Old Testament
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रोमियों 13:7 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
इसलिए हर एक का हक़ चुकाया करो; जिसे कर चाहिए, उसे कर दो; जिसे चुंगी चाहिए, उसे चुंगी दो; जिससे डरना चाहिए, उससे डरो; जिसका आदर करना चाहिए उसका आदर करो।
रोमियों 13:7 पद-दर-पद बाइबल टीका
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रोमियों 13:7 समानांतर पद और संबंधित वचन
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लूका 20:25 (HINIRV) »
उसने उनसे कहा, “तो जो कैसर का है, वह कैसर को दो और जो परमेश्वर का है, वह परमेश्वर को दो।”

1 पतरस 2:17 (HINIRV) »
सब का आदर करो, भाइयों से प्रेम रखो, परमेश्वर से डरो, राजा का सम्मान करो। (नीति. 24:21, रोम. 12:10)

मत्ती 17:25 (HINIRV) »
उसने कहा, “हाँ, देता है।” जब वह घर में आया, तो यीशु ने उसके पूछने से पहले उससे कहा, “हे शमौन तू क्या समझता है? पृथ्वी के राजा चुंगी या कर किन से लेते हैं? अपने पुत्रों से या परायों से?”
रोमियों 13:7 का तत्कालीन संदर्भ और प्रकाश
पवित्र पत्र रोमियों में यह पाठ सरकार की व्यवस्था के साथ समर्पण और नागरिक कर्तव्य की चर्चा करता है। अध्याय 13 में पौলुस ने स्पष्ट किया है कि सभी मानवीय सत्ता ईश्वर द्वारा स्थापित है, ताकि समाज शांति से चले। यहाँ का तात्पर्य यह है कि जो कुछ भी कर-कर चाहिए, वह ठीक-ठीक चुकाएं—कर, करों, चुंगी, तथा अन्य सामाजिक दायित्व—ताकि कानून-व्यवस्था स्थिर रहे और ईश्वर के बन्धनभाव के अनुसार प्रेम से जीवन बिताया जा सके।
ईश्वर या विश्वास के बारे में पाठ क्या बताता है
यह पाठ सत्य और उत्तरदायित्व का रक्षा-बन्धन सुझाता है: ईश्वर ने सत्ता-प्रकृति को मानवीय समाज की व्यवस्था के लिए स्थापित किया है ताकि लोग एक-दूसरे के प्रति सम्मान और दायित्व निभाएं। विश्वासी के लिए यह एक आचरण-चिन्ह है कि वह कानून का पालन करे, क्योंकि यह प्रभु के प्रति प्रेम के पूरे प्रकट होने का तरीका है।
महत्वपूर्ण शब्दों और चित्रों की स्पष्टता
अन्य सन्दर्भ जो इस पाठ से जुड़ते हैं
1) 1 पतरस 2:13-17— सत्ता की स्थापना का उद्देश्य उत्कृष्ट आचरण और शांति बन रखना।
2) मत्ती 22:21— जो क्षत्रिय-भूमि है, वही देह का कर्तव्य है; चूँकि परमेश्वर की व्यवस्था अधिकारों के साथ है, इसलिए राष्ट्र-नियमों का सम्मान आवश्यक है।
3) मसीह की love को प्रेरित करने वाले प्रेम-आचरण—यही ईश्वर की शासन के साथ हमारा भाग बनता है, न कि अंध-निष्ठा.
हिंदीCommentary के प्रमुख ज्ञात विचारधाराओं के अनुप्रमाण
हार्मनी, बर्न्स और अडम क्लार्क जैसे डींग-सीमाओं के सार्वजनिक डोम-स्तरीय व्याख्यानों के अनुसार, यह पद नागरिक कर्तव्य की महत्ता को रेखांकित करता है—यह केवल कानून का पालन नहीं है, बल्कि प्रभु के प्रेम (यहोवा के प्रेम) की अनुसरण का परिणाम है। उनके अनुसार, यदि कानून अन्यायपूर्ण हो, तो शास्त्र-शास्त्रगत परामर्श होता है, परन्तु सामान्य मामलों में नागरिक दायित्व निभाना विश्वास और ईश्वर-आस्था को मजबूत करता है।
संक्षेपित एकीकृत व्याख्या
पवित्र लेखन बताता है कि संसार की व्यवस्था ईश्वर ने ही रची है। जिसने कर, चुंगी आदि दायित्व लिए हैं, वह समाज की न्याय-संरचना को मजबूत करता है और डर-आदर के संतुलन को बनाए रखता है। इसका उद्देश्य प्रेम है: प्रेम में न केवल ईश्वर के प्रति बल्कि पडोसी के प्रति भी उत्तरदायित्व बनता है।
आज-के-जीवन में अनुप्रयोग
उद्धृत विचार-स्वर: इस विषय-वस्तु पर मैथ्यू हेनरी, एल्बर्ट बार्न्स और एडम क्लार्क के संक्षिप्त संदर्भ मिलते हैं कि दायित्व निभाना न केवल सामाजिक नियम है, बल्कि आस्था के प्रमाण हैं; वे कहते हैं कि हर नियम-पालन व्यवहार के पीछे प्रेम-प्रेरणा होनी चाहिए, ताकि कानून और ईश्वर के प्रेम का एकीकृत प्रभाव स्पष्ट हो सके।
कार्य-चिह्न: यह पाठ हमारे समाज-व्यवस्था के प्रति जिम्मेदारी और ईश्वर के विधान के सम्मान की मंगल-धारा है—एक विश्वसनीय नागरिक जीवन की नींव स्थापित करता है।