Old Testament
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रोमियों 13:13 बाइबल पद का अर्थ और पद-दर-पद टीका
जैसे दिन में, वैसे ही हमें उचित रूप से चलना चाहिए; न कि लीलाक्रीड़ा, और पियक्कड़पन, न व्यभिचार, और लुचपन में, और न झगड़े और ईर्ष्या में।
रोमियों 13:13 पद-दर-पद बाइबल टीका
*** इस टीका में सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध कुछ प्राचीन और क्लासिक स्रोतों की सामग्री शामिल है। कुछ सामग्री को कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरणों की सहायता से संसाधित, संक्षिप्त या अनुवादित किया गया हो सकता है। हर व्याख्या को बाइबल के पूरे पाठ और उसके संदर्भ के साथ अवश्य जाँचें। यदि आपको कोई त्रुटि या ऐसा अनुवाद मिले जिसे सुधारने की आवश्यकता हो, तो कृपया हमसे संपर्क करें।
रोमियों 13:13 समानांतर पद और संबंधित वचन
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गलातियों 5:21 (HINIRV) »
डाह, मतवालापन, लीलाक्रीड़ा, और इनके जैसे और-और काम हैं, इनके विषय में मैं तुम को पहले से कह देता हूँ जैसा पहले कह भी चुका हूँ, कि ऐसे-ऐसे काम करनेवाले परमेश्वर के राज्य के वारिस न होंगे।

इफिसियों 5:18 (HINIRV) »
और दाखरस से मतवाले न बनो, क्योंकि इससे लुचपन होता है, पर पवित्र आत्मा से परिपूर्ण होते जाओ, (नीति. 23:31-32, गला. 5:21-25)

1 थिस्सलुनीकियों 4:12 (HINIRV) »
कि बाहरवालों के साथ सभ्यता से बर्ताव करो, और तुम्हें किसी वस्तु की घटी न हो।
रोमियों 13:13 का अर्थ स्पष्ट शब्दों में
मुख्य संदेश यह है: सत्य प्रेम के मार्ग पर चलते हुए हमें दिनभर के व्यवहारों में संयम, पवित्रता और आत्म-नियंत्रण बनाए रखना चाहिए; ऐसे आचरण जो शत्रुता, दुराचार या उपहासजनक जीवन से परहेज करे।
संदर्भ-संदर्भ और पृष्ठभूमि
पेत्रुस के प्रेरित पौलुस रोम के ईसाई-आचरण पर लिखते हैं कि नए मानक के अनुसार जीवन जीना चाहिए। यह अध्याय 13 निर्भरतापूर्ण प्रभु-शासन और प्रेम के सामाजिक दायित्व पर केंद्रित है। रोम 12–13 के संदर्भ में, 属 शारीरिक अधिकारों और पड़ोसियों के साथ व्यवहार का ऊँचा स्तर पर पुनर्निर्धारण है। यहाँ “दिन” के समान व्यवहार—दैनिक, सतर्क, और पवित्र जीवन—की अपेक्षा है।
व्याख्यात्मक बिंदु
विचारशील टिप्पणियाँ (संकेतित विचारधारा से संगत)
पौलुस इस वाक्य में सामाजिक नैतिकता को व्यक्तिगत आचरण से जोड़ते हैं। अच्छाई का पहला चरण भीतर है—दिल में प्रेम की प्रेरणा और नियंत्रण—तब फिर व्यवहार बाह्य रूप से प्रकट होता है। सहयोगी प्रेरितियों के बिना बहिर्मुखी सुधार ठहर नहीं सकता।
संदर्भ-उद्धृत विचार (संकेतित, क्रॉस-रेफरेंसेस)
1) रोमियों 12:9-10: प्रेम का असली स्वरूप—ईमानदारी, प्रेम और परस्पर सम्मान।
2) गालातियों 5:22-23: आत्मिक फल—विकासशील संयम, आत्म-नियंत्रण और शांति।
3) 1 कुरिन्थियों 6:12: सब कुछ मुझे संभव है, पर सब कुछ लाभदायक नहीं; स्व-नियंत्रण परम लक्ष्य है।
सीधी-सीधी क्रॉस-रेफरेंसेस का संक्षिप्त स्पष्टीकरण
इन संदर्भों में एक ही धागा है: क्रियाओं का नियंत्रण भीतर से आता है; प्रेम, शांति और संयम के कारण जीवन के सभी क्षेत्रों में न्यायसंगत व्यवहार संभव बनता है।
संक्षिप्त व्यावहारिक निष्कर्ष
हर दिन, हर परिस्थिति में ऐसे निर्णय लें जो प्रेम, विनम्रता और आत्म-नियंत्रण को प्रकट करें। रात्रि-जीवन के क्षणों में भी शांति बनाए रखें, न कि मतभेदों में बढ़ोत्तरी।
टेकअवे
जीवन के छोटे-छोटे आदतें—समय की पाबंदी, शब्द-चयन, और जरूरत से अधिक नशे से बचना—ये सभी रोमियों 13:13 के अनुरूप एक स्थिर, पवित्र और सुरक्षित समाज बनाते हैं।
टिप्पणी स्रोत झलक: इस पाठ पर Matthew Henry, Albert Barnes और Adam Clarke के सार्वजनिक-डोमेन विचारों से आवश्यक तत्व समाहित किए गए हैं।