Old Testament
उत्पत्ति निर्गमन लैव्यव्यवस्था गिनती व्यवस्थाविवरण यहोशू न्यायियों रूत 1 शमूएल 2 शमूएल 1 राजाओं 2 राजाओं 1 इतिहास 2 इतिहास एज्रा नहेम्याह एस्तेर अय्यूब भजन संहिता नीतिवचन सभोपदेशक श्रेष्ठगीत यशायाह यिर्मयाह विलापगीत यहेजकेल दानिय्येल होशे योएल आमोस ओबद्याह योना मीका नहूम हबक्कूक सपन्याह हाग्गै जकर्याह मलाकी1 पतरस 2:17 बाइबल पद की व्याख्या
1 पतरस 2:17 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
सब का आदर करो, भाइयों से प्रेम रखो, परमेश्वर से डरो, राजा का सम्मान करो। (नीति. 24:21, रोम. 12:10)
1 पतरस 2:17 पद-दर-पद बाइबल टीका
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1 पतरस 2:17 समानांतर पद और संबंधित वचन
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रोमियों 12:10 (HINIRV) »
भाईचारे के प्रेम* से एक दूसरे पर स्नेह रखो; परस्पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो।

नीतिवचन 24:21 (HINIRV) »
हे मेरे पुत्र, यहोवा और राजा दोनों का भय मानना; और उनके विरुद्ध बलवा करनेवालों के साथ न मिलना; (1 पतरस. 2:17)

रोमियों 13:7 (HINIRV) »
इसलिए हर एक का हक़ चुकाया करो; जिसे कर चाहिए, उसे कर दो; जिसे चुंगी चाहिए, उसे चुंगी दो; जिससे डरना चाहिए, उससे डरो; जिसका आदर करना चाहिए उसका आदर करो।
1 पतरस 2:17 का पाठ—परिचय और पंथन
पंक्ति का तात्पर्य तत्काल अपने समय के संदर्भ में है: ईश्वर-वचनों के अनुसार विश्वासियों को सामाजिक प्रतिष्ठान के भीतर सही ढंग से जीवनयापन करना सिखाया गया। इस वचन में लेखक पतरस ने समाज के विभिन्न वर्गों के प्रति संतुलित आचरण की बात की है—सबका सम्मान, भाइयों से प्रेम, परमेश्वर का भय और राज्य-प्रतिष्ठा की रक्षा। यह बताता है कि ईश्वर-चर्या केवल पाबंदी नहीं, बल्कि व्यवहार की नवीनता है जो विश्वास की सजगता से उपजती है।
ईश्वर या विश्वास के विषय में यह पाठ क्या बताता है
पौलिक संदेश की तरह पतरस दर्शाता है कि विश्वास के साथ व्यवहार सबके लिए सचेत जिम्मेदारी है। परमेश्वर का भय जीवन की प्रेरणा बनता है और यह लोगों के बीच ईमानदारी, विनय और नम्रता को जन्म देता है। राजा—या शासन-प्रबंधन—की मान-प्रतिष्ठा करना, न केवल सामाजिक-नियम के कारण बल्कि ईश्वरीय व्यवस्था के अनुरूप है।
मुख्य शब्दों और imagery की Clarification
संबद्ध पवित्र ग्रंथ (कथन-संयोजन) के संकेत
नीति-उक्त 24:21 और रोम 12:10 जैसे संदर्भ एक साथ यह दिखाते हैं कि सामाजिक जीवन में गुण कैसे मेल खाते हैं—आदर, प्रेम, और विनम्रता—जो विश्वास की प्रकृति हैं।
अन्य प्रमुख टिप्पणियाँ (सारांश) — किन Commentary स्रोतों से संकलन
मैथ्यू हेन्री, एलबर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के सार्वजनिक-डायरेस्ट्री टिप्पणियों में पसमुच्य बिन्दु यही संकेत देते हैं: विश्वास के साथ जीवनशैली का परिवर्तन, सामाजिक व्यवहार में नम्रता, और सत्ता-प्रभाव के प्रति जिम्मेदारी। संक्षेप में, इस वाक्य का उद्देश्य ईश्वर के मान्यता-प्रदत्त आदेश के अनुसार व्यवहार-परिवर्तन को प्रेरित करना है—खासकर समुदाय के भीतर एक-दूसरे के प्रति सम्मान व प्रेम की वृद्धि।
हिंदी पढ़ने वाले आज के जीवन से जुड़े Cross-References
ये संदर्भ मिलकर बताते हैं कि व्यवहारिक जीवन में सम्मान और प्रेम का उत्तम मिश्रण विश्वास की वास्तविक परीक्षा है।
आज के लिए व्यावहारिक पालन
- हर सामाजिक स्थान पर सम्मान दें—कर्तव्य-स्थल, परिवार, पड़ोसी, और शासन के प्रति।
- एक-दूसरे के साथ प्रेम बनाए रखें; भाईचारे की गरिमा में छोटे-छोटे आचरण भी बड़ी भूमिका निभाते हैं।
- परमेश्वर के भय को अपनी नीति बनाएं: नैतिक निर्णयों में सत्य, न्याय और पवित्रता को प्राथमिकता दें।
- सत्ता के साथ सहयोग, ताकत के बजाय सत्य और न्याय की मांग करें।
संक्षेप में, यह पाठ जीवन-व्यवहार को विश्वास की गहराई से जोड़ने की प्रेरणा देता है: हर संबंध में सम्मान, हर हृदय में प्रेम, और हर निर्णय में परमेश्वर की महिमा।