Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी1 पतरस 4:19 बाइबल पद की व्याख्या
1 पतरस 4:19 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इसलिए जो परमेश्वर की इच्छा के अनुसार दुःख उठाते हैं, वे भलाई करते हुए, अपने-अपने प्राण को विश्वासयोग्य सृजनहार के हाथ में सौंप दें।
1 पतरस 4:19 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
1 पतरस 4:19 समानांतर पद और संबंधित वचन
उन बाइबल पदों को देखें जो विषय, शिक्षा या संदर्भ के आधार पर इस अंश से जुड़े हैं। समानांतर पदों की तुलना करने से इस वचन के संदर्भ और संदेश को अधिक गहराई से समझने में सहायता मिलती है। किसी चित्र को चुनें और संबंधित पद, उसकी व्याख्या तथा पद-दर-पद बाइबल टीका देखें।

2 तीमुथियुस 1:12 (HINIRV) »
इस कारण मैं इन दुःखों को भी उठाता हूँ, पर लजाता नहीं, क्योंकि जिस पर मैंने विश्वास रखा है, जानता हूँ; और मुझे निश्चय है, कि वह मेरी धरोहर की उस दिन तक रखवाली कर सकता है।

1 पतरस 3:17 (HINIRV) »
क्योंकि यदि परमेश्वर की यही इच्छा हो कि तुम भलाई करने के कारण दुःख उठाओ, तो यह बुराई करने के कारण दुःख उठाने से उत्तम है।

नीति का सार: परमेश्वर की इच्छा के अनुसार दुःख उठाकर भलाई में प्राण समर्पण
इस पद का सरल अर्थ है: जो लोग दुखों को सहन करते हुए भी परमेश्वर की इच्छा के अनुरूप चलते हैं, वे अपने जीवन को ईश्वर के हाथों में सौंपते हैं, ताकि उनकी चेष्टा और पीड़ा से भी परमेश्वर की भलाई प्रकट हो।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह संदेश पहली सुसमाचार-पत्र के संदर्भ में उन विश्वासियों के लिए है जो सत्यान्वेषी जीवन जीते हैं और प्रत्यक्ष चुनौती के समय भी ईश्वर के आशीर्वाद की गवाही देते हैं। 1 पतरस में शिष्यों के लिए ऐसा जीवन-तत्व स्थिर किया गया है जिसमें पीड़ा और भलाई एक साथ चलते हैं। समय-संदर्भ में यह पवित्रता, विश्वास और धैर्य के लिए प्रोत्साहन है, ताकि प्रभु के पुनरुत्थान के पीछे का उद्देश्य स्पष्ट रहे।
व्याख्यात्मक अवलोकन
- दुख उठाने के कारण: यह न तो निष्क्रिय भागीदारी है और न ही हताशा, बल्कि परमेश्वर की योजनाओं के अनुरूप चलना है।
- भलाई करते हुए: पीड़ा के माध्यम से भी सेवा और नेक कामों की भूमिका बनी रहती है; यह विश्वास का प्रदर्शक है।
- अपने-अपने प्राण को सृजनहार के हाथ में सौंप देना: पूर्ण भरोसा कि हमारी जिंदगी एक पवित्र उद्देश से ईश्वर के हाथों में है, जो न्याय और कृपा से निर्देशित है।
interpretive observations
संदर्भित क्रॉस-रेफरेंसेस
1) रोम 8:28 — परमेश्वर की व्यवस्था विश्वासियों के लिए अच्छी बनती है; विपत्ति में भी उसकी योजना के अनुसार साथ चलता है। यह verse इस पाठ को स्थिरता देता है कि दुःख बहुविध भलाई में बदल सकता है।
2) फिलिप्पि 1:29 — मसीह के लिए दुःख स्वीकारना एक अनमोल मौका है; निष्कर्षतः यह विश्वास के प्रमाण के रूप में उभरता है।
3) जो लोग trials से गर्दान मोड़ते नहीं: यह संदर्भ हमें धैर्य और निर्भरता दिखाते हुए मार्ग की ओर बढ़ने को प्रेरित करता है, ताकि परमेश्वर की चपलता बने रहे।
अनुभवजनित सार संक्षेप
जो दुःख परमेश्वर की इच्छा के अनुसार आता है, उसे भलाई में बदलना हमारा धर्म है। हमारी दया, हमारी सेवा और हमाराTrust—ये सब मिलकर यह दिखाते हैं कि हमारी जिंदगी सृजनहार के हाथों में सुरक्षित है।
सीखने योग्य व्यवहारिक निष्कर्ष
नोट: उद्धरण स्रोत
कई सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों से संकल्पित प्रेरणा मिलती है। नीचे के वे उद्धरण संरक्षित रूप से संकलित हैं: “दुःख उठाने वाला परमेश्वर के उद्देश्य के अनुसार भलाई में चलता है।” (Matthew Henry, Albert Barnes, Adam Clarke से संबद्ध विचार-रचना) यदि उपलब्ध हो, तो उपयुक्त जगहों पर इन्हें “संशोधित” करके प्रयुक्त किया गया है।