Old Testament
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1 पतरस 4:15 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
तुम में से कोई व्यक्ति हत्यारा या चोर, या कुकर्मी होने, या पराए काम में हाथ डालने के कारण दुःख न पाए।
1 पतरस 4:15 पद-दर-पद बाइबल टीका
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1 पतरस 4:15 समानांतर पद और संबंधित वचन
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1 थिस्सलुनीकियों 4:11 (HINIRV) »
और जैसा हमने तुम्हें समझाया, वैसे ही चुपचाप रहने और अपना-अपना काम-काज* करने, और अपने-अपने हाथों से कमाने का प्रयत्न करो।

2 थिस्सलुनीकियों 3:11 (HINIRV) »
हम सुनते हैं, कि कितने लोग तुम्हारे बीच में आलसी चाल चलते हैं; और कुछ काम नहीं करते, पर औरों के काम में हाथ डाला करते हैं*।

1 तीमुथियुस 5:13 (HINIRV) »
और इसके साथ ही साथ वे घर-घर फिरकर आलसी होना सीखती है, और केवल आलसी नहीं, पर बक-बक करती रहती और दूसरों के काम में हाथ भी डालती हैं और अनुचित बातें बोलती हैं।
1 पतरस 4:15 का संदेश और उसका अर्थ
यही verse ईश्वर के प्रति विश्वस्त रहने वाले मसीही समुदाय के भीतर के आचरण पर केंद्रित है। पाठ साफ़ कहता है कि जो लोग परमेश्वर के लोक में रहते हैं, उन्हें किसी भी प्रकार के अपराध की वजह से कष्ट नहीं उठाना चाहिए— खासकर यदि वे अपराध करते हैं ताकि दूसरों पर प्रहार किया जा सके या खुद की लालच पूरी की जा सके। इसमें प्रमुख संदेश यह है कि सच्ची discipleship तब साकार मानी जाती है जब मनुष्य अपने आचरण को दण्डनीय कामों से बचाकर, पवित्र जीवन की दिशा में चलता रहता है।
यह पाठ ईश्वर या विश्वास के बारे में क्या बताता है
पतरस यह संकेत देता है कि ईश्वर का लोक नैतिकता और सत्य के ऊपर स्थिर है। विश्वास-प्रधान जीवन का अर्थ है कठिन परिस्थितियों में भी ईमानदारी, बुराई से बचना और दोष-स्वरूप विविध प्रकार के पापों से दूर रहना। अगर कोई व्यक्ति दूसरों को नुकसान पहुँचाने, चोरी करने, हत्या करने या कुकर्म करने जैसे कदम उठाता है, तो उसे दुःख उठाना समझ में आता है; परन्तु परमेश्वर चाहता है कि हम अपने अनुकूल व्यवहार से अपनी पवित्रता को बनाए रखें।
महत्वपूर्ण शब्दों या इमेजों की स्पष्ट व्याख्या
संबद्ध आयतें/कंठस्थ संदर्भ
1 पतरस 3:17— सिखाता है कि अच्छे कामों के कारण भी कुछ समय परेशानियाँ आ सकती हैं, परन्तु पाप से बचना आवश्यक है। रोमियों 12:17–21— बुरे का बदला न लें, परन्तु भलाई से उत्तर दें। याकूब 4:17— जो जानकर अच्छा काम नहीं करते, उनके लिए यह पाप है।
इन संदर्भों में संत पेत्रुथ के आसपास के विचार यह दिखाते हैं कि विश्वास में न सिर्फ धार्मिक उपवास, बल्कि नैतिक आचार-व्यवहार भी केंद्रीय है।
आज के समय में लागू करने योग्य उपाय
कुल सार
यही verses प्रेरित करता है कि वास्तविक विश्वास केवल शब्दों में नहीं, बल्कि आचरण में भी प्रकट हो। हत्यारों या चोरों के समान क्रियाकलाप से बचना, और पराए कामों से दूर रहना हमारे जीवन-धर्म का हिस्सा बन जाना चाहिए। यह पवित्रता के मार्ग पर चलना है, ताकि संसार देखें और जानें कि ईश्वर के लोक में वही उत्तरदायित्व भरा जीवन मिल सकता है।
यध्यपि यह निर्देश सीधे विशिष्ट अपराधों पर केंद्रित है, परन्तु इसका प्रमुख उद्देश्य यही है कि प्रत्यक्ष और आंतरिक पाप से बचते हुए विश्वासी अपनी पहचान ईश्वर के पुत्री-स्वरूप बनाए रखें।