Old Testament
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रोमियों 13:9 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
क्योंकि यह कि “व्यभिचार न करना, हत्या न करना, चोरी न करना, लालच न करना,” और इनको छोड़ और कोई भी आज्ञा हो तो सब का सारांश इस बात में पाया जाता है, “अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख।” (निर्ग. 20:13-16, लैव्य. 19:18)
रोमियों 13:9 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
रोमियों 13:9 समानांतर पद और संबंधित वचन
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निर्गमन 20:12 (HINIRV) »
“तू अपने पिता और अपनी माता का आदर करना, जिससे जो देश तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे देता है उसमें तू बहुत दिन तक रहने पाए।

मरकुस 12:31 (HINIRV) »
और दूसरी यह है, ‘तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रखना।’ इससे बड़ी और कोई आज्ञा नहीं।”

रोमियों 13:9 पर असरदार सार-संहार: प्रेमपूर्ण कर्तव्य का सार
मुख्य interpretive point: पवित्रता का सार कानूनों के भीतर नहीं बल्कि “अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम” में निहित है; प्रेम वह ताकत है जो सभी शेष नैतिक आचरण को समेट लेता है। रोमियों 13:9 में उद्धृत छः आदेशों के पीछे एक एकीकृत जीवन के नियम का आधार प्रेम ही है; इसलिए शास्त्रीय नियमों का असली अर्थ पड़ोसी के हित को संरक्षित करना है।
साहित्यिक संदर्भ ( literary context )
यूरोपीय नयी दुनिया के विचारों से भरे रोमियों की चिट्ठी में इस भाग में पवित्र-जीवन की दिशा स्पष्ट होती है: बपतिस्मा के बाद के जीवन में सांसारिक सत्ता के प्रति संतुलन रखना, और प्रेम के सम्मुख सभी बाह्यमूल्य नियमों को नहीं बल्कि आंतरिक प्रेम को केंद्र बनाना। पॉल पहले यह दिखाते हैं कि भ्रष्ट आचरण के कारण शारीरिक और सामाजिक बंधन टूटीं नहीं तो वे प्रेम से ही भर जाते हैं।
आस्था-सम्बन्धी theological significance
यहा प्रेम का नैतिक कर्तव्य कानून का सार बनता है। 'अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम' का तात्पर्य है कि हम दूसरों के वे सत्कार-ज़रूरतें जिन्हें हम स्वयं अपने लिए मांगते हैं, वे हम उनके लिए करें। इससे चोरी, हत्या, व्यभिचार, आदि के अपराधों का व्यावहारिक निरसन हो जाता है—क्योंकि प्रेम सामाजिक सम्बन्धों की स्थापना और सुरक्षा करता है।
पवित्रशास्त्र में अन्य संदर्भ (Cross-textual connections)
नोट: यदि चाहें तो इन संदर्भों के छोटे-छोटे उद्धरण नहीं दिए जाते; परन्तु विचार यह है कि मूल कानून के साथ प्रेम की पूर्ण संगति दिखाई देती है।
विचारमंच: चिंतन के प्रश्न (Questions for reflection)
सार-सन्निवेशन (Concluding synthesis)
रोमियों 13:9 में जो सभी नैतिक उद्गार संकलित दिखते हैं, वे स्पष्ट करते हैं कि ईश्वर का कानून प्रेम के एकीकृत जीवन का मार्गदर्शक है। व्यभिचार, हत्या, चोरी, और लालच—ये सभी प्रेम के विरुद्ध हैं, परंतु प्रेम ही इन सबका प्राकृतिक समाधान है: पड़ोसी के सत्य हित के लिए अपने हित को त्यागना। यह न केवल व्यक्तिगत आचरण की बात है, अपितु समाजिक जीवन की संरचना का भी आधार है।
उद्धरणीय टिप्पणी (Quoted notes)
यदि चाहें, तो नीचे दी गई टिप्पणी-उद्धरण उपलब्ध हैं:
Matthew Henry: “Love is the fulfilling of the law; to love our neighbor is to keep all the commandments.”
Albert Barnes: “The law is fulfilled when love prevails among men; external observances are hollow without a heart of love.”
Adam Clarke: “Where there is true love to one’s neighbor, the prohibitions against adultery, murder, theft, and covetousness are not merely avoided, but superseded by a higher principle.”