Old Testament
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1 पतरस 2:4 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
उसके पास आकर, जिसे मनुष्यों ने तो निकम्मा ठहराया, परन्तु परमेश्वर के निकट चुना हुआ, और बहुमूल्य जीविता पत्थर है।
1 पतरस 2:4 पद-दर-पद बाइबल टीका
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1 पतरस 2:4 समानांतर पद और संबंधित वचन
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भजन संहिता 118:22 (HINIRV) »
राजमिस्त्रियों ने जिस पत्थर को निकम्मा ठहराया था वही कोने का सिरा हो गया है। (1 पत. 2:4, लूका 20:17)

प्रेरितों के काम 4:11 (HINIRV) »
यह वही पत्थर है जिसे तुम राजमिस्त्रियों ने तुच्छ जाना* और वह कोने के सिरे का पत्थर हो गया। (भज. 118:22-23, दानि. 2:34, 35)

1 पतरस 2:7 (HINIRV) »
अतः तुम्हारे लिये जो विश्वास करते हो, वह तो बहुमूल्य है, पर जो विश्वास नहीं करते उनके लिये, “जिस पत्थर को राजमिस्त्रियों ने निकम्मा ठहराया था, वही कोने का सिरा हो गया,” (भज. 118:22, दानि. 2:34-35)
मुख्य व्याख्या बिंदु
1 पतरस 2:4 में प्रेरित पतरस कहते हैं: जो पुरुषों ने निकाल दिया है, उसे लोग लगभग महत्वहीन मानते हैं, पर परमेश्वर ने उसे अपने चुने हुए महत्त्वपूर्ण पत्थर के रूप में ठहरा दिया है। इस वाक्य का केंद्र भाव यह है कि यीशु, मानव-समुदाय के आसपास की सामान्य अनुमान के विरुद्ध, परमेश्वर की योजना में सर्वोच्च महत्व रखते हैं; वह ईश्वर के घर का जीवन्त पत्थर हैं, जिससे विश्वासियों की बपत और उनकी आस्थाएं जुड़ी रहती हैं। इस पंक्ति से पाठक यह समझते हैं कि श्रद्धा और आत्म-प्रदेश के द्वारा यीशु के साथ एक स्थिर, पवित्र संबंध बनाना चाहिए।
साहित्यिक संदर्भ (लिटरेरी संदर्भ)
पद-परिप्रेक्ष्य में यह पत्थर प्रकार-गतिपूर्वक संस्थापित “जीवित पत्थर” की कल्पना बनाता है, जो प्रेरित पतरस की अन्य प्रमुख बातों-विश्वास की दिशा, पवित्र जीवन और ईश्वर के घर के निर्माण से जुड़ी है। आलेख में पतरस यह बताता है कि विश्वासी एक सामाजिक-धार्मिक समुदाय में एकत्व के साथ शामिल होते हैं, जहाँ यीशु वह केन्द्रक हैं जिन पर सारी वस्तु टिकती है।
थियोलॉजिकल महत्व
- यीशु “परमेश्वर के निकट चुना हुआ” है, विश्राम और उद्धार के लिए ईश्वर की नियति का प्रमुख भाग है। यह चयन उद्धार का युक्ति-परक आधार है, न कि मनुष्यों की दृष्टि से।
- “बहुमूल्य जीविता पत्थर” के रूप में उसके स्थान से ईश्वरीय आशीर्वाद और विश्वासी समुदाय का निर्माण होता है। यीशु के साथ संबंध बनना, विश्वासी के लिए पवित्रता, आस्था और आध्यात्मिक घर बनावट का आधार है।
अन्य ग्रंथों के साथ-संबद्ध विचार (Cross-References)
नोट: नीचे दिये गये संदर्भ केवल संकल्पनात्मक हैं; पूर्ण पदों का पाठ यहाँ उद्धृत नहीं किया गया है।
Reflection Questions (चिंतन के प्रश्न)
संक्षिप्त निष्कर्ष
यह पद संदेश देता है कि यीशु, मानव-समुदाय की सोच से परे, परमेश्वर की नियुक्ति और उद्धार की योजना का केन्द्र है। विश्वासी समाज उसे अपने जीवन का आधार मानकर एक जीवित निर्माण बनाते हैं, जिसमें हर पत्थर का स्थान मूल्यवान है। हमारा उद्देश्य है कि हम यीशु के साथ गहरे संबंध में रहें, और यह दृढ़ करें कि हमारा जीवन उसकी महिमा के लिए ठहरा हुआ पत्थर बने।
याद रखने योग्य उद्धरण (Matt. Henry / Barnes / Clarke): यदि पंक्ति-विशिष्ट शब्द-चयन उपलब्ध हों, नीचे दिए गए सार्वजनिक-डोमेन टिप्पणीकारों के संक्षिप्त विचार दिए जाते हैं—ये मौखिक उद्धरण केवल अल्प-संदर्भ के लिए हैं: