं, वे तुम्हारे भले कामों को देखकर उन्हीं के कारण कृपा-दृष्टि के दिन परमेश्वर की महिमा करें। (मत्ती 5:16, तीतु. 2:7-8)

यहूदा 1:10 (HINIRV) »
पर ये लोग जिन बातों को नहीं जानते, उनको बुरा-भला कहते हैं; पर जिन बातों को अचेतन पशुओं के समान स्वभाव ही से जानते हैं, उनमें अपने आप को नाश करते हैं।
1 पतरस 4:4 का पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह पद परमेश्वर के पवित्र जीवन शैली की अस्थायी असहमति को दर्शाता है जो विश्व के मानदंडों से भिन्न है। पतरस ने उन विश्वासियों के लिए लिखा जो मसीह में जीते हुए संसार की भिन्न-भिन्न चुनौतियों का सामना कर रहे थे। वे पहले ही क्रूस पर हुए दुखों और पुनरुत्थान के कारण नई दिशा लेते हैं, पर संसार उन्हें “अजीब” या “उलटे” मान कर तिरस्कार करता है। इस पद में वे लोग वर्णित हैं जो मजबूत प्रभुयाकरण के पीछे नहीं चलते और जिन्हें सचेत रूप से निष्कपट जीवन मिलना चाहिए, लेकिन समुदाय उनका उपहास करता है क्योंकि वे अभी भी पाप से मुक्त नहीं हैं।
प्यारे पाठक के लिए पाठ का तात्पर्य
यह-वाक्य उन लोगों का चित्रण है जो धर्मी जीवन के कारण अन्याय और विषपान आरोपों के साथ प्रकारांतर से निंदा का सामना करते हैं। पतरस स्पष्ट करते हैं कि यह संसार के अन्धविश्वास और नैतिक व्यवस्था से आता है, और जो प्रभु यीशु में छिपे रहते हैं वे असहजता का सामना कर लेते हैं। इसका मूल संदेश है: जगत की आलोचना हमारे चरित्र की पूर्ति नहीं कर सकती; हमारा उद्देश्य परमेश्वर की महिमा और दुनियावी लाभ की चिंता से ऊपर उठना है।
ईश्वर, विश्वास और नैतिक जीवन की शिक्षाएं
- विश्वासियों को संसार से भिन्न चलना सिखाया गया है; यह भिन्नता कभी-कभी कटु आलोचना का कारण बनती है, पर यह परमेश्वर की सख्त प्रतिक्रिया से नहीं डरना सिखाती।
- मसीह की मृत्यु और पुनरुत्थान में छिपी आशा उन्हें जीवन-परिवर्तन की प्रेरणा देती है, ताकि वे अवमानना के बावजूद भी नम्रता और मिसाल बनें।
कुंजी शब्दों की व्याख्या
अचम्भा: संसार के लोग विश्वास के कारण अलंघनीय जीवन को असामान्य मानते हैं, परन्तु यह वास्तविकता है कि ईश्वर के राज में चेतना और मोक्ष है। भारी लुचपन: यहाँ नैतिक शीलता, विनम्रता और पाप से दूरी की ओर संकेत है।
संबद्ध पाठ (क्रॉस-रेफरेंसेस)
ये संदर्भ इस बात को स्पष्ट करते हैं कि पवित्रता और विश्व से भिन्नता एक सामान्य परिणाम हैं, और इन्हीं कारणों से विश्व हमारे बारे में बातें बनाता है।
आज के संदर्भ में व्यवहारिक अनुप्रयोग
- संकट के समय में भी प्योह या दिखावटी धर्म से नहीं, बल्कि सत्य प्रेम और विनम्र आचरण से जीना सीखें।
- आलोचना मिलने पर भी क्रोध या जवाबी झगड़े से बचें; धैर्य, कठिनाई में也 विश्वास और नम्रता दिखाएं।
- समाज में नैतिकता के लिए खड़े रहे, लेकिन कट्टरता या स्वरूप-युद्ध से दूर रहें; दूसरों के लिए नम्रता और करुणा दिखाएं।
समाप्ति विचार
इस पद के पीछे का संदेश यह है कि विश्वास के साथ जीवन बिताने पर भी विश्व हमें अजीब समझेगा। पर विश्वासियों के लिए उद्देश्य स्पष्ट है: ईश्वर की महिमा और मसीह की पाथ में चलना — असहमतियों के बीच भी सत्य पर टिके रहना।
नोट: नीचे उद्धृत टिप्पणीकारों के सहज सार और उपयुक्त शब्दों के संकलन को पाठ के साथ जोड़ा गया है; यदि आप चाहें तो मैं इनके संकल्पनात्मक अंश को और स्पष्ट रूप में दे सकता हूँ।